डेंटल छात्रा दुष्कर्म साजिश केस में बड़ा एक्शन: रिम्स ने ऑली विश्वकर्मा का नामांकन रद्द किया, फर्जी जाति प्रमाण पत्र भी आया सामने
रांची: राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में डेंटल छात्रा से दुष्कर्म की साजिश के चर्चित मामले में अब बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। संस्थान प्रबंधन ने मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन (एमएचए) की छात्रा ऑली विश्वकर्मा का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
यह कार्रवाई दोहरे आधार पर हुई है—एक ओर जहां ऑली पर दुष्कर्म की साजिश रचने का गंभीर आपराधिक आरोप है, वहीं दूसरी ओर जांच में यह भी सामने आया है कि उसने नामांकन के समय फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर आरक्षण का लाभ लिया था।
फर्जी दस्तावेज से लिया आरक्षण, जांच में खुलासा
सूत्रों के अनुसार, ऑली विश्वकर्मा ने नामांकन के दौरान अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। प्रमाण पत्र की सत्यता को लेकर संदेह होने पर रामगढ़ जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष जांच समिति गठित की गई।
समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र फर्जी है और आरक्षण का लाभ गलत तरीके से प्राप्त किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर रिम्स प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया।
प्रबंधन का कहना है कि संस्थान में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दुष्कर्म की साजिश का गंभीर आरोप
यह मामला 9 अप्रैल को सामने आया था, जब ऑली विश्वकर्मा ने कथित तौर पर अपना जन्मदिन बताकर डेंटल सर्जरी की एक छात्रा को अपने फ्लैट पर बुलाया।
आरोप है कि वहां केक में नशीला पदार्थ मिलाकर छात्रा को बेहोश किया गया। इसके बाद ऑली के सहयोगी मोहम्मद दानिश ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
घटना के उजागर होते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं और मामले की जांच जारी है।
संस्थान में बढ़ा आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद से रिम्स परिसर में छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरा आक्रोश है। छात्र संगठनों ने लगातार आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
नामांकन रद्द होने के फैसले को संस्थान के भीतर एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि अपराध और शैक्षणिक अनियमितता—दोनों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
कानूनी शिकंजा और सख्त होगा
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसे गंभीर धाराएं लागू हैं। साथ ही फर्जी दस्तावेज के आधार पर आरक्षण लेने का मामला अलग से आरोपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
डेंटल छात्रा दुष्कर्म साजिश मामला अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि इसमें शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, आरक्षण प्रणाली के दुरुपयोग और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे बड़े सवाल भी जुड़ गए हैं। रिम्स का यह फैसला आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
Reviewed by PSA Live News
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11:37:00 pm
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