₹4.90 करोड़ का पुल कागज़ों में, जनता आज भी बांस की चचरी के सहारे: दरभंगा के तारडीह में विकास के दावों पर गंभीर सवाल
2024 में हुआ था शिलान्यास, दो वर्ष बाद भी निर्माण अधूरा; जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
दरभंगा (बिहार)। विकास कार्यों को लेकर सरकारें लगातार बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन कई स्थानों पर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड में कमला नदी पर प्रस्तावित पुल इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। लगभग ₹4.90 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल का वर्ष 2024 में शिलान्यास किया गया था, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप ग्रामीण आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर बांस की अस्थायी चचरी पुल के सहारे नदी पार करने को विवश हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। तस्वीरों में छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और ग्रामीण बांस की संकरी चचरी पर चलते दिखाई दे रहे हैं। बरसात के मौसम में यह रास्ता और अधिक खतरनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभाग द्वारा प्रभावी पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार पुल बनने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को विद्यालय जाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने तथा आम लोगों के आवागमन में सुविधा मिलने की बात कही गई थी। लेकिन निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होने से लोगों की उम्मीदें निराशा में बदल गई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी रही या कई महीनों तक कार्य पूरी तरह बंद रहा। अब स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद लोग उसी पुराने और असुरक्षित रास्ते का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण पूरा हो जाता तो उन्हें हर वर्ष बरसात में इस तरह जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करनी पड़ती।
बरसात के दौरान कमला नदी का जलस्तर बढ़ने से बांस की चचरी पुल और अधिक असुरक्षित हो जाती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग फिसलकर नदी में गिर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
क्षेत्र के लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए, निर्माण में हुई देरी के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कर आम जनता को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
यह मामला केवल एक पुल के निर्माण में देरी का नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है। करोड़ों रुपये की स्वीकृत योजनाओं का लाभ यदि समय पर जनता तक नहीं पहुंचता, तो विकास के दावों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
Reviewed by PSA Live News
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5:28:00 pm
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