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विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज का संदेश: “प्रकृति को बचाना है तो विचारों को भी बनाना होगा शुद्ध”

पर्यावरण संकट केवल प्राकृतिक नहीं, मानव चेतना के असंतुलन का भी परिणाम : निर्मला बहन


रांची, 6 जून।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हरमू रोड स्थित चौधरी बगान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका निर्मला बहन ने पर्यावरण संरक्षण को केवल पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा तक सीमित न मानते हुए इसे मानव चेतना और आध्यात्मिक जागरूकता से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व जिस जलवायु संकट, पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक असंतुलन का सामना कर रहा है, उसके पीछे केवल भौतिक कारण ही नहीं बल्कि मानव मन में बढ़ती नकारात्मकता, लालच, भय और अहंकार भी जिम्मेदार हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए निर्मला बहन ने कहा कि आत्मा और प्रकृति के पांच तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के बीच अत्यंत गहरा और सूक्ष्म संबंध है। ये तत्व केवल भौतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवंत और संवेदनशील ऊर्जा के स्रोत हैं। जब मनुष्य अपनी मूल चेतना में स्थित होकर शांति, प्रेम, करुणा और पवित्रता के गुणों को जीवन में अपनाता है, तब प्रकृति भी संतुलित और सहयोगी बनी रहती है। लेकिन जब मानव चेतना असंतुलित हो जाती है, तब उसका प्रभाव पूरे पर्यावरण पर दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भीषण गर्मी और प्राकृतिक आपदाएं केवल वैज्ञानिक या भौतिक घटनाएं नहीं हैं। इनके पीछे मानवता की सामूहिक मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी प्रभाव है। जिस प्रकार उद्योगों और वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें वातावरण को प्रदूषित करती हैं, उसी प्रकार नकारात्मक विचार, क्रोध, तनाव और हिंसा की मानसिक तरंगें भी वातावरण को दूषित करती हैं।

“हर संकल्प बनता है ऊर्जा का स्रोत”

निर्मला बहन ने कहा कि आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार प्रत्येक विचार और संकल्प एक ऊर्जा है। मनुष्य जो सोचता है, उसकी तरंगें वातावरण में फैलती हैं और सामूहिक चेतना को प्रभावित करती हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विचारों और जीवनशैली को सकारात्मक बनाना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक सकारात्मक विचार पृथ्वी के लिए एक शुभ संकल्प की तरह कार्य करता है, जबकि नकारात्मक सोच पर्यावरणीय संतुलन को कमजोर करती है। इसलिए यदि हम वास्तव में पृथ्वी को स्वस्थ और सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी सोच, व्यवहार और जीवन मूल्यों में भी परिवर्तन लाना होगा।

आध्यात्मिकता ही स्थायी समाधान

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारी योजनाएं या तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए मनुष्य के भीतर मौजूद मूल गुणों—शांति, प्रेम, पवित्रता, शक्ति, आनंद और ज्ञान—को पुनः जागृत करना होगा। यही गुण मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण लोग अपने वास्तविक स्वरूप और आंतरिक शक्तियों को भूलते जा रहे हैं। इसका परिणाम मानसिक अशांति, सामाजिक तनाव और पर्यावरणीय असंतुलन के रूप में सामने आ रहा है। मेडिटेशन, मौन और आत्म-जागरूकता के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की सकारात्मक ऊर्जा को जागृत कर सकता है, जिससे न केवल उसका व्यक्तिगत जीवन बेहतर बनता है बल्कि समाज और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

राजयोग मेडिटेशन अपनाने का आह्वान

निर्मला बहन ने उपस्थित लोगों से प्रतिदिन राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विचारों की शुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए राजयोग एक प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर शांति और सकारात्मकता का अनुभव करता है तथा अपने जीवन में संतुलन स्थापित कर सकता है।

उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज चौधरी बगान, हरमू रोड केंद्र पर प्रतिदिन निःशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण सुबह 7 बजे से 10 बजे तक तथा शाम 4 बजे से 7 बजे तक उपलब्ध है, जिसमें कोई भी व्यक्ति भाग लेकर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत कर सकता है।

पर्यावरण संरक्षण की शपथ

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की सामूहिक शपथ ली। प्रतिभागियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण हितैषी आदतों को अपनाएंगे तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट किया कि प्रकृति और मानव चेतना एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि यदि धरती को सुरक्षित और संतुलित रखना है तो केवल बाहरी पर्यावरण की नहीं, बल्कि अपने विचारों और चेतना की स्वच्छता पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। यही सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण का वास्तविक मार्ग है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज का संदेश: “प्रकृति को बचाना है तो विचारों को भी बनाना होगा शुद्ध” विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज का संदेश: “प्रकृति को बचाना है तो विचारों को भी बनाना होगा शुद्ध” Reviewed by PSA Live News on 7:16:00 pm Rating: 5

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