चाईबासा। अपने इनोवेटिव आइडिया के लिए सुर्खियों में आए चाईबासा डीडीसी आदित्य रंजन ने मंगलवार को एक और अजूबा मशीन लॉन्च किया. चाईबासा स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा और चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर में उपायुक्त अरवा राजकमल और डीडीसी आदित्य रंजन ने इस खास मशीन को लॉन्च किया. दरअसल करेंसी और चेक को कोरोनावायरस संक्रमित होने से बचाने के लिए डीडीसी ने करेंसी डिसइंफेक्टेड मशीन बनायी है. यह मशीन पाकर बैंक और रेलकर्मी बेहद खुश दिखे.
लेमिनेशन करने वाली मशीन में बदलाव कर बनाई नई मशीन
डीडीसी ने लेमिनेशन करने वाली मशीन में हल्का बदलाव कर यह खास मशीन बनायी है. इसमें 11 वाट का अल्ट्रा वॉयलेट बल्ब लगाया गया है. जिससे मशीन में 300 डिग्री तापमान जेनरेट होगा. और जैसे ही इस मशीन में एक तरफ से करेंसी या चेक डाल जाएंगे, दूसरी तरह से वे सेनिटाइज होकर निकल जाएंगे. इससे नोटों के कोरोना संक्रमित होने का खतरा बिल्कुल नहीं रहेगा.
कोरोना संक्रमण के इस दौर में जिन जगहों पर करेंसी का लेन-देन अधिक होता है. वहां यह मशीन बेहद कारगार सिद्ध होगा. इस डिसइंफेक्टेड मशीन को बैंक और रेलवे काउंटरों पर लगाने की योजना है. इस मशीन को महज 3 हजार रुपये की लागत में लेमिनेशन मशीन में बदलाव कर तैयार किया गया है.
नोटों को इस्त्री करता देख आया आइडिया
डीडीसी आदित्य रंजन ने बताया कि टीवी पर महाराष्ट्र के एक व्यक्ति को कपड़ा आयरन करने वाली
इस्त्री से करेंसी को आयरन करते देखा, तो इस मशीन को बनाने के आइडिया आया. यह मशीन करेंसी के लेन-देन करने वाले बैंक और रेलवे कर्मचारियों के अलावा दुकानदार को कोरोना संक्रमित होने से बचाएगा. डीसी अरवा राजकमल ने डीडीसी के इस इनोवेटिव आइडिया की तारीफ की.
कोरोना को लेकर कई इनोवेटिव काम कर चुके हैं डीडीसी
इंजीनियर से आईएएस बने डीडीसी आदित्य रंजन ने इससे पहले पीपीई किट के विकल्प के तौर पर सैम्पल कलेक्शन बूथ, सेनिटाइजर चैंबर, फेस शील्ड, रोबोटिक कोबोट बना चुके हैं. कोबोट कोरोना मरीजों को अस्पताल में दवा और खाना पहुंचाने के काम आ रहा है।
लेमिनेशन करने वाली मशीन में बदलाव कर बनाई नई मशीन
डीडीसी ने लेमिनेशन करने वाली मशीन में हल्का बदलाव कर यह खास मशीन बनायी है. इसमें 11 वाट का अल्ट्रा वॉयलेट बल्ब लगाया गया है. जिससे मशीन में 300 डिग्री तापमान जेनरेट होगा. और जैसे ही इस मशीन में एक तरफ से करेंसी या चेक डाल जाएंगे, दूसरी तरह से वे सेनिटाइज होकर निकल जाएंगे. इससे नोटों के कोरोना संक्रमित होने का खतरा बिल्कुल नहीं रहेगा.
कोरोना संक्रमण के इस दौर में जिन जगहों पर करेंसी का लेन-देन अधिक होता है. वहां यह मशीन बेहद कारगार सिद्ध होगा. इस डिसइंफेक्टेड मशीन को बैंक और रेलवे काउंटरों पर लगाने की योजना है. इस मशीन को महज 3 हजार रुपये की लागत में लेमिनेशन मशीन में बदलाव कर तैयार किया गया है.
नोटों को इस्त्री करता देख आया आइडिया
डीडीसी आदित्य रंजन ने बताया कि टीवी पर महाराष्ट्र के एक व्यक्ति को कपड़ा आयरन करने वाली
इस्त्री से करेंसी को आयरन करते देखा, तो इस मशीन को बनाने के आइडिया आया. यह मशीन करेंसी के लेन-देन करने वाले बैंक और रेलवे कर्मचारियों के अलावा दुकानदार को कोरोना संक्रमित होने से बचाएगा. डीसी अरवा राजकमल ने डीडीसी के इस इनोवेटिव आइडिया की तारीफ की.
कोरोना को लेकर कई इनोवेटिव काम कर चुके हैं डीडीसी
इंजीनियर से आईएएस बने डीडीसी आदित्य रंजन ने इससे पहले पीपीई किट के विकल्प के तौर पर सैम्पल कलेक्शन बूथ, सेनिटाइजर चैंबर, फेस शील्ड, रोबोटिक कोबोट बना चुके हैं. कोबोट कोरोना मरीजों को अस्पताल में दवा और खाना पहुंचाने के काम आ रहा है।
झारखंड के IAS ने बनाई रुपयों और चेक को सेनिटाइज करने वाली मशीन
Reviewed by PSA Live News
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8:13:00 pm
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