रांची के हिनू में भीषण अगलगी: 'शिवा प्रोटेक्शन फोर्स' का कार्यालय जलकर खाक, ₹2 करोड़ की संपत्ति और दस्तावेज स्वाहा
रांची ।झारखंड की राजधानी रांची के हिनू चौक स्थित डोरंडा थाना क्षेत्र में सोमवार की सुबह एक बड़ा अग्निकांड देखने को मिला। यहाँ एक बहुमंजिला इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थित ‘शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड’ (मैनपावर एवं सुरक्षा एजेंसी) के कार्यालय में अचानक भीषण आग लग गई। सुबह लगभग 8:30 बजे जब कार्यालय बंद था, तब अचानक खिड़कियों और वेंटिलेशन से काले धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र होने के कारण देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए सबसे पहले कंपनी के अधिकारी मनोज दुबे और प्रोपराइटर को इस दुर्घटना की सूचना दी, जिसके तुरंत बाद स्थानीय डोरंडा पुलिस और अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) को सूचित किया गया।
सूचना मिलते ही डोरंडा थाना की पुलिस और अग्निशमन विभाग की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने देखा कि पूरी इमारत में घना धुआं भर चुका था। इसके बाद सीढ़ियों और एक्सटेंशन लैडर की मदद से दमकल कर्मी तीसरी मंजिल तक पहुंचे और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। समय रहते की गई इस त्वरित कार्रवाई की वजह से आग को इमारत के निचले तलों तक फैलने से रोक लिया गया। इस इमारत के निचले तलों पर एक निजी बैंक की शाखा (HDFC बैंक) भी संचालित हो रही थी, जिसे सुरक्षित बचा लिया गया और वहां किसी भी प्रकार का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस पूरे हादसे में सबसे राहत की बात यह रही कि घटना के समय कार्यालय बंद होने के कारण कोई भी कर्मचारी अंदर मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि या चोट की सूचना नहीं है।
हालांकि जनहानि से बचाव हो गया, लेकिन वित्तीय और ढांचागत क्षति के मामले में एजेंसी को बहुत भारी झटका लगा है। प्राथमिक आकलन के अनुसार इस अगलगी में लगभग 1.25 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक के सामान और बुनियादी ढांचे का नुकसान हुआ है। चूंकि यह एक बड़ी मैनपावर और सुरक्षा एजेंसी का मुख्य दफ्तर था, इसलिए यहां रखे दर्जनों हाई-कॉन्फ़िगरेशन कंप्यूटर्स, सर्वर्स, बायोमेट्रिक अटेंडेंस गियर्स, एसी यूनिट्स, वॉकी-टॉकी, सीसीटीवी सेटअप और महंगा फर्नीचर पूरी तरह जलकर राख हो गए। इसके अलावा, सुरक्षाकर्मियों के हजारों पुलिस वेरिफिकेशन दस्तावेज, एम्प्लॉई फाइल्स, विभिन्न कॉरपोरेट क्लाइंट्स के साथ हुए लीगल कॉन्ट्रैक्ट्स और वर्षों पुराने अकाउंट्स रिकॉर्ड्स भी जलकर खाक हो गए, जिसकी भरपाई करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।
दुर्घटना के मुख्य कारणों की पड़ताल करने पर प्राथमिक तौर पर इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट को ही आग की वजह माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बंद कार्यालयों में रातभर चालू रहने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, सर्वर्स या एयर कंडीशनर की लाइनों में अचानक वोल्टेज सर्ज आने या पुराना तार गर्म होकर पिघलने से स्पार्किंग होती है। यदि मुख्य एमसीबी (MCB) समय पर ट्रिप न करे, तो यह स्पार्किंग फॉल्स सीलिंग और लकड़ी के फर्नीचर में आग फैला देती है। फिलहाल पुलिस और फायर सेफ्टी विभाग की तकनीकी टीमें वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
इस पूरी घटना की गहराई तक जाने पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम सवाल और प्रशासनिक पहलू सामने आते हैं। सबसे पहला पहलू फोरेंसिक जांच और फायर एनओसी (NOC) का है; जांच अधिकारियों को यह देखना होगा कि इमारत में अग्निशमन मानक पूरे थे या नहीं और क्या कार्यालय में ऑटोमैटिक स्मोक अलार्म व स्प्रिंकलर कार्यरत थे। दूसरा प्रमुख पहलू बीमा दावे और डेटा रिकवरी का है। मैनपावर कंपनियों में कागजी फाइलों के साथ-साथ डिजिटल बैकअप न होने पर भविष्य में क्लाइंट्स और कर्मचारियों के भुगतान व वेरिफिकेशन से जुड़ी बड़ी वैधानिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। यह घटना रांची और आसपास के सभी व्यावसायिक परिसरों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि वे नियमित अंतराल पर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट कराएं और अपने महत्वपूर्ण डेटा का ऑफ-साइट या क्लाउड बैकअप सुरक्षित रखें।
Reviewed by PSA Live News
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7:34:00 am
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