फर्जी अफसर बनकर 63 लाख की ठगी: सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवाओं के सपनों से खेलता रहा शातिर, आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ा
एमकॉम पास युवक खुद को बताता था बड़ा अधिकारी, तीन आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और मोबाइल फोन बरामद
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले, कई परिवारों की जमा-पूंजी डूबी
एसपी के निर्देश पर विशेष अभियान में ठूठीबारी पुलिस को मिली बड़ी सफलता
PSA Live News | महराजगंज से संवाददाता।
महराजगंज जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को करोड़ों सपने दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खुद को विभिन्न सरकारी विभागों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को अपने झांसे में लेने वाला यह युवक लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस जांच में अब तक 63 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की मजबूरी को अपना हथियार बनाया और बड़े अधिकारियों से नजदीकी तथा ऊंचे पदों पर प्रभाव होने का दावा कर लोगों से मोटी रकम वसूलता रहा। कई परिवारों ने अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की उम्मीद में जमीन बेच दी, कर्ज ले लिया और वर्षों की जमा पूंजी आरोपी को सौंप दी। लेकिन नौकरी तो दूर, उन्हें केवल धोखा और निराशा ही हाथ लगी।
ऐसे बिछाता था ठगी का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी विनीत कुमार सिंह पुत्र चन्द्रिका सिंह, निवासी बासपार कोठी, थाना श्यामदेउरवा, जिला महराजगंज, उम्र लगभग 30 वर्ष, उच्च शिक्षित है और उसने एमकॉम तक की पढ़ाई की है। अपनी शिक्षा और बोलचाल की दक्षता का फायदा उठाकर वह लोगों का विश्वास जीत लेता था।
बताया जाता है कि आरोपी खुद को कभी किसी मंत्रालय का अधिकारी, कभी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा कर्मचारी तो कभी प्रभावशाली सरकारी व्यक्ति बताता था। वह दावा करता था कि उसकी पहुंच उच्च अधिकारियों तक है और वह आसानी से सरकारी विभागों में नियुक्ति दिला सकता है।
युवाओं को विश्वास दिलाने के लिए वह सरकारी कार्यालयों, भर्ती प्रक्रियाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की ऐसी जानकारी देता था कि सामने वाला उसकी बातों पर आसानी से भरोसा कर लेता था। इसके बाद वह नौकरी सुनिश्चित कराने के नाम पर लाखों रुपये की मांग करता था।
बेरोजगारी का उठाया फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं के आकर्षण का फायदा ऐसे ठग लगातार उठा रहे हैं। महराजगंज का यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए किसी भी कीमत पर सरकारी नौकरी चाहते हैं। इसी मनोविज्ञान को समझकर आरोपी ने एक सुनियोजित नेटवर्क तैयार किया और लोगों से धन उगाही करता रहा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वह लोगों को समय-समय पर झूठे आश्वासन देता रहता था ताकि वे शिकायत न करें और उसे और समय मिल जाए।
पुलिस की विशेष टीम ने दबोचा
महराजगंज पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में अपराधियों और वांछित आरोपियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान इस मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली। अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी निचलौल अनिरुद्ध कुमार के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष ठूठीबारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश तेज की।
काफी समय से फरार चल रहे आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। बुधवार को मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और ठूठीबारी क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले इस ठगी को अंजाम देता था या उसके साथ कोई और भी शामिल था।
बरामदगी ने बढ़ाए शक
पुलिस द्वारा की गई तलाशी में आरोपी के कब्जे से तीन आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन का उपयोग वह लोगों को भ्रमित करने तथा खुद को प्रभावशाली अधिकारी साबित करने के लिए करता था।
बरामद मोबाइल फोन की तकनीकी जांच कराई जा रही है। संभावना है कि इनके जरिए कई अन्य पीड़ितों और संभावित सहयोगियों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।
पुलिस साइबर और तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाया था या नहीं।
63 लाख की ठगी का खुलासा, बढ़ सकती है रकम
अब तक की जांच में 63 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई अन्य पीड़ित भी सामने आ सकते हैं।
संभावना जताई जा रही है कि आरोपी ने विभिन्न जिलों के लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो। यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो ठगी की कुल रकम और अधिक हो सकती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति ने आरोपी को नौकरी के नाम पर पैसा दिया है तो वह आगे आकर शिकायत दर्ज कराए, ताकि मामले की व्यापक जांच की जा सके।
युवाओं के लिए सबक
यह मामला उन हजारों युवाओं के लिए भी एक चेतावनी है जो सरकारी नौकरी पाने की जल्दबाजी में दलालों और तथाकथित प्रभावशाली लोगों के झांसे में आ जाते हैं। सरकारी भर्तियां केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती हैं और किसी व्यक्ति के माध्यम से नौकरी दिलाने का दावा अधिकांश मामलों में धोखाधड़ी साबित होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिए और किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए।
न्यायालय में पेशी के बाद भेजा गया जेल
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध पहले से दर्ज मुकदमे में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया। अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक रमेश पुरी, कांस्टेबल कवि कुमार तथा रिक्रूट कांस्टेबल अभिषेक चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि आम लोगों से धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्य बिंदु
- फर्जी अधिकारी बनकर 63 लाख रुपये की ठगी।
- सरकारी नौकरी दिलाने का देता था झांसा।
- एमकॉम पास युवक निकला मास्टरमाइंड।
- तीन आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दो मोबाइल बरामद।
- लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने दबोचा।
- पीड़ितों की संख्या बढ़ने की संभावना।
- पुलिस कर रही नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों की जांच।
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