ब्लॉग खोजें

राष्ट्रीय एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : संजय सर्राफ 125वीं जयंती पर महान शिक्षाविद् एवं जनसंघ संस्थापक को दी गई श्रद्धांजलि


रांची।
हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने भारत के महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी तथा भारतीय जनसंघ के संस्थापक Dr. Syama Prasad Mookerjee की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी उन महान विभूतियों में शामिल हैं, जिनके विचार और आदर्श आज भी देश के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक जीवन को दिशा प्रदान कर रहे हैं।

संजय सर्राफ ने कहा कि 6 जुलाई 1901 को Kolkata में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कम आयु में ही शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की और कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपतियों में से एक बने। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा प्रदान की। वे मानते थे कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गठित देश की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में डॉ. मुखर्जी ने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। हालांकि, राष्ट्रीय हितों और अपने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए उन्होंने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसने आगे चलकर देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैचारिक राजनीति को नई दिशा प्रदान की।

संजय सर्राफ ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का सबसे बड़ा योगदान भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष व्यवस्थाओं का मुखर विरोध किया और "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" का उद्घोष कर राष्ट्रीय एकीकरण के आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। उनका यह विचार आज भी राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर में नजरबंदी के दौरान डॉ. मुखर्जी का निधन हो गया। राष्ट्रहित और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए दिया गया उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। देश उनके योगदान को कभी भुला नहीं सकता।

संजय सर्राफ ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को आत्मसात करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। आज जब देश आत्मनिर्भरता, सुशासन, शिक्षा सुधार और राष्ट्रीय विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब उनके विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि देशभर में उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों एवं पुष्पांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

अंत में संजय सर्राफ ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संदेश स्पष्ट था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसकी एकता, सुरक्षा तथा सम्मान के लिए प्रत्येक नागरिक को समर्पित भाव से कार्य करना चाहिए। उनकी जयंती पर उनके आदर्शों को अपनाने तथा एक सशक्त, समृद्ध और अखंड हिंदुस्तान के निर्माण का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

राष्ट्रीय एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : संजय सर्राफ 125वीं जयंती पर महान शिक्षाविद् एवं जनसंघ संस्थापक को दी गई श्रद्धांजलि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : संजय सर्राफ 125वीं जयंती पर महान शिक्षाविद् एवं जनसंघ संस्थापक को दी गई श्रद्धांजलि Reviewed by PSA Live News on 8:12:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.