धनबाद के कोयला कर्मियों के भविष्य निधि (PF) फंड से जुड़े 727.67 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत के निर्देश के बाद अब इस भारी-भरकम वित्तीय अनियमितता की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जाएगी, जिससे देश भर के लाखों कोयला श्रमिकों और उनके परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा प्रकरण कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) द्वारा 'दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (DHFL) कंपनी में किए गए भारी-भरकम निवेश से जुड़ा है। सीएमपीएफओ (CMPFO) ने नियमों और चेतावनियों को दरकिनार करते हुए डीएचएफएल (DHFL) में कुल 1,300 करोड़ रुपये निवेश किए थे। बाद में डीएचएफएल के दिवालिया हो जाने के कारण कोयला कर्मियों के खून-पसीने की कमाई का बड़ा हिस्सा डूब गया। इस दिवालियापन और वित्तीय संकट के चलते फंड को कुल 727.67 करोड़ रुपये का सीधा और भारी नुकसान उठाना पड़ा।
समय पर कार्रवाई में लापरवाही और विरोध
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह बात सामने आई कि फंड मैनेजरों और वित्तीय जानकारों द्वारा पहले ही बाजार की स्थिति को लेकर चेतावनियां दी जा चुकी थीं, इसके बावजूद समय रहते निवेश की गई राशि को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। डीएचएफएल के डूबने के काफी समय बाद दिसंबर 2019 में राशि निकासी का प्रस्ताव महज कागजी साबित हुआ। इसके बाद, नवंबर 2021 में सीएमपीएफओ बोर्ड की उप-समिति की बैठक में इस 727.67 करोड़ रुपये की विशाल राशि को 'राइट ऑफ' (यानी बट्टे खाते में डालकर नुकसान मानकर हटाने) का प्रस्ताव लाया गया, जिसका कोयला कर्मियों और श्रमिक संगठनों ने कड़ा विरोध किया। इस नुकसान की भरपाई के लिए बाद में कोल इंडिया द्वारा कोयला उत्पादन पर 10 रुपये प्रति टन सेस लगाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन लाया गया था।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और CBI जांच का रास्ता
मामले को लेकर 'कोल एम्प्लॉई वेलफेयर एसोसिएशन' की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा बिना पूरी जांच के लीपापोती करने और जल्दबाजी में क्लीन चिट दिए जाने के प्रयासों पर तीखे सवाल उठाए।
अदालत ने इन तमाम पहलुओं, प्रशासनिक सुस्ती, चेतावनियों के नजरअंदाज किए जाने और करोड़ों की हेराफेरी के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए अब इस पूरे मामले की कमान सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से कोयलांचल के श्रमिक संगठनों और कामगारों में एक स्पष्ट संदेश गया है कि रिटायरमेंट के रूप में जमा होने वाली पाई-पाई की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
Reviewed by PSA Live News
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7:54:00 am
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