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श्रीआण्डाल जयंती पर श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान

14 अगस्त को दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार धूमधाम से मनेगा आड़ीपूरम पर्व, भक्तों के बीच वितरित होगा रक्षा सूत्र


राँची, 11 अगस्त 2026।
रातू रोड स्थित राणी सती मंदिर लेन में दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (श्रीतिरुपति बालाजी) मंदिर में आगामी 14 अगस्त, शुक्रवार को श्रीलक्ष्मीजी की अवतारिका श्रीआण्डाल देवी की जयंती (आड़ीपूरम पर्व) श्रद्धा, भक्ति और दक्षिण भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा।

मंदिर प्रबंधन की ओर से बताया गया कि श्रीआण्डाल जयंती का विशेष पूजन प्रातःकाल निर्धारित शुभ मुहूर्त में संपन्न कराया जाएगा। इस दौरान भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर तथा माता गोदांबा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच भगवान और माता गोदांबा को समर्पित पवित्र रक्षा सूत्र वितरित किए जाएंगे।

भक्ति और दक्षिण भारतीय परंपरा का होगा विशेष संगम

श्रीआण्डाल देवी को दक्षिण भारतीय वैष्णव परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें गोदा, गोदांबा, रंगनायिकी तथा चुड़िकोड़त्ते नाचियार जैसे नामों से भी जाना जाता है। मंदिर में जयंती पर्व के दौरान उनकी आराधना विशेष विधि-विधान के साथ की जाएगी।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीआण्डाल देवी का अवतरण भगवान विष्णु के परम भक्त विष्णुचित्त सूरि (पेरियालवार) के जीवन से जुड़ा है। कहा जाता है कि विष्णुचित्त सूरि भगवान की सेवा के लिए तुलसी के पौधे लगाने और उनकी सेवा में लगे हुए थे। इसी दौरान भूमि से एक दिव्य एवं सौंदर्यमयी बालिका के प्रकट होने की कथा मिलती है। विष्णुचित्त सूरि ने उस बालिका को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उनका पालन-पोषण किया। यही बालिका आगे चलकर गोदांबा अथवा आण्डाल देवी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

भगवान विष्णु के प्रति समर्पण की प्रतीक हैं आण्डाल

धार्मिक कथाओं के अनुसार, बाल्यावस्था से ही श्रीगोदा देवी की भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति थी। वे अपने पिता के साथ तुलसी वन में भगवान की सेवा के लिए पुष्पमालाएं तैयार करती थीं। उनकी भक्ति और समर्पण धीरे-धीरे और अधिक प्रगाढ़ होता गया।

वैष्णव परंपरा में श्रीआण्डाल को भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण प्रेम, समर्पण और भक्ति की प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाद में भगवान रंगनाथ ने उनका पाणिग्रहण किया। इसी कारण दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न दिव्यदेशों में श्रीआण्डाल जयंती को विशेष श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है।

रक्षा सूत्र को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता

मंदिर प्रबंधन के अनुसार श्रीआण्डाल जयंती के अवसर पर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर और माता गोदांबा को समर्पित रक्षा सूत्र भक्तों के बीच वितरित किए जाएंगे। श्रद्धालु इस पवित्र रक्षा सूत्र को आस्था एवं श्रद्धा के साथ धारण करेंगे।

मान्यता है कि श्रीआण्डाल जयंती के पावन अवसर पर विधिपूर्वक पूजित रक्षा सूत्र धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा भगवान की कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर श्रीआण्डाल देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनने का आग्रह किया है।


श्रीआण्डाल जयंती पर श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान श्रीआण्डाल जयंती पर श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान Reviewed by PSA Live News on 7:45:00 pm Rating: 5

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