वैशाली की सड़कें बनीं 'मौत का हाईवे': 16 महीने, 444 सड़क हादसे और 464 मौतें; बेपरवाह प्रशासन के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा
हाजीपुर (विशेष संवाददाता)। बिहार के वैशाली जिले में सफर करना अब जान हथेली पर लेकर चलने के समान हो गया है। जिले की रफ्तार को खून की नजर लग गई है। महज 16 महीनों के भीतर सड़क दुर्घटनाओं में 464 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। इन भयावह और रूह कंपा देने वाले आंकड़ों ने जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। इस गंभीर मुद्दे पर अब कांग्रेस पार्टी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रंजीत पंडित और वरिष्ठ नेता मो. सद्दाम हुसैन ने वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) शुभांक मिश्रा से मुलाकात की है। इसके साथ ही जिलाधिकारी (DM) और जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर जिले में तत्काल प्रभाव से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग उठाई है।
आंकड़े जो रूह कंपा दें: हर महीने 30 लोगों की जा रही जान
कांग्रेस जिला अध्यक्ष रंजीत पंडित ने यातायात थाना, हाजीपुर से प्राप्त आधिकारिक आरटीआई और सूचनाओं का हवाला देते हुए जो सच सामने रखा है, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक (मात्र 16 महीने की अवधि में) वैशाली जिले में 444 भीषण सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 464 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 44 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
इसका सीधा अर्थ है कि जिले में हर महीने औसतन 29 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और हर दिन लगभग एक व्यक्ति इन खूनी सड़कों का शिकार हो रहा है। रंजीत पंडित ने स्पष्ट कहा, "इतने कम समय में 464 मौतों का यह डरावना आंकड़ा यह साबित करता है कि जिले की यातायात और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है।"
यह तो सिर्फ बानगी है, असली तस्वीर और भी खौफनाक है
कांग्रेस नेता मो. सद्दाम हुसैन ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यातायात थाने में दुर्घटनाओं का सुव्यवस्थित पंजीकरण 12 अप्रैल 2025 से ही शुरू हुआ है। यह आंकड़ा जिले में होने वाली कुल दुर्घटनाओं की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। यह केवल बीते कुछ महीनों का रिकॉर्ड है। उन्होंने मांग की है कि पिछले 10 से 20 वर्षों के थाना-वार और विभाग-वार आंकड़े एकत्र कर एक विस्तृत 'रोड एक्सीडेंट डेटाबेस' तैयार किया जाए, ताकि मार्गवार मौतों का वास्तविक और ऐतिहासिक सच जनता के सामने आ सके।
इन 'खूनी' सड़कों का हो तत्काल ऑडिट और चौड़ीकरण
सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों पर चोट करते हुए कांग्रेस नेताओं ने जिले के सबसे खतरनाक मार्गों को चिन्हित किया है। रंजीत पंडित ने हाजीपुर-जंदाहा, हाजीपुर-महनार, हाजीपुर-महुआ और हाजीपुर-लालगंज मार्गों को दुर्घटनाओं का केंद्र (ब्लैक स्पॉट) बताया। इन मार्गों के संकीर्ण हिस्सों और अंधे मोड़ों का तुरंत 'सड़क सुरक्षा एवं यातायात क्षमता ऑडिट' कराने की मांग की गई है। साथ ही, बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को देखते हुए इन सड़कों के तत्काल चौड़ीकरण का खाका तैयार करने को कहा गया है।
जर्जर सड़कें और महाजाम: जनता की दोहरी मार
सुरक्षा के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल दागे गए हैं। जंदाहा से अरनिया तक मुख्य सड़क की जर्जर स्थिति और जलजमाव ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इसे तुरंत दुरुस्त करने की मांग की गई है। इसके अलावा देसरी के गाजीपुर चौक, महनार के मदन चौक तथा जंदाहा एवं महुआ के गांधी चौक पर लगने वाले जानलेवा महाजाम के स्थायी समाधान के लिए मास्टरप्लान बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
"सुधार नहीं तो होगा उग्र जन-आंदोलन"
नेताओं ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि हादसे के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई और मुआवजे का झुनझुना थमाना पर्याप्त नहीं है; असल काम हादसों को रोकना है। प्रशासन को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
* जिले भर में डेंजर जोन या 'ब्लैक स्पॉट' चिन्हित किए जाएं।
* सड़कों के किनारे से अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए।
* मुख्य मार्गों पर अवैध पार्किंग पर सख्त रोक लगे।
* रात के समय पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और रोड मार्किंग (रिफ्लेक्टर) की व्यवस्था हो।
* संकरे और खतरनाक मोड़ों का चौड़ीकरण युद्धस्तर पर हो।
रंजीत पंडित और सद्दाम हुसैन ने अपने ज्ञापन के अंत में प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि वैशाली की जनता की जान बचाने और सड़क सुरक्षा के लिए अतिशीघ्र ठोस व धरातलीय कदम नहीं उठाए गए, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी और जनहित में एक व्यापक व उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
Reviewed by PSA Live News
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8:27:00 am
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