झारखंड के स्कूली छात्रों के लिए बड़ी खबर: 2027 से बदल जाएगी 8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षा प्रणाली, जैक की जगह जेसीईआरटी संभालेगा कमान
रांची। झारखंड के स्कूली शिक्षा विभाग ने राज्य की पूरी परीक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्टों और माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य में आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षाओं की मुख्य परीक्षाएं अब झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के बजाय झारखंड शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) द्वारा आयोजित की जाएंगी। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का इस बड़े कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य पूरी परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित, आधुनिक और मानकीकृत बनाना है, ताकि राज्य के लाखों विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष और विश्वस्तरीय मूल्यांकन प्रणाली का लाभ मिल सके।
नए परीक्षा पैटर्न और दिशानिर्देशों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2026 की परीक्षा ओएमआर शीट पर ही ली जाएगी, जिसके लिए जेसीईआरटी ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। इस प्रणाली के अंतर्गत तीनों ही कक्षाओं के प्रश्न पत्रों का स्वरूप बेहद खास रहेगा—जिसमें वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होंगे, लेकिन परीक्षार्थियों को इनके उत्तर उत्तरपुस्तिका के स्थान पर सीधे ओएमआर शीट पर ही दर्ज करने होंगे। इसके अलावा, परीक्षार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी अब केंद्रीकृत स्तर पर किया जाएगा, जिससे परिणामों में शत-प्रतिशत शुद्धता, निष्पक्षता और गति लाई जा सके। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जेसीईआरटी) के अध्यक्ष अविनाश कुमार सिंह के अनुसार, इस आधुनिक कदम से परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और नकल की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) के विद्यार्थियों के लिए विभाग ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। केवल 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं पहले की भांति जैक के माध्यम से ही आयोजित होंगी और इन कक्षाओं की मार्कशीट पर भी जैक द्वारा ही आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। 12वीं की परीक्षा में कोई बदलाव नहीं होगा और 10वीं-12वीं की परीक्षाएं ओएमआर शीट के बजाय पारंपरिक तरीके से ही कराई जाएंगी, जिसके लिए अलग से दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इस नए शैक्षणिक मॉडल से जहां 8वीं, 9वीं और 11वीं के छात्रों को परीक्षा केंद्र पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं नकल विहीन माहौल में समय पर सटीक परिणाम जारी होने से उनके भविष्य की राह भी आसान होगी।
Reviewed by PSA Live News
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6:25:00 pm
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