घरेलू सहायिका से राज्यमंत्री तक का सफर, प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं जज्बे की सराहना
कोलकाता/बर्द्धमान। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से विधायक कलिता माझी ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली। यह केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और जनसेवा की भावना की ऐसी प्रेरक कहानी है, जो लाखों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई है।
कभी महज चार हजार रुपये महीने की आय पर दूसरों के घरों में चौका-बर्तन और घरेलू काम करके परिवार का भरण-पोषण करने वाली कलिता माझी आज पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बन चुकी हैं। उनका यह सफर भारतीय लोकतंत्र की उस खूबसूरती को दर्शाता है, जहां एक साधारण परिवार की महिला भी अपनी मेहनत और जनता के विश्वास के बल पर सत्ता के सर्वोच्च गलियारों तक पहुंच सकती है।
अभावों में बीता बचपन, संघर्षों में ढली जिंदगी
गुसकरा नगरपालिका के वार्ड नंबर-3 स्थित माझपुकुर पाड़ा की रहने वाली कलिता माझी का जीवन बचपन से ही कठिनाइयों और आर्थिक चुनौतियों से घिरा रहा। अत्यंत गरीब परिवार में जन्मी कलिता ने कम उम्र से ही अभावों को करीब से देखा। विवाह के बाद भी परिस्थितियां बहुत नहीं बदलीं। उनके पति सुब्रत माझी एक साधारण प्लंबर हैं, जबकि उनका इकलौता बेटा हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा पास कर चुका है।
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए कलिता को घर-घर जाकर काम करना पड़ा। सुबह से दोपहर तक लोगों के घरों में बर्तन साफ करना, खाना बनाना और घरेलू कार्य करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। लेकिन इसी संघर्ष के बीच उन्होंने अपने भीतर समाज सेवा का सपना जिंदा रखा।
राजनीति में आने से डरती थीं कलिता
कलिता माझी स्वयं स्वीकार करती हैं कि शुरुआत में वह राजनीति में आने से हिचकिचाती थीं। उन्हें लगता था कि राजनीति में सक्रिय होने से परिवार की आर्थिक जरूरतें कैसे पूरी होंगी। लेकिन समाज के वंचित और गरीब लोगों की समस्याओं को करीब से देखने के बाद उनके भीतर बदलाव लाने की इच्छा मजबूत होती गई।
वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा की एक साधारण बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यही महिला एक दिन पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बनेगी।
दिन में घरेलू काम, शाम को जनसेवा
राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान कलिता माझी का संघर्ष और भी बढ़ गया। वह सुबह दो घरों में घरेलू काम निपटातीं और शाम होते ही पार्टी के कार्यक्रमों तथा जनसंपर्क अभियानों में जुट जातीं। गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनना, महिलाओं को संगठित करना और जरूरतमंदों की मदद करना उनकी पहचान बन गया।
उनकी मेहनत और संगठन क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्होंने बूथ स्तर से शुरुआत कर नगर इकाई, जिला कमेटी और फिर विधानसभा स्तर तक अपनी मजबूत पहचान बनाई।
पहली हार ने नहीं तोड़ा हौसला
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार उन्हें आउसग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि उस चुनाव में उन्हें लगभग 11,815 मतों से हार का सामना करना पड़ा।
सामान्यतः ऐसी हार के बाद कई नेता राजनीति से दूरी बना लेते हैं, लेकिन कलिता माझी ने हार को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने चुनाव परिणाम को जनता के बीच और अधिक सक्रिय होने का अवसर माना। अगले पांच वर्षों तक वह लगातार क्षेत्र में काम करती रहीं और लोगों के सुख-दुख में शामिल होती रहीं।
2026 में मिली ऐतिहासिक जीत
कलिता की मेहनत और जनता के साथ उनके मजबूत संबंधों को देखते हुए भाजपा ने 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। इस बार उन्होंने चुनावी मैदान में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामाप्रसन्न लोहार को 12,535 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की।
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपने घरेलू कार्य से एक महीने की छुट्टी ली थी। जिन परिवारों के यहां वह वर्षों तक काम करती थीं, वे भी उनकी जीत से बेहद उत्साहित और गौरवान्वित नजर आए।
प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित की सफलता
विधायक बनने के बाद जब उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली तो यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। शपथ ग्रहण के बाद भावुक नजर आईं कलिता माझी ने अपनी सफलता का श्रेय भाजपा नेतृत्व, पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और प्रेरणा ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की शक्ति दी। यही कारण है कि उन्होंने अपनी जीत और मंत्री पद की उपलब्धि प्रधानमंत्री को समर्पित की।
जनता की समस्याओं को करीब से जानती हैं कलिता
गरीबी और संघर्ष का जीवन जीने वाली कलिता माझी अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं। उनका मानना है कि विकास का लाभ लंबे समय तक कुछ खास लोगों तक ही सीमित रहा, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करती रही।
उन्होंने कहा कि आउसग्राम क्षेत्र में आज भी पेयजल, सड़क, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर कमी है। कई गांवों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
अस्पताल बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता
राज्यमंत्री बनने के बाद कलिता माझी ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में एक आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त अस्पताल की स्थापना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है। वर्तमान में गंभीर बीमारी की स्थिति में लोगों को इलाज के लिए बर्द्धमान जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की भारी हानि होती है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पेयजल, बेहतर सड़कें, प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
“मैंने कभी मंत्री बनने का सपना नहीं देखा था”
शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कलिता माझी ने कहा, “मैंने कभी विधायक बनने तक के बारे में नहीं सोचा था। मंत्री बनना तो मेरे लिए पूरी तरह अकल्पनीय था। यह जनता, पार्टी और भगवान का आशीर्वाद है कि मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।”
उन्होंने आगे कहा कि विधायक रहते हुए उनकी चिंता केवल आउसग्राम क्षेत्र तक सीमित थी, लेकिन अब मंत्री बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी पूरे पश्चिम बंगाल की जनता के प्रति है।
लोकतंत्र की ताकत का जीवंत उदाहरण
कलिता माझी की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का जीवंत उदाहरण है। यह कहानी बताती है कि यदि संकल्प मजबूत हो, मेहनत निरंतर हो और जनता का विश्वास साथ हो, तो किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।
एक घरेलू सहायिका से मंत्री बनने तक का उनका सफर आज पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरे देश की महिलाओं, गरीब परिवारों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। कलिता माझी का संघर्ष यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर सफलता की हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
Reviewed by PSA Live News
on
8:33:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: