'युवाओं को सही दिशा देना जरूरी, लेकिन कानून का सम्मान भी हर हाल में बना रहना चाहिए' : अशोक कुमार झा
आंदोलन की आड़ में हिंसा या कानून तोड़ने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती, सुरक्षा बलों का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है : सर्व जन विकास पार्टी
रांची। जंतर-मंतर प्रदर्शन और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले युवाओं को माफ करने संबंधी दिए गए संदेश पर सर्व जन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा देश के युवाओं को भटके हुए मानकर उन्हें सुधार का अवसर देने की बात एक सकारात्मक और मानवीय सोच मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा भावावेश में गलती कर बैठता है, तो उसे सही दिशा दिखाने का प्रयास होना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और अधिक गंभीर पक्ष भी है, जिस पर देश को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। श्री झा ने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा अन्य महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों वाले देश में आज युवाओं के भीतर इतना आक्रोश क्यों पैदा हो रहा है कि वे कई बार कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक घटना का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी आत्ममंथन का अवसर है। यदि युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है तो उसके मूल कारणों को पहचानकर समाधान निकालना सरकार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है।
अशोक कुमार झा ने कहा कि इस प्रकार के आंदोलनों से समाज में एक गलत संदेश जाने का भी खतरा है। यदि आम लोगों के बीच यह धारणा बनने लगे कि सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ना, कानून हाथ में लेना या हिंसक रास्ता अपनाना प्रभावी तरीका है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण विरोध और संवाद की परंपरा पर आधारित है, इसलिए किसी भी आंदोलन की सफलता का आधार भी संवैधानिक मूल्यों का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि आंदोलन की आड़ में कानून का उल्लंघन करने वालों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधे माफी देने की प्रवृत्ति विकसित होती है, तो इससे समाज में कानून के प्रति सम्मान प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कानून का शासन किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होता है और न्यायिक प्रक्रिया का पालन हर परिस्थिति में होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि लोगों में कानून का भय और सम्मान दोनों कमजोर पड़ने लगें, तो इसका दूरगामी प्रभाव सामाजिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सर्व जन विकास पार्टी के संस्थापक ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं का प्रभाव सुरक्षा बलों के मनोबल पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि देश के पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिन-रात कार्य करती हैं। यदि आंदोलन के दौरान उन पर हमले हों या उन्हें निशाना बनाया जाए और ऐसे मामलों में कानून का प्रभावी पालन न हो, तो इससे सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि बड़े जन आंदोलनों की आड़ में असामाजिक तत्व या वांछित अपराधी भी भीड़ का फायदा उठाकर सुरक्षा बलों या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वास्तविक आंदोलनकारी भी कठिनाई में पड़ जाते हैं और आंदोलन की मूल भावना कमजोर हो जाती है। इसलिए किसी भी आंदोलन में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और असामाजिक तत्वों की पहचान करना प्रशासन तथा आयोजकों दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अशोक कुमार झा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध, प्रदर्शन और अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह अधिकार संविधान और कानून की मर्यादाओं के भीतर रहकर ही प्रभावी और सम्मानजनक बनता है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, रोजगार, नवाचार और सामाजिक विकास की दिशा में लगाने की आवश्यकता है, ताकि उनका आक्रोश सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सके।
उन्होंने अंत में कहा कि यह पूरा घटनाक्रम केवल एक आंदोलन या एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र के लिए आत्मचिंतन का विषय है। देश के सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और युवाओं को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि लोकतंत्र की ताकत संवाद, संविधान और कानून के सम्मान से ही बनी रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संयम के साथ आगे बढ़ना होगा।
Reviewed by PSA Live News
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10:18:00 am
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