रांची: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बगान (हरमू रोड) में “प्राकृतिक अपक्व आहार सत्र” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश में प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. रमेश टावानी ने लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि सच्चा सुख केवल सच्चे आरोग्य में निहित है, और यह आरोग्य हमारी दिनचर्या एवं खान-पान पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण आज अधिकांश लोग अपचन, गैस, कब्ज, एसिडिटी, किडनी रोग, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल वृद्धि जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यही समस्याएं आगे चलकर डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रही हैं। इसके साथ ही मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद, भय, चिंता और चिड़चिड़ापन ने भी लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।
डॉ. टावानी ने जोर देते हुए कहा कि इन सभी रोगों से बचाव के लिए प्राकृतिक अपक्व आहार पद्धति अत्यंत प्रभावी है। उन्होंने बताया कि बिना दवाइयों और ऑपरेशन के भी प्राकृतिक चिकित्सा, योग और कच्चे आहार के माध्यम से शरीर और मन को स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी दिनचर्या में प्राकृतिक आहार को शामिल करें, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और जीवन संतुलित बने।
उन्होंने मानव शरीर को ईश्वर की अनमोल देन बताते हुए कहा कि यह एक स्व-चालित यंत्र की तरह कार्य करता है। यदि हम सही भोजन नहीं करते, तो अपच के कारण भोजन आंतों में सड़ने लगता है, जिससे शरीर में विषैले तत्व और जीवाणु उत्पन्न होते हैं, जो कई बीमारियों को जन्म देते हैं।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्थान की केंद्र संचालिका निर्मला बहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कच्चा भोजन जैसे फल, सब्जियां और अंकुरित अनाज सात्विक ऊर्जा से भरपूर होते हैं, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि मन को शांत और पवित्र भी बनाते हैं। यह भोजन ध्यान और एकाग्रता के लिए आवश्यक मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है।
निर्मला बहन ने कहा कि कच्चे आहार में प्राण ऊर्जा अर्थात जीवन शक्ति प्रचुर मात्रा में होती है, जो आत्मा की चेतना को ऊंचा उठाने में सहायक है। यह शरीर को शुद्ध करता है, पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और आलस्य को दूर करता है। साथ ही यह काम, क्रोध और लोभ जैसी नकारात्मक भावनाओं को भी कम करता है।
उन्होंने आगे कहा कि भोजन केवल शरीर ही नहीं, बल्कि आत्मा को भी प्रभावित करता है। भोजन की ऊर्जा सीधे हमारे विचारों और भावनाओं पर असर डालती है। कच्चे आहार के सेवन से विचारों में शांति आती है, नींद बेहतर होती है और चेहरे पर सकारात्मकता एवं शांति का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और सभी ने प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। यह सत्र स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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