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SIR और जनगणना को लेकर झामुमो मिशन मोड में, बूथ से पंचायत तक संगठन मजबूत करने की बड़ी कवायद

हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्यव्यापी अभियान तेज, भाजपा पर “अधिकार छीनने की राजनीति” का आरोप


रांची :
आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और जनगणना को लेकर झारखंड की सियासत गर्माने लगी है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अब इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए पूरे राज्य में मिशन मोड पर अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने में जुट गई है और हर गांव तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर संगठन को जमीनी स्तर तक पुनर्गठित करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में झामुमो महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय लगातार जिलों का दौरा कर सांगठनिक बैठकों का नेतृत्व कर रहे हैं। इन बैठकों में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंट (BLA) को SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची सत्यापन और जनगणना के संभावित राजनीतिक प्रभावों को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास में बनी रणनीति, बूथ स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य

जानकारी के अनुसार 20 और 21 अप्रैल 2026 को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में हुई दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया था। बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ कहा था कि आने वाले समय में राजनीतिक लड़ाई केवल चुनावी मंचों पर नहीं, बल्कि मतदाता सूची, जनगणना और सरकारी रिकॉर्ड के स्तर पर भी लड़ी जाएगी।

बैठक में SIR और जनगणना के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई थी और पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया था कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें। पार्टी का मानना है कि यदि संगठन बूथ स्तर तक मजबूत रहेगा तो किसी भी “राजनीतिक साजिश” का मुकाबला किया जा सकेगा।

लोहरदगा और गुमला से शुरू हुआ अभियान

इसी रणनीति के तहत 25 मई को लोहरदगा और 26 मई को गुमला में बड़ी सांगठनिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में जिला, प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक के पदाधिकारियों की भागीदारी रही। BLA को विशेष रूप से मतदाता सूची के सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और आम लोगों को प्रक्रिया समझाने की जिम्मेदारी दी गई।

बैठकों को संबोधित करते हुए विनोद पांडेय ने कहा कि यह केवल चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि “लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा” का अभियान है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे हर घर तक पहुंचें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से न कटे।

अगले चरण में कोल्हान और दक्षिणी झारखंड पर फोकस

झामुमो ने अब अगले चरण की बैठकों का कार्यक्रम भी तय कर दिया है।

  • 2 जून को पश्चिम सिंहभूम
  • 3 जून को पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां
  • 4 जून को सिमडेगा

में बड़ी सांगठनिक बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में भी जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता और BLA शामिल होंगे। पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य है कि आगामी महीनों में पूरे राज्य में बूथवार नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो जाए।

भाजपा पर तीखा हमला, “पहले अधिकार रोकते हैं, फिर राजनीति करते हैं”

इस अभियान के जरिए झामुमो भाजपा पर लगातार हमलावर भी है। विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति “पहले अधिकार रोकने और बाद में उसी मुद्दे पर राजनीति करने” की रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां राज्य की योजनाओं के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि रोकी जाती है और फिर विकास नहीं होने का आरोप लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि SIR और तकनीकी प्रक्रियाओं की आड़ में गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों को व्यवस्था से बाहर करने की कोशिश हो रही है।

बिहार और बंगाल का उदाहरण देकर साधा निशाना

विनोद पांडेय ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि तकनीकी त्रुटियों और “Logical Discrepancy” जैसे कारणों का हवाला देकर लाखों लोगों के नाम विभिन्न सरकारी सूचियों से हटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में SIR प्रक्रिया के बाद लाखों राशन कार्ड रद्द किए गए, जबकि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों के नाम सूची से हटाने के मामले सामने आए।

उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि गरीबों और वंचितों के अधिकारों पर सुनियोजित हमला है।

“आज वोटर लिस्ट से नाम काटा जा रहा है, कल राशन रोका जाएगा और परसों कहा जाएगा कि डेटाबेस में आपका अस्तित्व ही नहीं है।” — विनोद पांडेय

गांव-गांव तक जाएगा अभियान

झामुमो अब इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव और बूथ-बूथ तक अभियान चलाने की तैयारी में है। पार्टी की रणनीति केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और जनगणना को देखते हुए झारखंड में SIR का मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विमर्श बन सकता है। ऐसे में झामुमो इसे सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकार और संगठनात्मक मजबूती के साथ जोड़कर व्यापक जनसमर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।

SIR और जनगणना को लेकर झामुमो मिशन मोड में, बूथ से पंचायत तक संगठन मजबूत करने की बड़ी कवायद SIR और जनगणना को लेकर झामुमो मिशन मोड में, बूथ से पंचायत तक संगठन मजबूत करने की बड़ी कवायद Reviewed by PSA Live News on 8:51:00 pm Rating: 5

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