प्राकृतिक मेहंदी तैयार कर विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण और भारतीय लोक परंपराओं से जुड़ने का संदेश
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मधुबनी। संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल स्थित श्री नित्यानंद झा स्कूल ऑफ एजुकेशन (SNJSOE) में बी.एड. एवं डी.एल.एड. के छात्र-छात्राओं के लिए मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लेते हुए अपनी कलात्मक प्रतिभा, रचनात्मक सोच और पारंपरिक कला के प्रति रुचि का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राध्यापिकाओं ने मेहंदी की आकर्षक एवं कलात्मक डिजाइनों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। किसी ने पारंपरिक डिजाइनों को प्राथमिकता दी तो किसी ने आधुनिक एवं रचनात्मक पैटर्न के माध्यम से अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया। मेहंदी के बारीक डिजाइनों, बेल-बूटों और पारंपरिक आकृतियों ने प्रतियोगिता को आकर्षक बना दिया। विद्यार्थियों ने एक-दूसरे की हथेलियों पर मेहंदी लगाकर न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि आपसी सहयोग और टीम भावना का भी परिचय दिया।
भारतीय परंपरा और प्रकृति से जुड़ने का संदेश
इस प्रतियोगिता की सबसे विशेष बात यह रही कि विद्यार्थियों ने बाजार में उपलब्ध तैयार रासायनिक मेहंदी के बजाय मेहंदी के पत्तों को सिलबट्टे पर पीसकर स्वयं प्राकृतिक मेहंदी तैयार की। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय पारंपरिक जीवनशैली, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं विभाग के सहायक प्राध्यापक सुजीत कुमार मिश्रा ने कहा कि मेहंदी प्रतियोगिता को केवल मनोरंजन अथवा कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों को स्थानीय संस्कृति, प्रकृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल देती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मेहंदी तैयार करने की गतिविधि को प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया गया।
उन्होंने कहा कि मेहंदी भारतीय लोक संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राकृतिक तरीके से मेहंदी तैयार करने की प्रक्रिया विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब ले जाती है और उन्हें रासायनिक उत्पादों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने के प्रति जागरूक भी करती है।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्राध्यापक सुजीत कुमार मिश्रा ने किया। कार्यक्रम को शिक्षा विभाग के एकेडमिक को-ऑर्डिनेटर प्रो. आनंद कुमार चौधरी सहित विभाग के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता का आयोजन एजुकेशन विभाग के डीन डॉ. ज्योतेंद्र कुमार पाठक एवं प्राचार्य डॉ. बिधान चंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया।
इस अवसर पर डॉ. ज्योतेंद्र कुमार पाठक, डॉ. बिधान चंद्र चौधरी, डॉ. उमाकांत ठाकुर, डॉ. विमल कुमार कर्ण, डॉ. राकेश रंजन, प्रो. प्रत्यूष नंदन, प्रो. आनंद मोहन झा सहित अन्य प्राध्यापकों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनके अंदर आत्मविश्वास, धैर्य, सौंदर्यबोध और सृजनात्मक क्षमता को भी विकसित करती हैं।
निर्णायक मंडल ने किया प्रतिभागियों का मूल्यांकन
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की कलात्मकता, डिजाइन की मौलिकता, बारीकी, साफ-सफाई, रचनात्मकता तथा पारंपरिक एवं आधुनिक कला के संतुलित प्रयोग को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन किया गया। निर्णायक मंडल में विधि संकाय की सहायक प्राध्यापिकाएं अर्चिता कुमारी, सोनी कुमारी एवं शाहिस्ता शामिल रहीं।
निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई मेहंदी डिजाइनों का बारीकी से अवलोकन किया और उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। प्रतियोगिता में शामिल सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
सर्वांगीण विकास में सहायक हैं ऐसी गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कक्षा में पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को विकसित करना भी है। इस तरह की सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी छिपी प्रतिभा सामने लाने का अवसर देती हैं।
मेहंदी प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय लोक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों, रचनात्मक कला और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला। साथ ही, विद्यार्थियों में सहयोग, अनुशासन, धैर्य और सृजनात्मक अभिव्यक्ति जैसी क्षमताओं को विकसित करने का भी प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री नित्यानंद झा स्कूल ऑफ एजुकेशन के सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतियोगिता के समापन पर विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा और उन्होंने भविष्य में भी इस तरह की रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
Reviewed by PSA Live News
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10:05:00 pm
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