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कमला-पुरुषोत्तमी एकादशी पर दिव्यदेशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में भव्य महानुष्ठान, वैदिक मंत्रों से गूंजा पूरा परिसर

श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम, दिनभर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़


रांची।
दिव्यदेशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में बुधवार को अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन कमला-पुरुषोत्तमी एकादशी के अवसर पर भव्य धार्मिक महानुष्ठान का आयोजन किया गया। पहाड़ी मंदिर के सन्निकट स्थित इस मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों और जय-जयकार से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली कमला एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और मोक्षदायिनी माना जाता है। इसी उपलक्ष्य में भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के समक्ष पंचरात्र आगम और वैदिक परंपरा के अनुसार विशेष तिरु-आराधना संपन्न कराई गई। मंदिर में आयोजित इस अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय वैष्णव परंपरा और सनातन वैदिक संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत अनुभव कराया।

वैदिक विधि से हुआ भगवान का दिव्य पूजन

अनुष्ठान की शुरुआत न्यासपूर्वक पूजा एवं दिक्बंधन क्रिया से हुई, जिसमें दसों दिशाओं के दिक्पालों का विधिवत आह्वान किया गया। इसके बाद सनातन परमात्मा श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का आवाहन, आसन, अर्ध्य, पाद्य, मधुपर्क, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, विलेपन एवं अलंकार आदि उपचारों के साथ दिव्य पूजन संपन्न कराया गया।

पूरे अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों की मधुर ध्वनि और शंखनाद से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। पंचरात्र आगम पद्धति के अनुसार भगवान के चारों व्यूहों का न्यास, प्रमुख अवतारों का पूजन, आयुधों एवं दिव्य आभरणों की आराधना भी की गई। तत्पश्चात भगवान दंपति को गंध, पुष्प, तुलसीदल एवं विविध पवित्र सामग्रियां अर्पित कर आठ विशेष मुद्राओं के साथ नैवेद्य समर्पित किया गया।

एकादश प्रकार के फलाहारी व्यंजनों का लगा विशेष भोग

कमला एकादशी के अवसर पर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर एवं माता महालक्ष्मी को एकादश प्रकार के फलाहारी व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया गया। भोग में विभिन्न प्रकार के फल, मिष्ठान्न एवं सात्विक पकवान शामिल रहे। इसके बाद नक्षत्र, कुंभ एवं कर्पूर की दिव्य बातियों से महाआरती की गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

महाआरती के समय पूरा मंदिर परिसर “गोविंदा-गोविंदा”, “जय श्रीनिवास”, “जय लक्ष्मी माता” और “वैंकटेश्वर भगवान की जय” के उद्घोष से गूंज उठा। वेदपाठ और महास्तुति के साथ वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक एवं भक्तिमय हो गया।

भक्तों ने कराई सहस्त्रनाम और विशेष अर्चना

मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार की विशेष अर्चनाएं कराते दिखे। किसी ने भगवान श्रीवेंकटेश्वर का सहस्त्रनाम अर्चन कराया तो किसी ने माता लक्ष्मी की कुंकुम अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं कई भक्तों ने पुष्पों से अष्टोत्तर शतनाम अर्चना कर भगवान का विशेष पूजन कराया।

मंदिर प्रशासन के अनुसार पुरुषोत्तम मास की एकादशी होने के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रही। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और सेवा का सुंदर वातावरण बना रहा।

भक्त परिवारों ने किया भोग निवेदन

इस पावन अवसर पर दिनभर का भोग निवेदन रांची निवासी श्री आशीष अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अश्विका अग्रवाल द्वारा समर्पित किया गया। वहीं एक समय का विशेष भोग श्री विमल मिश्र एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा मिश्र द्वारा अर्पित किया गया।

मंदिर समिति ने बताया कि श्रद्धालुओं की सहभागिता और सेवा भाव से ही ऐसे धार्मिक आयोजनों की दिव्यता और बढ़ जाती है। भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।

विद्वान आचार्यों ने संपन्न कराया महानुष्ठान

पूरे धार्मिक अनुष्ठान को अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने वैदिक रीति-रिवाजों और आगम शास्त्र के अनुसार विधिवत संपन्न कराया। आचार्यों ने श्रद्धालुओं को कमला एकादशी और पुरुषोत्तम मास के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

इन श्रद्धालुओं की रही विशेष भूमिका

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सर्वश्री राम अवतार नरसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नरसरिया, घनश्याम दास शर्मा, रंजन सिंह, सुशील गाड़ोदिया, यशोदा देवी, दीपू सिन्हा, राजकुमार यादव, सुनील यादव, सज्जन सर्राफ, अशोक धनानी, भोला बरनवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं की सक्रिय भूमिका रही।

आध्यात्मिक चेतना का बना केंद्र

कमला-पुरुषोत्तमी एकादशी के इस दिव्य आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि रांची का यह तिरुपति बालाजी मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। पुरुषोत्तम मास में आयोजित इस महानुष्ठान ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, आस्था और धार्मिक ऊर्जा का नया संचार किया।

कमला-पुरुषोत्तमी एकादशी पर दिव्यदेशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में भव्य महानुष्ठान, वैदिक मंत्रों से गूंजा पूरा परिसर कमला-पुरुषोत्तमी एकादशी पर दिव्यदेशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में भव्य महानुष्ठान, वैदिक मंत्रों से गूंजा पूरा परिसर Reviewed by PSA Live News on 6:47:00 am Rating: 5

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