जय माता दी के जयकारों से गूंजी राजधानी: विद्यानगर बना आस्था का केंद्र, बेल बरण शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
चैती नवरात्र में भक्ति, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम, मांदर-ढोल की थाप पर झूमे श्रद्धालु, हर गली-मोहल्ला भक्तिमय
रांची : झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों चैती नवरात्र की भक्ति में पूरी तरह डूबी हुई है। शहर के विद्यानगर स्थित शिव-हनुमान मंदिर परिसर में आस्था का ऐसा महासंगम देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर कर दिया है। “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यहां आयोजित चैती दुर्गा पूजा इस वर्ष भव्यता और श्रद्धा के नए आयाम स्थापित कर रही है।
षष्ठी पर बेल बरण शोभायात्रा ने बांधा समां
नवरात्र की षष्ठी तिथि पर आयोजित बेल बरण शोभायात्रा ने पूरे विद्यानगर क्षेत्र को आस्था के रंग में रंग दिया। यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक परंपरा का प्रतीक बनी, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह का भी विराट प्रदर्शन देखने को मिला।
हाथों में ध्वज, फूल और पूजा सामग्री लिए श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे, जबकि मार्ग के दोनों ओर खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा और श्रद्धा से उनका स्वागत किया।
मांदर-ढोल की थाप पर झूम उठा शहर
शोभायात्रा की सबसे आकर्षक झलक पारंपरिक वाद्य-यंत्रों की गूंज रही। मांदर, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते-नाचते नजर आए।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश लेकर चल रही थीं, वहीं युवाओं की टोलियां भक्ति संगीत पर नृत्य करते हुए पूरे वातावरण को उत्सवमय बना रही थीं।
मां कात्यायनी की पूजा और भव्य आरती का दिव्य दृश्य
षष्ठी के दिन मां कात्यायनी की पूजा वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह 07:00 बजे पूजा प्रारंभ होते ही शंखनाद और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण गूंज उठा।
इसके पश्चात 09:00 बजे दुर्गा पाठ और 10:30 बजे पंडित बृज बिहारी तिवारी द्वारा रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
संध्या 07:00 बजे आयोजित भव्य आरती इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बनी। दीपों की जगमगाहट, भक्ति गीतों की स्वर लहरियां और सामूहिक आरती ने पूरे परिसर को अलौकिक बना दिया। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
भव्य सजावट और रोशनी से निखरा मंदिर परिसर
मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक झालरों और भव्य रोशनी से सजाया गया है। जैसे ही शाम ढलती है, पूरा क्षेत्र जगमग रोशनी से नहा उठता है, जो श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है।
रात्रि में भक्ति संगीत और प्रकाश की छटा वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना देती है।
पिछले वर्ष से शुरू, इस बार दोगुना उत्साह
विद्यानगर में चैती दुर्गा पूजा की शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी, लेकिन इस बार इसका स्वरूप कहीं अधिक भव्य और आकर्षक हो गया है। आयोजन समिति और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह आयोजन अब क्षेत्र की एक नई पहचान बनता जा रहा है।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करने का माध्यम बन रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एक सूत्र में बांधते हैं।
हर उम्र के लोगों की भागीदारी
इस भव्य आयोजन में हर उम्र के लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
महिलाएं भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, वहीं युवा आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
नवरात्र के प्रमुख कार्यक्रम और समय-सारणी
नवरात्र के नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह 07:00 बजे पूजा और शाम 07:00 बजे आरती का आयोजन किया जा रहा है।
साथ ही दुर्गा पाठ और रामायण पाठ का क्रम निरंतर जारी है। प्रतिदिन माता को विशेष भोग अर्पित कर प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
आगामी प्रमुख कार्यक्रम:
25 मार्च: प्रातः 10:00 बजे – पत्रिका प्रवेश एवं मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
26 मार्च: महाष्टमी पूजन
27 मार्च: हनुमत ध्वज स्थापना एवं कन्या पूजन
28 मार्च: सायं 04:00 बजे – भव्य शोभायात्रा एवं विसर्जन
भव्य शोभायात्रा का रूट
28 मार्च को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर आनंदपुरी चौक, हरमू होते हुए बड़ा तालाब तक जाएगी, जहां विधिवत रूप से माता की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।
इस दौरान भक्ति संगीत, पारंपरिक वाद्य-यंत्र और आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी।
समिति की अपील
मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लें और इसे सफल बनाएं। समिति के अनुसार ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करते हैं।
विद्यानगर की यह चैती दुर्गा पूजा और बेल बरण शोभायात्रा न केवल रांची की धार्मिक पहचान को सशक्त कर रही है, बल्कि यह आस्था, उत्साह और एकता का जीवंत उदाहरण बनकर पूरे समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य भी कर रही है।
Reviewed by PSA Live News
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9:37:00 pm
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