एचईसी में ‘डबल कमान’ का विवाद: नए निदेशक के पदभार के बावजूद पुराने अधिकारी की मौजूदगी पर उठे गंभीर सवाल
मजदूर संघ ने पारदर्शिता पर उठाई उंगली, प्रबंधन से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग
रांची। Heavy Engineering Corporation (एचईसी) में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद उभर कर सामने आया है, जिसने संस्थान की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हाल ही में निदेशक (कार्मिक) पद पर कार्यरत मनोज लकड़ा का तबादला किया गया था, जिसके बाद के.के. घोष ने 24 अप्रैल 2026 को विधिवत रूप से इस पद का कार्यभार संभाल लिया।
इसके बावजूद, मनोज लकड़ा का बिना किसी स्पष्ट आधिकारिक आदेश या अधिसूचना के एचईसी में सक्रिय बने रहना अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। इस स्थिति को लेकर कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
नियमों के उल्लंघन की आशंका, ‘डबल अथॉरिटी’ से बढ़ी चिंता
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक उपक्रम में एक ही पद पर दो अधिकारियों की समानांतर मौजूदगी न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है और जवाबदेही तय करना भी मुश्किल हो जाता है।
यदि नए निदेशक ने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है, तो पूर्व पदाधिकारी की निरंतर उपस्थिति यह संकेत देती है कि या तो प्रक्रिया अधूरी है या फिर आंतरिक स्तर पर कोई अस्पष्टता या दबाव काम कर रहा है। इससे संस्थान के अंदर ‘डबल कमान’ जैसी स्थिति बनती दिख रही है, जो भविष्य में प्रशासनिक टकराव का कारण बन सकती है।
पहले भी विवादों में रहा कार्यकाल
सूत्रों के अनुसार, मनोज लकड़ा के कार्यकाल को लेकर पहले भी कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उनका स्थानांतरण के बाद भी पद पर प्रभाव बनाए रखना मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या यह महज प्रक्रियागत देरी है या फिर किसी प्रभाव के चलते स्थिति को जानबूझकर स्पष्ट नहीं किया जा रहा।
मजदूर संघ का कड़ा रुख, प्रबंधन से जवाबदेही की मांग
इस पूरे मामले पर एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने कहा—
“जब नए निदेशक (कार्मिक) ने विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया है, तो पुराने अधिकारी का संस्थान में बने रहना पूरी तरह अनुचित और नियमों के खिलाफ है। इससे कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। प्रबंधन को अविलंब स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो संघ इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने के लिए बाध्य होगा।
सीएमडी से हस्तक्षेप की मांग
मजदूर संघ ने Chairman and Managing Director (सीएमडी) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश जारी कर इस भ्रम की स्थिति को समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि संस्थान की साख और प्रशासनिक व्यवस्था पर कोई आंच न आए।
पारदर्शिता बनाम प्रबंधन की चुप्पी
अब तक इस पूरे मामले पर एचईसी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह मामला न केवल संस्थान की आंतरिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि इसकी सार्वजनिक छवि पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।
एचईसी जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम में इस तरह की प्रशासनिक अस्पष्टता न केवल संस्थान के संचालन पर सवाल उठाती है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को भी रेखांकित करती है। अब निगाहें प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे और कितनी जल्दी सुलझाता है।
Reviewed by PSA Live News
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11:20:00 pm
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