बिस्फी के केरवार गांव में दर्दनाक हादसा: डूबने से पांच मासूमों की मौत, जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से पांच घंटे में मिली सहायता राशि
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जताया गहरा शोक, एसडीओ व एसडीपीओ को जांच का आदेश; दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मधुबनी, 03 जून 2026। मधुबनी जिले के बिस्फी प्रखंड अंतर्गत सोहास पंचायत के केरवार गांव में बुधवार को घटित हृदयविदारक हादसे ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। पानी में डूबने से पांच मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य बच्चे को ग्रामीणों की तत्परता और साहसिक प्रयासों से सुरक्षित बचा लिया गया। इस दुखद घटना के बाद जिला प्रशासन ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए मात्र पांच घंटे के भीतर मृत बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध करा दी।
घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृत बच्चों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि यह हादसा केवल प्रभावित परिवारों की ही नहीं बल्कि पूरे जिले की अपूरणीय क्षति है। प्रशासन इस कठिन घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती और संवेदनशीलता के साथ खड़ा है।
घटना की जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने इस गंभीर घटना को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) बेनीपट्टी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) बेनीपट्टी को मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पांच घंटे के भीतर सहायता राशि का भुगतान
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। अपर समाहर्ता (आपदा), जिला आपदा प्रबंधन प्रभारी पदाधिकारी तथा अनुमंडल प्रशासन की टीम ने राहत कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के तहत मृत पांचों बच्चों के निकटतम आश्रितों को तत्काल अनुग्रह राहत के रूप में चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर वितरित की गई।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार घटना के मात्र पांच घंटे के भीतर सहायता राशि का भुगतान कर दिया गया, जिसे जिले में आपदा राहत प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
जिलाधिकारी ने स्वयं की मॉनिटरिंग, अधिकारियों को दिए तत्काल निर्देश
हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने पूरे घटनाक्रम की स्वयं निगरानी शुरू कर दी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत, बचाव और सहायता कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जिला प्रशासन की विभिन्न टीमें लगातार प्रभावित परिवारों के संपर्क में रहीं तथा उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई गई।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार हादसे में कुल छह बच्चे पानी में डूब गए थे। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल बचाव अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप एक बच्चे को जीवित बाहर निकाल लिया गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। हालांकि पांच अन्य बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
ग्रामीणों ने प्रशासन की तत्परता की सराहना की
दुःख की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता तथा त्वरित सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया।
डूबने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी की विशेष अपील
घटना के बाद जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जिले के सभी मुखियाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से डूबने की घटनाओं की रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के दौरान तालाब, पोखर, नदी, नहर और जलभराव वाले क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी पंचायतों में खतरनाक जलस्रोतों, गहरे गड्ढों, नदी घाटों और जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, बैरिकेडिंग कराई जाए तथा लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।
प्रशासन ने जारी की सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों को अकेले तालाब, पोखर, नदी, नहर या जलभराव वाले स्थानों पर न जाने दें। खतरनाक घाटों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। बिना जानकारी के किसी भी जलस्रोत में स्नान न करें और बच्चों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखें।
प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि किसी व्यक्ति के डूबने की स्थिति में सीधे पानी में कूदने के बजाय रस्सी, बांस, लकड़ी या अन्य सुरक्षित साधनों का उपयोग कर बचाव का प्रयास किया जाए।
जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान
जिलाधिकारी ने शिक्षकों, जीविका समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल राहत राशि देना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।
उन्होंने कहा, "एक छोटी सी असावधानी कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है। सावधानी, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ही डूबने जैसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। सुरक्षित और सजग समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है।"
केरवार गांव की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि बरसात के मौसम में जलस्रोतों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतना कितना आवश्यक है। पांच मासूम बच्चों की असमय मौत ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है, वहीं प्रशासन अब इस हादसे के कारणों की जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी में जुट गया है।
Reviewed by PSA Live News
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9:10:00 pm
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