बाबूबरही गोलीकांड: एएसआई पर हत्या का आरोप, अशोक यादव की मौत से उबला मधुबनी! भाकपा ने खोला मोर्चा, 1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
बाबूबरही (मधुबनी)। मधुबनी जिले के बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बलिराजगढ़ स्थित धत्ता टोल में घटी खूनी वारदात ने पूरे बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। खाकी पर लगे दाग और निर्दोष अशोक यादव की कथित पुलिस गोलीबारी में हुई मौत के बाद जनता का आक्रोश चरम पर है। इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने पीड़ित परिवार के पक्ष में सीधा मोर्चा खोल दिया है। भाकपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर साफ कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन जारी रहेगा।
खाकी पर गंभीर आरोप: कानून के रखवाले ही बने भक्षक?
घटना के बाद पीड़ित परिजनों के आंसू पोंछने और जमीनी हकीकत जानने भाकपा का कद्दावर प्रतिनिधिमंडल धत्ता टोल पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में भाकपा के जिला मंत्री मिथिलेश झा, राज्य परिषद सदस्य मनोज मिश्र, आनंद झा, सूर्य नारायण, महिला नेत्री राजश्री किरण और हरलाखी विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी राकेश कुमार पाण्डेय मुख्य रूप से मौजूद थे।
प्रतिनिधिमंडल ने घटना स्थल का जायजा लिया और पीड़ित परिवार से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस एएसआई चंद्रमोहन सिंह पर लगे संगीन आरोपों को लेकर नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस महकमे को आड़े हाथों लिया।
भाकपा नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा:
"कानून की रक्षा की शपथ लेने वाले अधिकारियों को कानून से ऊपर रहने की छूट किसी कीमत पर नहीं दी जा सकती। पुलिस जब रक्षक से भक्षक बन जाए, तो आम जनता का लोकतंत्र और प्रशासन से भरोसा उठने लगता है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
भाकपा ने रखीं 5 सूत्री मांगें: ₹1 करोड़ मुआवजा, नौकरी और स्पीडी ट्रायल
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस बयान जारी कर बिहार सरकार और जिला प्रशासन के सामने 5 बड़ी और कड़ी मांगें रखी हैं:
- ₹1 करोड़ का भारी-भरकम मुआवजा: स्वर्गीय अशोक यादव के आश्रित परिजनों को अविलंब एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
- परिवार को सरकारी नौकरी: मृतक अशोक यादव के पुत्र को तुरंत सरकारी नौकरी दी जाए। यदि किसी तकनीकी या कानूनी कारण से पुत्र को नौकरी मिलने में बाधा आती है, तो स्वर्गीय अशोक यादव की पत्नी को बिना देरी सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए।
- घायलों का निःशुल्क इलाज: पटना (PMCH/IGIMS) और दरभंगा (DMCH) के विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे सभी घायलों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर कराया जाए और उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए।
- घायलों को ₹25-25 लाख की सहायता: घटना में गंभीर रूप से घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को 25-25 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए।
- स्पीडी ट्रायल और फांसी की सजा: पूरे मामले की जांच के लिए विशेष टीम (SIT) गठित कर मामले का स्पीडी ट्रायल चलाया जाए। दोषी पुलिसकर्मी को कानून के तहत कठोरतम सजा दी जाए—भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने जघन्य अपराध के लिए फांसी तक की मांग उठाई है।
पुराने जख्म भी कुरेदे: डायल 112 की मनमानी पर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने केवल इसी घटना पर नहीं, बल्कि मधुबनी पुलिस के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड पर भी जमकर निशाना साधा। नेताओं ने वर्ष 2025 में मधवापुर थाना क्षेत्र की उस शर्मनाक घटना की याद दिलाई, जहां डायल 112 के एक पुलिस पदाधिकारी पर अपनी गाड़ी से दो निर्दोष लोगों को कुचलने का आरोप लगा था।
भाकपा नेताओं ने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि पुलिस प्रशासन में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वरिष्ठ अधिकारी नीचे के कर्मियों की मनमानी पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रहे हैं, जिसके कारण आए दिन आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
"यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, आम जनता के वजूद की लड़ाई है"
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि अशोक यादव की मौत कोई मामूली घटना नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन, सम्मान और सुरक्षा पर सीधा हमला है।
भाकपा ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार और प्रशासन ने पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय, 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और घायलों को सहायता नहीं दी, तो पूरे जिले में उग्र जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। जब तक दोषी पुलिस अधिकारी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता और पीड़ित परिवार को उसका हक नहीं मिलता, तब तक भाकपा शांत नहीं बैठेगी।
Reviewed by PSA Live News
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11:32:00 am
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