सर्वजन विकास पार्टी के भव्य शुभारंभ पर संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक अशोक कुमार झा का ऐतिहासिक आह्वान— "अब समय आ गया है आज़ादी की दूसरी लड़ाई का"
देशभर के किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से पार्टी के साथ जुड़ने की अपील; कहा— "सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन हमारा लक्ष्य है"
रांची / नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का दावा करते हुए आज सर्वजन विकास पार्टी का विधिवत शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों की बड़ी उपस्थिति के बीच पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक अशोक कुमार झा ने राष्ट्र के नाम एक लंबा, ओजस्वी और भावनात्मक संबोधन दिया। अपने लगभग पूरे भाषण में उन्होंने सत्ता परिवर्तन की अपेक्षा व्यवस्था परिवर्तन को भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि वास्तव में भारत को शहीदों और बलिदानियों के सपनों का राष्ट्र बनाना है, तो केवल सरकारें बदलने से कुछ नहीं होगा, बल्कि शासन, प्रशासन और राजनीति की कार्यशैली में व्यापक परिवर्तन लाना होगा।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "इंकलाब ज़िंदाबाद" के नारों के साथ की। इसके बाद उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि वे आज किसी पद, प्रतिष्ठा या सत्ता की मांग करने नहीं आए हैं, बल्कि देश की सोई हुई जनशक्ति को जगाने आए हैं। उन्होंने कहा कि जिस चेतना ने कभी अंग्रेजी हुकूमत को भारत छोड़ने पर मजबूर किया था, आज उसी चेतना को भ्रष्टाचार, अन्याय, बेरोजगारी, प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक असमानता के विरुद्ध खड़ा होने की आवश्यकता है।
अशोक कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने विज्ञान, तकनीक, कृषि, रक्षा, अंतरिक्ष और लोकतंत्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों नागरिक आज भी उन मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं जो संविधान ने उन्हें दशकों पहले प्रदान किए थे। उन्होंने कहा कि देश का किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए आंदोलन करने को विवश है, मजदूर अपनी मेहनत के अनुरूप सम्मान और सुरक्षा से वंचित है, शिक्षित युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बावजूद रोजगार के लिए भटक रहा है, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग का आम नागरिक सरकारी कार्यालयों में अपने वैध कार्यों के लिए भी भ्रष्टाचार और लालफीताशाही का सामना करने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का परिणाम है। यदि व्यवस्था आम नागरिक के विश्वास को बनाए रखने में असफल हो जाए, यदि न्याय केवल शक्तिशाली लोगों तक सीमित रह जाए, यदि प्रशासन जनता की सेवा करने के बजाय जनता पर बोझ बन जाए, तो लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि "सर्वजन विकास पार्टी किसी जाति की पार्टी नहीं है, किसी धर्म की पार्टी नहीं है, किसी क्षेत्र की पार्टी नहीं है और किसी परिवार की पार्टी नहीं है। यह उस भारत की पार्टी है जो संविधान में विश्वास रखता है, लोकतंत्र में विश्वास रखता है और समान अवसर वाले भारत का निर्माण करना चाहता है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज देश को सबसे अधिक आवश्यकता सामाजिक सद्भाव, संवैधानिक मूल्यों और जनभागीदारी पर आधारित राजनीति की है। उन्होंने कहा कि जब राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्ति रह जाता है, तब जनता का विश्वास कमजोर होने लगता है। इसलिए सर्वजन विकास पार्टी राजनीति को फिर से सेवा, जवाबदेही और जनकल्याण का माध्यम बनाने का संकल्प लेकर मैदान में उतरी है।
अपने संबोधन के दौरान अशोक कुमार झा कई बार भावुक भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि जब वे देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकार के रूप में लोगों की समस्याएं सुनते थे, तब उन्हें महसूस होता था कि भारत की सबसे बड़ी समस्या किसी एक सरकार या किसी एक दल की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो आम नागरिक की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने और जनता के बीच काम करने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि केवल समस्याओं को उजागर करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाधान के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच भी खड़ा किया जाना चाहिए। इसी विचार से सर्वजन विकास पार्टी का जन्म हुआ।
उन्होंने अपने भाषण में देश के स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों को याद करते हुए कहा कि भगत सिंह ने केवल विदेशी शासन से मुक्ति का सपना नहीं देखा था, बल्कि अन्यायमुक्त भारत का सपना देखा था। चंद्रशेखर आज़ाद ने आत्मसम्मान और साहस का संदेश दिया। खुदीराम बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, सुखदेव, राजगुरु और असंख्य बलिदानियों ने अपने प्राण इसलिए न्योछावर नहीं किए थे कि स्वतंत्र भारत में भी गरीब न्याय के लिए भटके, किसान कर्ज में डूबा रहे, युवा बेरोजगारी से निराश हो और भ्रष्टाचार व्यवस्था पर हावी हो जाए।
