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श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में धनत्रयोदशी पर महाभिषेक और उद्यास्तमन सेवा संपन्न, दीपावली तक चलेगा विशेष अनुष्ठान


राँची :
राजधानी के प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में धनतेरस और धन्वन्तरि जयन्ती के पावन अवसर पर शुक्रवार, 06 नवंबर को धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। इस दौरान भगवान की दैनिक पूजा-अर्चना के उपरांत भव्य महाभिषेक (तिरुमंजन) का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली, जिन्होंने विधि-विधान के साथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

स्वर्ण आभूषणों से सजा दिव्य स्वरूप और महास्तुति

महाभिषेक संपन्न होने के बाद भगवान को स्वर्ण कवच धारण कराया गया तथा दिव्य वस्त्राभूषणों से उनका अलौकिक शृंगार किया गया। पारंपरिक विधान के तहत मुद्राएँ प्रदर्शित करते हुए चँवर, दर्पण और पंखा झलने की सेवा अर्पित की गई। इसके पश्चात पोंगल, खीर, फल और मेवे का नैवेद्य भोग लगाया गया। नीराजन आरती के बाद श्रुति, उपनिषद एवं देशिक स्तोत्राणि के उच्चार के साथ भगवान की महास्तुति संपन्न हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।

इस धार्मिक आयोजन में यजमानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आज की उद्यास्तमन सेवा के यजमान श्री सज्जन सर्राफ और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती किरण सर्राफ रहे, जबकि महाभिषेक के यजमान श्री संजय चौधरी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता चौधरी रहे। ये दोनों ही यजमान परिवार राँची के ही निवासी हैं।

त्रयोदशी से दीपावली तक विशेष महोत्सव की धूम

धनत्रयोदशी से शुरू हुआ यह विशेष महोत्सव दीपावली तक जारी रहेगा। इस दौरान मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के ठीक पहले आने वाली चतुर्दशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन तेल मात्र में माँ लक्ष्मी और जल मात्र में माँ गंगा का निवास होता है। यही कारण है कि चतुर्दशी के दिन भगवान के विग्रह को तेल और इत्र से स्नान कराया जाएगा। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान पापविनाशन श्रीहरि के दर्शन और पूजन का विधान है। भगवान के विग्रह में उपयोग किए गए तेल के आशीर्वाद को सिर पर धारण करने से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है।

दीपदान और दीपोत्सव की पौराणिक पृष्ठभूमि

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन यदि अमावस्या का योग हो और उसमें स्वाति नक्षत्र का संयोग बन जाए, तो उसी दिन मुख्य दीपावली मनाई जाती है। उस दिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना के साथ महाभिषेक और दिव्य शृंगार किया जाएगा तथा रात्रि में हजारों दीपक जलाकर भव्य दीपोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगी विद्युत लड़ियों से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर अभी से जगमगा उठा है।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि ने भगवान वामन से यह वरदान मांगा था कि उन्होंने तीन पगों में तीनों लोकों को नाप लिया है, इसलिए आज से लेकर लगातार तीन दिनों तक पृथ्वी पर मनुष्य लोक में दीपदान और दीपोत्सव मनाया जाए। राजा बलि ने भगवान विष्णु से यह भी वरदान मांगा कि इन तीन दिनों में जो भी दीपदान करे, उसके घर में भगवती श्रीलक्ष्मी जी का स्थिर निवास हो। इसी पौराणिक परंपरा का निर्वहन करते हुए राँची के इस मंदिर में इन तीनों दिनों तक विशेष उत्सव मनाया जा रहा है।

श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में धनत्रयोदशी पर महाभिषेक और उद्यास्तमन सेवा संपन्न, दीपावली तक चलेगा विशेष अनुष्ठान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में धनत्रयोदशी पर महाभिषेक और उद्यास्तमन सेवा संपन्न, दीपावली तक चलेगा विशेष अनुष्ठान Reviewed by PSA Live News on 1:15:00 pm Rating: 5

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