अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर वरिष्ठ नागरिकों को मिला सम्मान, राजयोग और सकारात्मक चिंतन से वृद्धावस्था को वरदानी अवस्था बनाने का दिया गया संदेश।
रांची। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान, हरमू रोड, राँची में “संगम–गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन” विषय पर एक विशेष एवं गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह का शुभारंभ मनमोहक स्वागत नृत्य तथा अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें 60 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद महोदय ने कहा कि माथे पर झुर्रियाँ पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें हृदय तक नहीं पहुँचने देना चाहिए क्योंकि हृदय ही उमंग और उत्साह का सच्चा स्रोत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मा न तो बूढ़ी होती है और न ही जवान; वह अजर-अमर है, इसलिए राजयोग के नियमित अभ्यास से वृद्धावस्था जैसी अवस्था को भी वरदानी अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विशिष्ट वक्ताओं ने भी जीवन की संध्या को सकारात्मकता के साथ जीने के कई महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए। समाजसेवी संत चम्पा भाटिया ने कहा कि प्रकृति भले ही बालों को सफेद कर दे, परंतु अपने मन को स्वच्छ और निर्मल बनाने का दायित्व हमारा स्वयं का है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष आनंद जालान तथा कार्यकारी निदेशक मुकेश अग्रवाल ने कहा कि केवल शरीर वृद्ध होता है, आत्मा अजर है। यदि व्यक्ति ईश्वरीय ज्ञान, योग, धारणा और सेवा में स्वयं को व्यस्त रखे, तो सकारात्मक चिंतन और धैर्य से वृद्धावस्था का प्रभाव समाप्त हो जाता है और व्यक्ति समाज के लिए एक 'वरदानी-मूर्ति' बन जाता है। इसी क्रम में सेल (SAIL) के पूर्व जीएम प्रभात कुमार सिन्हा और संत निरंकारी मिशन के समाजसेवी संदीप नागपाल ने कहा कि जीवनभर किए गए श्रेष्ठ कर्मों का फल ईश्वर के पास पुण्य-खाते में जमा रहता है। वास्तव में बूढ़ा वही व्यक्ति है जो निराशा, थकावट और खीज महसूस करता है, जबकि आशा, साहस और उत्साह से भरा व्यक्ति सदा युवा ही रहता है।
अपने आध्यात्मिक संबोधन में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि जीवन गतिशील है और इसके चारों पड़ाव—बचपन, जवानी, वृद्धावस्था एवं मृत्यु—अपने आप में अनमोल हैं। समाज भले ही अंतिम दो को अभिशाप मान लेता हो, परंतु जीवन का हर पल उपयोगी है और इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ लोगों ने वृद्धावस्था में ही अपने महान कार्यों की शुरुआत कर नया इतिहास रचा। कार्यक्रम के दौरान सभी श्रद्धालुओं को गाइडेड मेडिटेशन के माध्यम से राजयोग का अभ्यास कराया गया और सभा में उपस्थित सभी 60 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रीना श्रीवास्तव (अधिवक्ता), रोशन लाल भाटिया, सुरेश राम, राजीव प्रसाद (बैंक ऑफ इंडिया) तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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7:23:00 pm
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