उन्होंने कहा कि यदि आज उन महान क्रांतिकारियों की आत्माएं भारत को देख रही होंगी, तो वे निश्चित रूप से यह अपेक्षा करती होंगी कि देश के नागरिक फिर से अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक संघर्ष के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि "हमारे शहीदों ने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाई थी, अब हमें सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक न्याय की लड़ाई लड़नी है। यही आज़ादी की दूसरी लड़ाई है।"
अशोक कुमार झा ने अपने संबोधन में देश के किसानों से विशेष अपील करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, लेकिन सबसे अधिक उपेक्षित भी वही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय, सिंचाई, कृषि लागत, फसल का उचित मूल्य, भंडारण व्यवस्था और कृषि आधारित उद्योगों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। मजदूरों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्रम का सम्मान केवल भाषणों में नहीं, बल्कि नीतियों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसे उसका पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
देश के युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, लेकिन यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और अवसर नहीं मिले, तो यह जनसांख्यिकीय शक्ति चुनौती में बदल सकती है। उन्होंने युवाओं से राजनीति को केवल देखने के बजाय उसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
महिलाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और भागीदारी से होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि नीति निर्माण और नेतृत्व का समान अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सर्वजन विकास पार्टी भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, लालफीताशाही, प्रशासनिक मनमानी, शिक्षा में असमानता, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दों पर व्यापक राष्ट्रीय जनआंदोलन खड़ा करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान की मर्यादाओं के भीतर रहकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करेगी तथा जनता की आवाज़ को संसद से लेकर सड़क तक बुलंद करेगी।
अपने संबोधन के सबसे चर्चित हिस्से में उन्होंने कहा—
"अब समय आ गया है आज़ादी की दूसरी लड़ाई का। पहली लड़ाई विदेशी शासन के खिलाफ थी। दूसरी लड़ाई भ्रष्टाचार, अन्याय, शोषण, बेरोजगारी, प्रशासनिक असंवेदनशीलता और व्यवस्था की खामियों के खिलाफ होगी। यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो आम नागरिक को उसके अधिकारों से वंचित करती है।"
उन्होंने देशभर के किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, व्यापारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों से सर्वजन विकास पार्टी के साथ जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि परिवर्तन की इच्छा रखने वाले लोग एकजुट हो जाएं, तो भारत को न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था वाला राष्ट्र बनाया जा सकता है।
समारोह के अंत में उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष, संविधान की रक्षा, सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सामूहिक शपथ ली। पूरे कार्यक्रम के दौरान "व्यवस्था बदलो—देश बदलो", "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्", "जय संविधान", "जय किसान", "जय मजदूर" और "इंकलाब ज़िंदाबाद" के नारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
पार्टी नेताओं ने दावा किया कि सर्वजन विकास पार्टी का गठन केवल एक नए राजनीतिक संगठन की शुरुआत नहीं, बल्कि देश में व्यवस्था परिवर्तन, सुशासन, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और जनभागीदारी पर आधारित नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है। उनका कहना था कि आने वाले समय में पार्टी गांव-गांव, शहर-शहर और देश के प्रत्येक राज्य में संगठन का विस्तार करेगी तथा किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों को जोड़कर एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देगी।
कार्यक्रम के समापन पर अशोक कुमार झा ने कहा कि "व्यक्ति आता है और चला जाता है, लेकिन विचार अमर रहते हैं। यदि देश को वास्तव में महान बनाना है, तो हमें सत्ता के लिए नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष करना होगा। हमारा लक्ष्य किसी एक दल को हराना नहीं, बल्कि भारत को जिताना है। यही हमारे शहीदों और संविधान निर्माताओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।"
Reviewed by PSA Live News
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7:29:00 pm
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