रांची । सीपीएम का राज्य सचिवमंडल झारखंड के मतदाताओं को लोकसभा के चुनाव में भाजपा का साईज छोटा करने के लिए बधाई देता है. राज्य के मतदाताओं ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत झारखंड के बड़बोले नेताओं द्वारा यहां सांप्रदायिक धुव्रीकरण के लिए चुनाव प्रचार के दौरान उठाए गए नफरती बोल और डेमोग्राफी बदल जाने का हौवा खड़ा करने की साजिश को ठुकरा कर अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है. झारखंड का चुनाव परिणाम इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि राज्य में आदिवासियों के लिए आरक्षित सभी पांच सीटों पर भाजपा पराजित हुई है. जिनमें से तीन सीटें इसकी जीती हुई थी और एक सीट जो कांग्रेस की जीती हुई सीट थी वहां दलबदल कराकर प्रत्याशी को अपने पाले में शामिल कराया गया था. राज्य के आदिवासी मतदाताओं ने भाजपा की इस घटिया चाल को पहचानते हुए उसे माकुल जवाब दिया है. इस प्रकार जहां पिछले लोकसभा के चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी आजसू को कुल 12 सीटें मिली थी वहीं इस बार उन्हें 9 सीटों पर संतोष करना पड़ेगा. यदिआइएनडीआइए गठबन्धन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने सीट शेयरिंग में और अपने प्रत्याशियों की घोषणा में देर नहीं किया होता तो झारखंड मे भाजपा के कद को और छोटा किया जा सकता था।
जहां तक इस चुनाव में झारखंड में वामदलों के प्रदर्शन की स्थिति है वह अच्छी नहीं रही, जबकि राज्य में इंडिया गठबंधन में हुए आंशिक सीट शेयरिंग में माले को एक सीट मिली थी लेकिन कोडरमा सीट पर भाजपा को टक्कर देने के बावजूद माले वह सीट जीत नहीं सका . सीपीएम ने राज्य की एक सीट राजमहल से चुनाव लड़ा और पिछले बार की अपेक्षा उसे ज्यादा वोट मिले. वहां सीपीएम द्वारा भाजपा के खिलाफ चलाए गए धुंआधार राजनीतिक प्रचार अभियान का फायदा झारखंड मुक्ति मोर्चा को ही मिला क्योंकि चुनाव प्रचार अभियान के अंतिम दौर में मतदाताओं के दो खेमों के बीच धुव्रीकरण हो गया और सीपीएम को उसके पार्टी आधार का ही वोट मिला।
सीपीआई (एम) झारखंड में भाजपा का कद छोटा करने के लिए राज्य के मतदाताओं को बधाई देते हुए उनसे अपील करता है की अगले 6 माह होने के अंदर होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का साईज और छोटा करने की दिशा में आगे बढे।
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