फर्जी डीसीएलआर आदेश के सहारे जमीन का दाखिल-खारिज! मोतिहारी में भू-माफियाओं का बड़ा खेल उजागर, कई दलाल रडार पर
मोतिहारी में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा, प्रशासन में हड़कंप
सिटी रिपोर्टर | मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में जमीन की खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज प्रक्रिया में एक बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। भू-माफियाओं द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के नाम से फर्जी आदेश तैयार कर अंचल कार्यालय से जमीन का दाखिल-खारिज कराने का मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह अथवा बड़े रैकेट की ओर इशारा कर रहा है, जिसमें जमीन दलालों, दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और अन्य सहयोगियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।
शनिवार को डीसीएलआर सदर प्रीति सिंह ने सुनवाई के दौरान ऐसे दो मामलों का पर्दाफाश किया, जिनमें उनके नाम से जारी किए गए कथित आदेश के आधार पर जमीन का दाखिल-खारिज तक हो चुका था, जबकि वास्तविकता यह थी कि संबंधित मामलों में अभी सुनवाई ही चल रही थी और कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया था। मामले का खुलासा होते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई।
सुनवाई के दौरान सामने आया चौंकाने वाला सच
जानकारी के अनुसार अपील वाद संख्या 788/2023-24 और 789/2023-24 भूमि विवाद से जुड़े मामले हैं, जिनकी सुनवाई डीसीएलआर कार्यालय में चल रही है। नियमों के अनुसार यदि अंचलाधिकारी (सीओ) किसी दाखिल-खारिज आवेदन को अस्वीकृत कर देते हैं, तो संबंधित पक्ष डीसीएलआर के समक्ष अपील दायर करता है। डीसीएलआर द्वारा सुनवाई के बाद आदेश जारी किया जाता है और उसी के आधार पर पुनः दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
लेकिन इन दोनों मामलों में भू-माफियाओं ने कथित तौर पर डीसीएलआर के फर्जी आदेश की डिजिटल कॉपी तैयार कर ली। चूंकि ऑनलाइन जारी होने वाले आदेशों पर परंपरागत हस्ताक्षर और मुहर नहीं होते, इसलिए इस तकनीकी व्यवस्था का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। इसके बाद संबंधित जमीन मालिकों ने उसी फर्जी आदेश को आधार बनाकर अंचल कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन दिया और आश्चर्यजनक रूप से जमीन का दाखिल-खारिज भी करा लिया।
जब डीसीएलआर प्रीति सिंह इन मामलों की नियमित सुनवाई कर रही थीं, तब रिकॉर्ड की जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिन मामलों में अभी अंतिम आदेश जारी ही नहीं हुआ है, उनमें दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह जानकारी मिलते ही अधिकारियों के होश उड़ गए।
फर्जी आदेश के सहारे सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सरकारी प्रक्रिया की कमजोरियों का लाभ उठाकर पहले फर्जी आदेश तैयार किया, फिर उसे ऑनलाइन आवेदन के साथ संलग्न कर दिया। इसके आधार पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर जमीन का म्यूटेशन करा लिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि दाखिल-खारिज केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जमीन के स्वामित्व और अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी आदेश के आधार पर म्यूटेशन करा लेता है, तो भविष्य में जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में गंभीर विवाद खड़े हो सकते हैं।
डीसीएलआर ने दिए एफआईआर के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीएलआर सदर प्रीति सिंह ने तत्काल अंचलाधिकारी को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके बाद मोतिहारी अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी की ओर से छतौनी थाना में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए जमीन मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो कथित रूप से जमीन के मामलों में दलाली और दस्तावेज तैयार करने का काम करते हैं। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
दलालों का नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका
सूत्रों के अनुसार पूछताछ में सामने आए नामों से संकेत मिल रहे हैं कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं किया गया। जमीन मालिकों को फर्जी आदेश उपलब्ध कराने, ऑनलाइन आवेदन करने, तकनीकी दस्तावेज तैयार करने और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराने के लिए एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि दो मामलों में ऐसा हुआ है तो यह संभावना भी प्रबल है कि जिले में ऐसे कई अन्य मामले पहले से मौजूद हों। इसलिए अब पुराने दाखिल-खारिज मामलों की भी जांच की तैयारी की जा रही है।
पूरे जिले में हो सकती है बड़े पैमाने पर जांच
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब उन सभी मामलों की जांच की जा सकती है जिनमें डीसीएलआर के आदेश के आधार पर हाल के वर्षों में दाखिल-खारिज किया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि कहीं अन्य मामलों में भी फर्जी आदेशों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
यदि जांच में और मामले सामने आते हैं तो यह पूर्वी चंपारण जिले के सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक साबित हो सकता है। इससे न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे, बल्कि डिजिटल दस्तावेजों की सुरक्षा और सत्यापन प्रणाली की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
भूमि संबंधी मामलों में पहले से ही फर्जी दस्तावेज, जाली रसीद, नकली खतियान और अवैध कब्जे जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। अब डीसीएलआर के नाम से फर्जी आदेश तैयार कर दाखिल-खारिज कराने का मामला सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि भू-माफिया सरकारी व्यवस्था की कमजोरियों को पहचानकर उनका फायदा उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल आदेशों में अतिरिक्त सुरक्षा फीचर, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था लागू करना आवश्यक होगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
डीसीएलआर सदर प्रीति सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच में फर्जी आदेश के आधार पर दाखिल-खारिज कराए जाने का मामला सामने आया है। संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़े रैकेट का हिस्सा हो सकता है और ऐसे अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु
- डीसीएलआर के नाम से तैयार किया गया फर्जी आदेश।
- दो मामलों में फर्जी दस्तावेज के आधार पर हुआ दाखिल-खारिज।
- सुनवाई के दौरान डीसीएलआर ने पकड़ी गड़बड़ी।
- छतौनी थाना में प्राथमिकी दर्ज।
- जमीन मालिक हिरासत में, पूछताछ में कई दलालों के नाम सामने आए।
- बड़े भू-माफिया रैकेट की आशंका।
- जिले के अन्य मामलों की भी जांच की तैयारी।
मोतिहारी में सामने आया यह मामला केवल दो जमीनों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे भू-माफियाओं के नेटवर्क, प्रशासनिक खामियों और जमीन कारोबार के काले खेल की कई परतें खुल सकती हैं।
Reviewed by PSA Live News
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3:22:00 pm
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