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यूपीआई चार्ज पर केंद्र का बड़ा फैसला: त्योहारों के बीच आम जनता और कारोबारियों को राहत, एमडीआर शुल्क का प्रस्ताव टला; जानिए नए नियमों का पूरा हिसाब-किताब


नई दिल्ली।
देश में डिजिटल पेमेंट क्रांति की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर प्रस्तावित नए ट्रांजैक्शन चार्ज को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने एक बड़ा और राहत देने वाला कदम उठाया है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को फिलहाल टाल दिया गया है। आगामी त्योहारी सीजन में बाजार की गतिविधियों और व्यापारिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए इस नीतिगत बदलाव की समय-सीमा को आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किए जाने की प्रबल संभावना है। सरकार के इस कदम से नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान खरीदारी करने वाले करोड़ों आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देशभर के खुदरा और बड़े कारोबारियों को बहुत बड़ी वित्तीय राहत मिली है।

इस नीतिगत फैसले का सबसे राहतकारी पहलू यह है कि आम नागरिकों और ग्राहकों के दैनिक वित्तीय लेन-देन पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि आम जनता के लिए यूपीआई सेवाएं पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त बनी रहेंगी। किसी भी व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) पैसे भेजने या प्राप्त करने पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, जब कोई ग्राहक किसी दुकान, शोरूम या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी पसंद का सामान खरीदकर यूपीआई के जरिए भुगतान करेगा, तब भी ग्राहक से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा। सरकार ने पुनः दोहराया है कि डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देने के लिए आम उपभोक्ता को हर प्रकार के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।

दूसरी ओर, प्रस्तावित नए नियमों का दायरा केवल बड़े मर्चेंट लेन-देन (P2M) तक सीमित रखा गया है। योजना के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के व्यावसायिक ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। बड़े भुगतानों के मामले में व्यापारियों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ न पड़े, इसके लिए 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम शुल्क सीमा (कैपिंग) 30 रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही छोटे एवं सूक्ष्म कारोबारियों के हितों का ध्यान रखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है कि जिन दुकानदारों की मासिक यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से कुल प्राप्ति 1 लाख रुपये से कम है, उन पर किसी भी प्रकार का एमडीआर लागू नहीं होगा।

चार्ज लागू करने की तारीख को आगे खिसकाने के पीछे सबसे बड़ी वजह अक्टूबर और नवंबर के महीनों में आने वाला राष्ट्रीय त्योहारी सीजन है। यह समय भारतीय खुदरा बाजार के लिए पूरे साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी दौर होता है। 'कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) सहित कई राष्ट्रीय व्यापारी संगठनों ने इस प्रस्तावित शुल्क का कड़ा विरोध किया था और सरकार से छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की थी। व्यापारियों की मुख्य चिंता यह भी थी कि मर्चेंट-टू-मर्चेंट (M2M) यानी एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी को होने वाले भुगतानों पर दोहरा शुल्क न लग जाए। जब तक इन तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर पूर्ण स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक सरकार ने इसे टालना ही न्यायसंगत समझा।

भारत में यूपीआई दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनने के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को पारदर्शिता और गति देने का मुख्य आधार बन चुका है। वित्त मंत्रालय और प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा समय-समय पर यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के अंतिम व्यक्ति तक कैशलेस अर्थव्यवस्था के लाभों को पहुंचाना है। प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य केवल बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते परिचालन खर्चों को संतुलित करना है। फिलहाल, 1 जनवरी 2027 तक इस फैसले के टल जाने से त्योहारी बाजार में भारी उछाल और सुचारू डिजिटल भुगतानों का सिलसिला बिना किसी रुकावट के जारी रहने की उम्मीद है।

यूपीआई चार्ज पर केंद्र का बड़ा फैसला: त्योहारों के बीच आम जनता और कारोबारियों को राहत, एमडीआर शुल्क का प्रस्ताव टला; जानिए नए नियमों का पूरा हिसाब-किताब यूपीआई चार्ज पर केंद्र का बड़ा फैसला: त्योहारों के बीच आम जनता और कारोबारियों को राहत, एमडीआर शुल्क का प्रस्ताव टला; जानिए नए नियमों का पूरा हिसाब-किताब Reviewed by PSA Live News on 6:30:00 am Rating: 5

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