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स्मैक तस्कर को बचाने की कोशिश पड़ी भारी: फर्जी रिपोर्ट देने पर महिला लेखपाल निलंबित, कानूनगो पर भी गिरेगी गाज

■ करोड़ों की संपत्ति वाले तस्कर की कोठी पर चला प्रशासन का शिकंजा, दोबारा जांच में खुली सरकारी जमीन कब्जाने की पोल

■ पहली जांच में अधिकारियों को किया गया गुमराह, दूसरी जांच में लगभग 300 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का खुलासा


बरेली।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्मैक तस्करी से जुड़े एक आरोपी को बचाने के लिए राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से की गई अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। फरीदपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक बने एक स्मैक तस्कर के पक्ष में भ्रामक रिपोर्ट देने के आरोप में महिला लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि संबंधित कानूनगो के विरुद्ध भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि सरकारी भूमि पर निर्मित तस्कर की आलीशान कोठी को बचाने के लिए लेखपाल और कानूनगो ने अधिकारियों को ऐसी रिपोर्ट सौंपी जिसमें सरकारी जमीन को खाली दिखाया गया। हालांकि अधिकारियों को रिपोर्ट पर संदेह हुआ और दोबारा जांच कराए जाने पर पूरा मामला उजागर हो गया। जांच में पाया गया कि कोठी निर्माण के दौरान लगभग 300 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया था।

स्मैक तस्करी से करोड़ों की संपत्ति तक का सफर

फरीदपुर तहसील के मोहनपुर गांव निवासी मेहताब और उसका भाई शब्बू लंबे समय से स्मैक तस्करी के मामलों में चर्चा में रहे हैं। हाल ही में मीरगंज पुलिस ने मेहताब को स्मैक के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गिरफ्तारी के बाद जब प्रशासन ने उसकी चल-अचल संपत्तियों की जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जांच में पता चला कि मेहताब के पास करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियां हैं। इनमें आलीशान कोठियां, भूखंड और अन्य निवेश शामिल हैं। प्रशासन ने जब उसकी संपत्तियों के स्रोत और वैधता की पड़ताल शुरू की, तभी सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला भी सामने आया।

पहली जांच में दी गई क्लीन चिट

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मेहताब की करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की कोठी की जांच की जिम्मेदारी लेखपाल प्राची शर्मा को सौंपी गई थी। इस दौरान संबंधित कानूनगो अरविंद कुमार सक्सेना ने भी जांच प्रक्रिया में भाग लिया।

11 मई को अधिकारियों को सौंपी गई रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोठी पूरी तरह से निजी भूमि पर निर्मित है तथा आसपास की सरकारी जमीन खाली पड़ी हुई है। रिपोर्ट में कहीं भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की बात नहीं कही गई। इस रिपोर्ट के आधार पर तस्कर को राहत मिलने की संभावना बन रही थी।

हालांकि उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट के तथ्यों पर संदेह हुआ। जमीन के अभिलेखों और मौके की स्थिति में अंतर दिखाई देने पर मामले की पुनः जांच कराने का निर्णय लिया गया।

एसडीएम को हुआ संदेह, गठित की दूसरी टीम

फरीदपुर के एसडीएम रामजनम यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नायब तहसीलदार शुभम पांडेय की अध्यक्षता में एक नई जांच टीम का गठन किया। टीम को मौके का निरीक्षण करने, भूमि अभिलेखों का मिलान करने तथा वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

जांच टीम ने कई दिनों तक स्थल निरीक्षण, नक्शा सत्यापन और अभिलेखों की पड़ताल की। इसके बाद 29 मई को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी। रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पहली जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।

दूसरी जांच में खुली कब्जे की पूरी कहानी

नई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि मेहताब द्वारा निर्मित आलीशान कोठी केवल निजी जमीन तक सीमित नहीं है। कोठी के निर्माण और परिसर विस्तार के दौरान लगभग 300 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर भी कब्जा कर लिया गया है।

जांच में यह भी पाया गया कि पहली रिपोर्ट में इस तथ्य को जानबूझकर छिपाया गया था। राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति में स्पष्ट अंतर होने के बावजूद सरकारी जमीन को खाली दिखाया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि तस्कर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से गलत रिपोर्ट तैयार की गई थी।

महिला लेखपाल निलंबित, कानूनगो पर कार्रवाई की संस्तुति

दूसरी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद एसडीएम रामजनम यादव ने तत्काल प्रभाव से लेखपाल प्राची शर्मा को निलंबित कर दिया। उन पर अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन न करने तथा भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है।

वहीं कानूनगो अरविंद कुमार सक्सेना के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। माना जा रहा है कि जिलाधिकारी स्तर पर जांच के बाद उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन का सख्त संदेश

एसडीएम रामजनम यादव ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया। पहली रिपोर्ट में सरकारी भूमि को खाली दर्शाया गया था, जबकि पुनः जांच में वही भूमि तस्कर की कोठी के भीतर पाई गई। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गलत रिपोर्ट देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध कब्जाधारियों या अपराधियों को संरक्षण देने का प्रयास न करे।

राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि एसडीएम को पहली रिपोर्ट पर संदेह न होता और दूसरी जांच न कराई जाती, तो सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला दब सकता था। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान होता बल्कि एक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को प्रशासनिक संरक्षण मिलने का संदेश भी जाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश भर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कई मामलों में गलत रिपोर्टों के कारण सरकारी भूमि पर वर्षों तक कब्जा बना रहता है और बाद में उसे हटाना मुश्किल हो जाता है।

अवैध संपत्तियों पर प्रशासन की नजर

मेहताब की गिरफ्तारी के बाद उसकी संपत्तियों की जांच अभी भी जारी है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि करोड़ों रुपये की संपत्ति किस प्रकार अर्जित की गई। यदि जांच में अवैध कमाई से संपत्ति अर्जित करने के प्रमाण मिलते हैं तो गैंगस्टर एक्ट और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है।

फिलहाल महिला लेखपाल के निलंबन और कानूनगो पर प्रस्तावित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बरेली प्रशासन अब न केवल अपराधियों बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाने के मूड में है। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

स्मैक तस्कर को बचाने की कोशिश पड़ी भारी: फर्जी रिपोर्ट देने पर महिला लेखपाल निलंबित, कानूनगो पर भी गिरेगी गाज स्मैक तस्कर को बचाने की कोशिश पड़ी भारी: फर्जी रिपोर्ट देने पर महिला लेखपाल निलंबित, कानूनगो पर भी गिरेगी गाज Reviewed by PSA Live News on 7:59:00 am Rating: 5

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