राम मंदिर चंदा विवाद पर फिर गरजे बृजभूषण शरण सिंह, बोले – "पहले दिन से ही चल रहा था खेल, इसलिए आज तक नहीं किए दर्शन"; निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
गोंडा/कैसरगंज। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने शनिवार को श्री राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर एक बार फिर बड़ा और चर्चित बयान देकर सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दोपहर लगभग 12 बजे मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि "श्री राम मंदिर में पहले दिन से ही खेल चल रहा था, यही कारण है कि मैं आज तक दर्शन करने नहीं गया।" उनके इस बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट, भाजपा और विपक्ष के बीच पहले से चल रही राजनीतिक चर्चा को नया आयाम मिल गया है।
पूर्व सांसद ने दावा किया कि उन्होंने यह बात आज नहीं बल्कि करीब चार वर्ष पहले ही सार्वजनिक रूप से कही थी, जब इस विषय पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने मंदिर से जुड़े कुछ मामलों पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी बातों पर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उनका कहना था कि समय के साथ जो विवाद सामने आए हैं, उन्होंने उनके पुराने बयानों को फिर चर्चा में ला दिया है।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि किसी धार्मिक संस्था या राष्ट्रीय आस्था के केंद्र से जुड़े मामलों में लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो उन्हें केवल राजनीतिक बयानबाजी मानकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
उन्होंने अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अनेक पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की उपेक्षा की गई। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण और उसके बाद की व्यवस्थाओं में उन लोगों को वह सम्मान नहीं मिला, जिन्होंने वर्षों तक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में जगह-जगह बैरिकेडिंग और नई व्यवस्थाओं के कारण आसपास के क्षेत्रों, विशेषकर गोंडा और देवीपाटन मंडल के लोगों को पहले जैसी सहज पहुंच नहीं मिल पा रही है।
पूर्व सांसद ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने श्री राम मंदिर चंदा को लेकर सवाल उठाए थे, तब भाजपा के नेताओं में सबसे पहले उन्होंने ही प्रतिक्रिया दी थी। उस समय भी उन्होंने कहा था कि "अगर मैं सब कुछ बोल दूंगा तो मेरा ही नुकसान होगा, क्योंकि इसमें बहुत बड़े लोग शामिल हैं।" उन्होंने तब भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने हालिया बयान में कहा कि "कोई भी मुद्दा बिना वजह नहीं उठता और बिना आग के धुआं नहीं होता।" उनके अनुसार, जब किसी विषय पर लगातार सवाल उठ रहे हों, तो उसे केवल अफवाह कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनका तथ्यों के आधार पर परीक्षण होना चाहिए, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यह विवाद अब केवल मंदिर ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी राजनीतिक और सामाजिक गूंज केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार तक भी पहुंच रही है। उनके अनुसार, यदि समय रहते सभी शंकाओं का समाधान नहीं किया गया तो इससे करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं पर असर पड़ सकता है। उन्होंने ट्रस्ट से अपेक्षा जताई कि वह सभी आरोपों पर स्पष्ट और पारदर्शी जवाब दे, ताकि किसी प्रकार की आशंका न रहे।
गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय तक श्री राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। वह स्वयं कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्हें श्री राम मंदिर के भूमि पूजन तथा उद्घाटन समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया था, जिसे लेकर उन्होंने पहले भी नाराजगी व्यक्त की थी। उनका यह भी आरोप रहा है कि अयोध्या से गोंडा और देवीपाटन मंडल के लोगों को योजनाबद्ध तरीके से दूर किया जा रहा है, जबकि इस क्षेत्र के लोगों का राम मंदिर आंदोलन में ऐतिहासिक योगदान रहा है।
पूर्व सांसद के इस ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां पहले से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता रहा है, वहीं भाजपा और मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल, बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए स्पष्ट कहा है कि श्रद्धा और आस्था के केंद्रों से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान केवल निष्पक्ष जांच और पूरी पारदर्शिता से ही संभव है।
Reviewed by PSA Live News
on
6:45:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: