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मोरहाबादी में गूंजा आदिवासी गौरव का जयघोष, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का शुभारंभ

पारंपरिक वाद्ययंत्रों, नगाड़ा फॉर्मेशन और लोकनृत्य ने मोहा मन; कला, संस्कृति, खान-पान और जनजातीय जीवनशैली बनी आकर्षण का केंद्र






रांची।
ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन सम्मिलित हुए। दोनों ने महोत्सव में लगाए गए प्रदर्शनी शिविर, वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव, इमर्सिव जोन एवं चित्रकला शिविर का उद्घाटन किया।

उद्घाटन समारोह के दौरान मोरहाबादी मैदान आदिवासी संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज, नगाड़ा फॉर्मेशन की विशेष प्रस्तुति, मनमोहक लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा ने झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। महोत्सव में आदिवासी कला एवं शिल्प, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान, जनजातीय जीवन-पद्धति, लोक संगीत और नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

धरती पर आदिवासी समाज की अलग पहचान : हेमन्त सोरेन

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और ‘जोहार’ से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के लिए अपनी पहचान, संस्कृति और विरासत को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। धरती पर आदिवासी समुदाय की अपनी अलग पहचान है और इस पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से झारखंड में आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोरहाबादी मैदान में देश और झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी समुदायों की विविधता और सांस्कृतिक झलक देखने को मिल रही है। विभिन्न पंडालों में आदिवासी समाज के लोग अपनी जीवनशैली, कला, संस्कृति, परंपरा और आजीविका के साधनों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह बताने का माध्यम भी है कि आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आदिवासी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड में छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।

उन्होंने कहा कि इस बार के महोत्सव में झारखंड के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से भी आदिवासी समुदायों के लोग, कलाकार, कारीगर और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए हैं। उनके हुनर, अनुभव और परंपराओं के माध्यम से आदिवासी समाज की विविधता को समझने का अवसर मिल रहा है।

राज्यपाल की मौजूदगी को बताया विशेष गरिमा का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने समारोह में राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार की गरिमामयी उपस्थिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय की उपस्थिति इस समारोह की गरिमा बढ़ाने के साथ आदिवासी समाज के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

मुख्यमंत्री ने ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (TAC) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था राज्यपाल के मार्गदर्शन और छत्रछाया में आदिवासी समुदाय के हितों, उनके विकास और कल्याण से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

छात्रों की भावना को समझती है सरकार, पारदर्शिता के साथ मिलेगा न्याय

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राज्य में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत युवाओं और विद्यार्थियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ युवा और छात्र-छात्राएं अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार उनकी बातों को खुले मन से सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है। युवाओं को दिग्भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार उनकी भावनाओं को समझती है और उनके साथ पारदर्शिता के साथ न्याय किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी मामले में गड़बड़ी सामने आई है तो उसकी जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

युवाओं को राजनीतिक दिग्भ्रम से बचने की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक चश्मे से देखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी बात स्पष्ट और निर्भीक तरीके से सरकार के समक्ष रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न राजनीतिक शक्तियां युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास करती हैं। ऐसे में युवाओं को तथ्यों और वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए सजग रहने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब केवल आंदोलन या धरना-प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं की बात सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घर बैठे अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर चिंतित युवाओं तक भी पहुंचने का प्रयास करेगी। इसके लिए संवाद का माध्यम विकसित किया जा रहा है।

संविधान सभी को देता है समान अधिकार

मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है।

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानताएं मौजूद हैं। यदि असमानता बढ़ती है तो सामाजिक तनाव भी बढ़ता है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की बड़ी आवश्यकता है।

‘झारखंड केवल राज्य नहीं, वीरों की भूमि है’

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। इस धरती के वीर पूर्वजों ने देश के बड़े हिस्से में स्वतंत्रता और अधिकारों की चेतना विकसित होने से पहले ही अपने जल, जंगल और जमीन तथा अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।

उन्होंने कहा कि संघर्ष और प्रतिरोध की यह परंपरा झारखंड की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग राज्य के रूप में झारखंड को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इन वर्षों में राज्य ने अपनी अलग पहचान स्थापित करने तथा अपने पैरों पर खड़ा होने की दिशा में निरंतर प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और लंबे समय तक इसके संसाधनों का दोहन होता रहा। अब राज्य अपनी क्षमता और ताकत के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

युवाओं को सजग रहने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रगति को रोकने के लिए अलग-अलग तरीकों से लोगों को दिग्भ्रमित करने के प्रयास किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयासों के प्रति समाज और विशेष रूप से युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवैधानिक तरीके से निकाला जा सकता है। अपने ही लोगों के साथ लाठी-डंडे के बल पर किसी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन का अभिन्न हिस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि उनकी संस्कृति, जीवनशैली और अस्तित्व से जुड़े हुए हैं। आदिवासी समाज ने सदियों से इनकी रक्षा के लिए संघर्ष किया है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी महोत्सव अपनी गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह महोत्सव यादगार और प्रेरणादायक बनेगा तथा आदिवासी समाज अपने गौरव, आत्मविश्वास और पहचान के साथ आगे बढ़ेगा।

मोरहाबादी में दिखी जनजातीय विविधता की शानदार तस्वीर

महोत्सव परिसर में विभिन्न जनजातीय समुदायों की कला, संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। पारंपरिक हस्तशिल्प, कला एवं शिल्प, खान-पान, वाद्य यंत्र, लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया जा रहा है।

वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव के माध्यम से आदिवासी समाज और उनकी जीवनशैली से जुड़े विषयों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। वहीं इमर्सिव जोन और चित्रकला शिविर ने महोत्सव को आधुनिक और रचनात्मक स्वरूप प्रदान किया है।

मोरहाबादी मैदान में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने आदिवासी संस्कृति की विविध छटा का आनंद लिया। पारंपरिक परिधानों में कलाकारों और समुदायों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया।

महोत्सव को यादगार बनाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव आने वाले समय में झारखंड की आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों, कलाकारों, कारीगरों, प्रतिभागियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना केवल आदिवासी समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

उद्घाटन समारोह में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में राज्य के मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, राज्यसभा सांसद श्रीमती महुआ माजी, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, विधायक श्री अमित महतो, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कलाकार, कारीगर एवं बड़ी संख्या में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित रहे।

महोत्सव ने दिया एकता, संस्कृति और पहचान का संदेश

झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का उद्घाटन समारोह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आदिवासी समाज की पहचान, संघर्ष, गौरव और भविष्य की दिशा पर भी व्यापक संदेश दिया। मोरहाबादी मैदान में एक साथ दिखाई दी कला, संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता की तस्वीर ने यह संदेश दिया कि विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना ही झारखंड की असली शक्ति है।

मोरहाबादी में गूंजा आदिवासी गौरव का जयघोष, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का शुभारंभ मोरहाबादी में गूंजा आदिवासी गौरव का जयघोष, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का शुभारंभ Reviewed by PSA Live News on 8:21:00 pm Rating: 5

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