168वें शहादत दिवस पर याद किए गए वीर सेनानी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की उठी मांग
हटिया स्थित शहादत स्मारक पर सादगीपूर्ण कार्यक्रम, परिजनों ने सरकार से न्याय व पुनर्वास की मांग दोहराई
रांची, 16 अप्रैल 2026: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का 168वां शहादत दिवस गुरुवार को रांची के हटिया स्थित शहादत स्मारक स्तंभ परिसर में सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, समाजसेवी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
समारोह का नेतृत्व शहीद के प्रत्यक्ष वंशज ठाकुर बड़कागढ़ के ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव की गरिमामयी उपस्थिति रही। उपस्थित सभी लोगों ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।
“पाठ्यपुस्तकों में शामिल हो शहीद की जीवनी” – अजय नाथ शाहदेव
मुख्य अतिथि अजय नाथ शाहदेव ने अपने संबोधन में कहा कि ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का योगदान राष्ट्रीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने मांग की कि उनकी जीवनी को स्कूली पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए ताकि नई पीढ़ी उनके त्याग और संघर्ष से प्रेरणा ले सके।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 16 अप्रैल 1858 को अंग्रेजों ने रांची जिला स्कूल के समीप एक पेड़ पर उन्हें फांसी दे दी थी। इसके बाद अंग्रेजी शासन ने बड़कागढ़ स्टेट को अपने कब्जे में लेकर चिरनागढ़ किले को तोप से ध्वस्त कर दिया।
परिवार की पीड़ा आज भी जारी, न्याय की मांग तेज
कार्यक्रम में शहीद के वंशज ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा दी गई सजा का दंश उनका परिवार आज भी झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एचईसी को करीब 1500 एकड़ जमीन मुफ्त में दी गई, लेकिन अब तक उनके परिवार को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही रोजगार।
उन्होंने यह भी कहा कि एचईसी प्रबंधन और सरकार के आश्वासन के बावजूद शहीद के वंशजों को नौकरी नहीं दी गई। वहीं, स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर जमीनों के उपयोग को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई।
अध्ययन केंद्र ने उठाई कई अहम मांगें
अध्ययन केंद्र के प्रतिनिधि गुप्तेश्वर सिंह ने कहा कि झारखंड सेनानी कोष के गठन के बावजूद वास्तविक लाभ शहीद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कोष के पुनर्गठन की मांग की।
वहीं अमरदीप कौशल ने कहा कि झारखंड शहीदों की भूमि है और सरकार को उनके परिजनों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों को जाति और वोट की राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
युवाओं से आदर्श अपनाने की अपील
समारोह में वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीद विश्वनाथ शाहदेव के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और कार्यों से होना चाहिए।
सादगीपूर्ण आयोजन, बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन गुप्तेश्वर सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परवेज खलीफा ने किया। इस अवसर पर कृष्णा नाथ शाहदेव, सत्यप्रकाश सुमन, अभिषेक सिंह, सीताराम ओहदार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हटिया और बड़कागढ़ क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने समारोह में भाग लेकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
168 वर्षों बाद भी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का बलिदान जनमानस में जीवित है, लेकिन उनके परिजनों को न्याय और सम्मान दिलाने की मांग आज भी अधूरी है। शहादत दिवस पर उठी आवाजें यह संकेत देती हैं कि इतिहास के इन नायकों को उचित स्थान दिलाने के लिए अब ठोस पहल की आवश्यकता है।
Reviewed by PSA Live News
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8:55:00 pm
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