ICAR-IIAB रांची में 119 करोड़ रुपये की नई सुविधाओं का भव्य उद्घाटन; 1,500 से अधिक किसानों की उपस्थिति में 'प्री-रबी किसान गोष्ठी' संपन्न
विशेष संवाददाता | रांची, 08 अक्टूबर 2026
झारखंड की राजधानी रांची स्थित आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), गढ़खटंगा में कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसान सशक्तिकरण का एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान में बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व मजबूती देते हुए 119 करोड़ रुपये की लागत वाली अत्याधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) तथा जनजातीय उप-योजना (TSP) के तहत आयोजित विशाल 'प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण' कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला एवं रामगढ़ जिलों के लगभग 1,500 प्रगतिशील और जनजातीय किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में तैयार कृषि तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना, वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना और आगामी रबी सीजन के लिए रणनीतिक खाका तैयार करना रहा।
अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और 119 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ICAR-IIAB परिसर में निर्मित कई प्रमुख नई सुविधाओं का आधिकारिक उद्घाटन किया। इसमें प्रशासनिक-सह-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा आधुनिक 'NEXTGEN Breeding Facility' शामिल हैं। इसी अवसर पर संस्थान परिसर में 119 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाले एक अत्याधुनिक नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई। इन सुविधाओं के निर्माण से पूर्वी भारत में कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को एक नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद है।
जनहित और कृषि सुरक्षा पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का संबोधन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सर्वप्रथम झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की माता जी के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। झारखंड की प्राकृतिक और पारंपरिक संपदा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की जनजातीय संस्कृति में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण की स्वाभाविक समझ सदियों से निहित है। मंत्री महोदय ने ICAR-IIAB को आधुनिक अनुसंधान, नवाचार और देश की कृषि आत्मनिर्भरता के संगम के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन और घटते संसाधनों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक तकनीकों का संतुलन आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि सरकार आने वाले दिनों में देशव्यापी "खेत बचाओ अभियान" की शुरुआत करने जा रही है। उन्होंने बीज एवं उर्वरक क्षेत्र में कठोर कदम उठाने का संकेत देते हुए कहा कि नकली बीजों, मिलावटी उर्वरकों और घटिया कीटनाशकों की बिक्री पर सख्त और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि किसानों को वित्तीय और पैदावार के नुकसान से सुरक्षित रखा जा सके।
जमीनी अवलोकन और प्रयोगशाला-से-खेत तक का प्रत्यक्ष संवाद
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव, संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजय पाल भदाना के साथ परिसर का विस्तृत भ्रमण किया। मंत्री महोदय ने डेयरी फार्म में पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए इस्तेमाल की जा रही भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer) तकनीक की समीक्षा की। इसके अतिरिक्त एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) इकाई का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कृषि अपशिष्ट पुनर्चक्रण और संसाधन-कुशल कृषि मॉडलों की जानकारी ली तथा परिसर में पौधरोपण किया।
अपने संबोधन में श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में किसानों का योगदान अमूल्य है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी कुल कृषि भूमि के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के सुदृढ़ीकरण, नियमित मृदा परीक्षण और balanced fertilizer usage (संतुलित उर्वरक उपयोग) पर विशेष बल दिया।
पूर्वी भारत में कृषि क्रांति और वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पूर्वी भारत को देश की आगामी कृषि क्रांति का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अम्लीय मिट्टी और फास्फोरस की कमी जैसी समस्याओं के स्थाई अनुसंधान-आधारित समाधान पर जोर दिया। डॉ. जाट ने राइस-फैलो इंटेंसिफिकेशन (धान के बाद खाली रहने वाली जमीनों का त्वरित उपयोग) को बड़े पैमाने पर अपनाने और स्थानीय जलवायु के अनुकूल रबी फसलों के चयन का आह्वान किया।
वहीं, ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने अनुसंधान को पूरी तरह किसान-केंद्रित बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा में अध्यनारत युवाओं और विद्यार्थियों के समुचित मार्गदर्शन से ही भारतीय कृषि को अत्याधुनिक दिशा दी जा सकती है।
व्यापक किसान गोष्ठी और उन्नत कृषि इनपुट का वितरण
तकनीकी सत्रों के दौरान वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया:
- विविधीकरण एवं आधुनिक खेती: एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS), जैविक एवं प्राकृतिक खेती और रबी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन (IPM)।
- विशेषज्ञ विषय: झारखंड में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के अवसर, एथनो-वेटरिनरी मेडिसिन, पशुधन आहार प्रबंधन, फल फसलों की उन्नत तकनीक और पारंपरिक लाख की खेती।
गोष्ठी के दौरान SCSP एवं TSP योजनाओं के तहत उपस्थित 1,500 किसानों के बीच उन्नत कृषि इनपुट्स की किट वितरित की गईं। इनमें नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, मिल्क कैन कूलर तथा उच्च उत्पादकता वाले गेहूं, मटर, सरसों, सब्जियों और उन्नत टमाटर एवं बैंगन की बीज किस्में शामिल थीं। ICAR और झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के जरिए किसानों को नई तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी कराया गया।
उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं का सम्मान और आभार प्रदर्शन
संस्थान की स्थापना और इसके सतत विकास में अतुलनीय योगदान देने वाले पूर्व अधिकारियों—डॉ. आर. रमानी (पूर्व अधिकारी विशेष कार्य), डॉ. के. के. शर्मा (पूर्व निदेशक-प्रभारी), डॉ. तिलक राज शर्मा (पूर्व कार्यवाहक निदेशक) और डॉ. अरुणव पटनायक (प्रथम नियमित निदेशक)—को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित और अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम का समापन संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी केंद्रीय मंत्रियों, अतिथियों, राज्य सरकार के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और दूर-दराज के जिलों से पधारे किसानों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन झारखंड में किसान-वैज्ञानिक-नीति निर्माता संवाद को एक सशक्त मंच प्रदान करने और 'लैब टू लैंड' के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
Reviewed by PSA Live News
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9:24:00 pm
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