“युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ की परंपरा अब बंद होनी चाहिए” : प्रो. निरंजन कुमार
जेपीएससी-जेएसएससी की विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच, पारदर्शी भर्ती और संस्थागत सुधार की उठी मांग
नई दिल्ली। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को अब देश-विदेश में रहने वाले झारखंड से जुड़े शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और प्रबुद्ध नागरिकों का भी समर्थन मिलने लगा है। इसी क्रम में झारखंड एकेडमिक फोरम (जेएएफ) ने राज्य के आंदोलनरत छात्रों को अपना नैतिक समर्थन देते हुए सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
नई दिल्ली में आयोजित झारखंड एकेडमिक फोरम की विशेष बैठक में राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन, जेपीएससी एवं जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों तथा युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता फोरम के संस्थापक-अध्यक्ष एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. निरंजन कुमार ने की।
“युवा झारखंड की सबसे बड़ी पूंजी”
बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. निरंजन कुमार ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन युवाओं के बेहतर भविष्य, रोजगार के अवसर और समावेशी विकास के सपने के साथ हुआ था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया बार-बार विवादों के घेरे में आती रही है।
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में अनियमितता और नियुक्ति प्रक्रियाओं पर लगातार उठते सवाल केवल प्रशासनिक चूक नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। वर्षों तक तैयारी करने वाले छात्र जब परीक्षा में अनियमितता या प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल देखते हैं, तो उनके भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास कमजोर होता है।
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं पर उठे सवालों का हवाला
फोरम ने बैठक में झारखंड की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा गंभीर आरोपों के कारण विवादों में रही। मामले में जांच के आदेश, छापेमारी और गिरफ्तारियों के बाद मुख्य परीक्षा को स्थगित करना पड़ा।
इसी तरह जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने का मामला भी युवाओं के बीच गहरी निराशा का कारण बना। वहीं, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की दौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों की मौत ने भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की सुरक्षा और व्यवस्थागत तैयारियों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
फोरम ने मीडिया में सामने आए ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी और बदलाव जैसे आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। हालांकि, फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि सक्षम और स्वतंत्र जांच के बाद ही होनी चाहिए।
“यह केवल कुछ लोगों की गलती का मामला नहीं”
प्रो. निरंजन कुमार ने कहा कि यदि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार प्रश्नपत्र लीक, अनियमितता अथवा अन्य गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो इसे केवल कुछ व्यक्तियों की कथित धांधली मानकर समाप्त नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पूरी व्यवस्था, निगरानी तंत्र, परीक्षा संचालन और संस्थागत जवाबदेही की भी समीक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को वर्षों तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में बैठना पड़ता है। परीक्षा रद्द होने या नियुक्ति प्रक्रिया लंबित होने से उनका समय, आर्थिक संसाधन और मानसिक ऊर्जा प्रभावित होती है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय मानकर देखा जाना चाहिए।
लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों को समर्थन
फोरम ने कहा कि वर्तमान छात्र आंदोलन में शामिल युवा अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। बारिश, कठिन परिस्थितियों और अनेक परेशानियों के बावजूद छात्रों द्वारा लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखना गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जेएएफ ने कहा कि छात्र आंदोलन को किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह आंदोलन मूल रूप से निष्पक्ष भर्ती, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठा रहा है।
फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड एकेडमिक फोरम किसी राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति के विरुद्ध मंच नहीं है। यह झारखंड से जुड़े देश-विदेश के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और प्रबुद्ध नागरिकों की सामूहिक चेतना का मंच है, जिसका उद्देश्य राज्य के शैक्षणिक, सामाजिक और विकासात्मक हितों को मजबूती देना है।
फोरम की प्रमुख मांगें
छात्र आंदोलन को नैतिक समर्थन देते हुए झारखंड एकेडमिक फोरम ने सरकार और संबंधित संस्थाओं के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें—
- विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
- जेपीएससी एवं जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
- प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और ओएमआर/डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।
- परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में आवश्यक ढांचागत एवं संस्थागत सुधार किए जाएं।
- अभ्यर्थियों की शिकायतों के लिए प्रभावी और स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र बनाया जाए।
देशभर के शिक्षाविदों से समर्थन की अपील
झारखंड एकेडमिक फोरम ने देशभर में रह रहे झारखंड मूल के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से भी अपील की कि वे छात्रों की जायज मांगों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करें।
फोरम का कहना है कि झारखंड के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होना चाहिए। भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल किए बिना युवाओं में व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत नहीं किया जा सकता।
जेएएफ ने कहा कि आंदोलनरत छात्रों की मांगों को टकराव की दृष्टि से देखने के बजाय संवाद, संवेदनशीलता और समाधान के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। फोरम ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस और समयबद्ध कदम उठाएगी।
झारखंड एकेडमिक फोरम ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
Reviewed by PSA Live News
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10:33:00 pm
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