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स्वामी विवेकानंद के आदर्श आज भी युवाओं के लिए पथप्रदर्शक : संजय सर्राफ

पुण्यतिथि पर किया नमन, कहा— आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और सेवा का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक


रांची, 4 जुलाई।
भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, युगदृष्टा संन्यासी और युवा प्रेरणास्रोत Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा, चरित्र निर्माण और मानव कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

संजय सर्राफ ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। इसी दिन वर्ष 1902 में पश्चिम बंगाल स्थित Belur Math बेलूर मठ में उन्होंने महासमाधि ग्रहण की थी। मात्र 39 वर्ष की आयु में देह त्यागने के बावजूद उन्होंने अपने विचारों, दर्शन और राष्ट्रनिर्माण की अवधारणा के माध्यम से ऐसा अमिट प्रभाव छोड़ा, जो आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में जन्मे स्वामी विवेकानंद, Ramakrishna Paramahamsa रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे। अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और सनातन दर्शन के गूढ़ तत्वों को आत्मसात किया तथा उन्हें वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का कार्य किया। वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित World's Parliament of Religions विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका ऐतिहासिक संबोधन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक पहचान बन गया। “अमेरिका की बहनों और भाइयों” शब्दों से आरंभ हुए उनके भाषण ने न केवल उपस्थित लोगों का हृदय जीता, बल्कि पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति की उदारता, सहिष्णुता और आध्यात्मिक शक्ति का परिचय कराया।

संजय सर्राफ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर निहित शक्तियों के विकास का साधन मानते थे। उनका विश्वास था कि चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों से युक्त शिक्षा ही समाज और राष्ट्र को मजबूत बना सकती है। उन्होंने युवाओं को सदैव यह संदेश दिया कि वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें, कठिन परिश्रम करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध संदेश— “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको”— आज भी युवाओं के लिए सफलता का मंत्र है। बदलते समय और बढ़ती चुनौतियों के बीच उनके विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। वर्तमान पीढ़ी यदि उनके आदर्शों को अपनाए तो व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

संजय सर्राफ ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें विचार गोष्ठियां, संगोष्ठियां, प्रेरक व्याख्यान, योग शिविर, सेवा कार्य, साहित्य अध्ययन, युवा जागरूकता कार्यक्रम और पुष्पांजलि सभाएं प्रमुख हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद के जीवन, संघर्ष, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन त्याग, सेवा, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उनकी शिक्षाएं आज भी आत्मनिर्भर, सशक्त और नैतिक मूल्यों से युक्त भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरक शक्ति का कार्य कर रही हैं। उनकी पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का भी दिवस है।

अंत में संजय सर्राफ ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं के चरित्र, विचार और कर्म में यदि विवेकानंद के संदेशों का समावेश हो जाए तो एक सशक्त, जागरूक और विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है। यही स्वामी विवेकानंद के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

स्वामी विवेकानंद के आदर्श आज भी युवाओं के लिए पथप्रदर्शक : संजय सर्राफ स्वामी विवेकानंद के आदर्श आज भी युवाओं के लिए पथप्रदर्शक : संजय सर्राफ Reviewed by PSA Live News on 8:18:00 pm Rating: 5

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