साहिबगंज में पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप: पीएम आवास योजना में नाम जोड़ने के नाम पर अवैध वसूली, ग्रामीणों में आक्रोश
साहिबगंज (झारखंड): जिले के बोरियो प्रखंड अंतर्गत बिचपुरा पंचायत में विकास योजनाओं में गड़बड़ी और अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत सचिव आशा कुमारी पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में नाम जोड़ने और लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूले, लेकिन अब तक अधिकांश योग्य लाभुकों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
“नाम जोड़ने के लिए लिए गए हजार-हजार रुपये”
रंगमटिया गांव के दर्जनों ग्रामीणों—नरेश मुर्मू, मुंशी मरांडी, ताला मुर्मू, मांझी हेंब्रम, संजीव हेंब्रम सहित अन्य—ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव ने प्रति व्यक्ति 1000 रुपये लेकर आवास योजना में नाम शामिल करने का भरोसा दिया था।
ग्रामीणों का कहना है कि पैसे देने के बावजूद न तो सूची में नाम जोड़ा गया और न ही किसी प्रकार का लाभ मिला।
“बिना पैसे नहीं होता कोई काम”
ग्रामीणों ने साफ आरोप लगाया कि पंचायत में बिना पैसे दिए कोई भी काम नहीं किया जाता। इससे न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
योग्य वंचित, अयोग्य लाभान्वित
ग्रामीणों का आरोप है कि—
- कई वास्तविक जरूरतमंद परिवार अब भी आवास योजना से वंचित हैं
- जबकि कथित रूप से संपन्न और अयोग्य लोगों को योजना का लाभ दे दिया गया
- एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को लाभ मिलने की भी शिकायत है
- यहां तक कि पक्का मकान और ट्रैक्टर रखने वाले लोगों को भी योजना में शामिल कर लिया गया
इन आरोपों ने पूरे पंचायत में भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंका को और मजबूत कर दिया है।
ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर पंचायत सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, वंचित लाभुकों को जल्द से जल्द योजना का लाभ देने की भी मांग उठाई गई है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
हालांकि इस मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जांच की संभावना जताई जा रही है।
साहिबगंज के बिचपुरा पंचायत में सामने आए ये आरोप ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और पीड़ित ग्रामीणों को न्याय दिला पाता है या नहीं।
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