केवटी के बीडीओ पर ईओयू का शिकंजा: 13 साल की नौकरी में 5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी से मचा हड़कंप
पत्नी, भाई और साले के नाम पर करोड़ों की जमीन, मार्ट और अस्पताल में निवेश का आरोप
89 लाख से अधिक की अवैध कमाई का मामला दर्ज, बैंक खाते फ्रीज, डायरी से खुल सकते हैं कई बड़े राज
पीएसए न्यूज | पटना / दरभंगा / मधुबनी।
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महज 13 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान बीडीओ ने आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य करीब पांच करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
ईओयू की लगभग 50 सदस्यीय टीम ने दरभंगा और मधुबनी जिले में फैले छह अलग-अलग ठिकानों पर करीब चार घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान जमीन, भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी ने अब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बीडीओ के खिलाफ आय से 81.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है।
एक साथ छह ठिकानों पर हुई कार्रवाई
आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने केवटी स्थित बीडीओ कार्यालय, सरकारी आवास, दरभंगा के बहादुरपुर स्थित किराए के मकान, मधुबनी जिले के बाबूबरही स्थित पैतृक घर, बाबूबरही बाजार में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा शंकरपुर-मोहनपुर के बीच स्थित एक बंद मकान में एक साथ छापेमारी की।
सुबह शुरू हुई कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने सभी परिसरों की गहन तलाशी ली। टीम ने जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक खातों, निवेश, व्यवसाय और अन्य वित्तीय लेन-देन से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए। छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे करोड़ों रुपये के निवेश और संपत्ति का खुलासा हुआ है।
1.34 करोड़ के दस्तावेज, बाजार मूल्य पांच करोड़ से अधिक
ईओयू सूत्रों के अनुसार तलाशी के दौरान लगभग 1 करोड़ 34 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। हालांकि वर्तमान बाजार दर के अनुसार इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य करीब पांच करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
जांच एजेंसी को संदेह है कि वर्षों से अर्जित की गई अवैध कमाई को विभिन्न माध्यमों से जमीन, भवन और व्यवसायों में लगाया गया। यही कारण है कि दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि वास्तविक निवेश और संपत्ति का पूरा ब्योरा सामने आ सके।
बैंक खातों पर भी कार्रवाई, 10 लाख रुपये फ्रीज
छापेमारी के दौरान मिले वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर ईओयू ने बीडीओ के एक बैंक खाते में जमा लगभग 10 लाख रुपये को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। जांच एजेंसी अब अन्य खातों और निवेशों की भी पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई अन्य बैंक खातों, निवेश योजनाओं और संपत्तियों का खुलासा हो सकता है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
89 लाख की काली कमाई का आरोप
ईओयू की प्रारंभिक जांच में यह निष्कर्ष सामने आया है कि चंद्रमोहन पासवान ने अब तक लगभग 89 लाख 13 हजार रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। यह राशि उनकी वैध आय की तुलना में काफी अधिक पाई गई है।
इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर मुजफ्फरपुर स्थित विशेष न्यायालय में प्राथमिकी दर्ज कराई है। अब आगे की जांच में इस राशि के और बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
आठ पन्नों की रहस्यमयी डायरी बनी जांच का केंद्र
छापेमारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी एक आठ पन्नों की डायरी को माना जा रहा है। यह डायरी बीडीओ के आवास से बरामद हुई है। सूत्रों का कहना है कि डायरी में कई महत्वपूर्ण लेन-देन, भुगतान, संपर्क सूत्र और आर्थिक गतिविधियों का विवरण कोड वर्ड में दर्ज हो सकता है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि डायरी में दर्ज संकेतों और कोडों को समझ लिया गया तो भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। यही कारण है कि डायरी को विशेष जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
पत्नी, भाई और साले के नाम पर संपत्ति खड़ी करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि बीडीओ ने कथित तौर पर अपनी संपत्तियों को सीधे अपने नाम पर रखने के बजाय पत्नी, भाई और साले के नाम पर निवेश किया।
दरभंगा के बहादुरपुर क्षेत्र में पत्नी के नाम पर कई मूल्यवान संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। वहीं मधुबनी जिले के बाबूबरही में भाई और अन्य परिजनों के नाम पर खरीदी गई जमीनों का भी खुलासा हुआ है।
जांच एजेंसी को ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि परिजनों के नाम पर निवेश कर वास्तविक स्वामित्व को छिपाने का प्रयास किया गया।
मार्ट और अस्पताल में निवेश की जांच
शिकायतकर्ता मोहम्मद इकबाल अंसारी द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, बाबूबरही क्षेत्र में साले चुन्नू चौधरी के साथ मिलकर 'जीटी मार्ट' तथा 'जीटी हेल्थ मेमोरियल हॉस्पिटल' नामक प्रतिष्ठानों में निवेश किया गया है।
ईओयू अब इन प्रतिष्ठानों की पूंजी, निवेश स्रोत, स्वामित्व संरचना और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। यदि निवेश में सरकारी पद का दुरुपयोग या अवैध धन का उपयोग साबित होता है तो मामले में नए आरोप भी जोड़े जा सकते हैं।
एयरपोर्ट और एम्स के आसपास भी जमीन खरीदने की चर्चा
जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज भी सामने आए हैं जिनसे दरभंगा हवाई अड्डे तथा एम्स परिसर के आसपास की बहुमूल्य जमीनों में निवेश की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि इन जमीनों का स्वामित्व पत्नी और साले के नाम पर दर्ज है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में विकास परियोजनाओं के कारण इन क्षेत्रों की जमीनों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण इन निवेशों का वर्तमान मूल्य करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है।
भाइयों से भी पूछताछ
ईओयू ने बीडीओ के बड़े भाई विश्वमोहन पासवान से भी पूछताछ की है, जो वर्तमान में खजौली में स्टेशन अधीक्षक के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनके नाम पर खरीदी गई संपत्तियों में धन का स्रोत क्या था।
जानकारी के अनुसार परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
ग्रामीण विकास विभाग को भेजी गई रिपोर्ट
आर्थिक अपराध इकाई ने इस पूरे मामले की जानकारी ग्रामीण विकास विभाग को भी उपलब्ध करा दी है। विभागीय स्तर पर बीडीओ के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो निलंबन, विभागीय जांच और सेवा संबंधी अन्य कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
ईओयू अब चंद्रमोहन पासवान को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाएगी। बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, जमीनों, व्यवसायों और डायरी में दर्ज सूचनाओं का मिलान किया जाएगा। जांच एजेंसी इस बात का भी पता लगाएगी कि कहीं भ्रष्टाचार का यह मामला किसी बड़े नेटवर्क या संगठित आर्थिक अनियमितता से तो नहीं जुड़ा है।
फिलहाल केवटी के बीडीओ पर हुई यह कार्रवाई बिहार में प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गई है। करोड़ों रुपये की संपत्ति, परिजनों के नाम पर निवेश, बैंक खातों की जांच और रहस्यमयी डायरी की बरामदगी ने इस पूरे मामले को और अधिक सनसनीखेज बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच के नए खुलासों पर पूरे राज्य की नजर बनी रहेगी।
Reviewed by PSA Live News
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7:32:00 am
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