रांची, 4 जुलाई 2026: राजधानी रांची के रातू रोड स्थित रानी सती मंदिर लेन में अवस्थित दिव्यदेशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में शनिवार को आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी के अवसर पर आयोजित 938वें खिचड़ी महाभंडारे में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के दर्शन-पूजन के साथ खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर परिसर सुबह से ही भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, घंटानाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मंदिर के अर्चकों द्वारा वेद, उपनिषद तथा विभिन्न सूक्तों के मंत्रों के साथ पारंपरिक वैदिक विधि-विधान से नित्याराधन पूजा एवं विशेष आराधना कराई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष अपनी सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की मंगलकामना की।
अनुष्ठान के दौरान श्रीपद्मावती वल्लभ श्रीनिवास की स्तुति एवं आराधना वैदिक ऋचाओं, श्लोकों और आगमोक्त परंपराओं के अनुरूप संपन्न की गई। धार्मिक अनुष्ठानों की दिव्यता और आध्यात्मिक वातावरण ने मंदिर परिसर को भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर कर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और आरती में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
महाआरती के उपरांत भगवान को विधिवत खिचड़ी महाभोग अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण शुरू हुआ। मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस विशेष अवसर पर कुल 1342 श्रद्धालुओं ने खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण किया, जो मंदिर में आयोजित होने वाले नियमित भंडारा कार्यक्रमों में उल्लेखनीय सहभागिता को दर्शाता है।
इस पावन आयोजन के यजमान के रूप में रांची निवासी श्री शशि भूषण सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बीना सिंह ने भाग लिया। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भंडारा आयोजन में सहयोग प्रदान किया।
पूरे धार्मिक अनुष्ठान का संचालन मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपोश आचार्य तथा श्री नारायण दास जी द्वारा वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराया गया। अर्चकों ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की परंपराओं, सेवा और भक्ति के महत्व की जानकारी भी दी।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि खिचड़ी महाभंडारा केवल प्रसाद वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का भी माध्यम है। इस आयोजन के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे भाईचारे और समानता की भावना को बल मिलता है।
कार्यक्रम की सफलता में राम अवतार नारसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, राजेश सुल्तानिया, रंजन सिंह, प्रभाष मित्तल, ओमप्रकाश गाड़ोदिया, सुशील लोहिया, सुशील गाड़ोदिया, सीता शर्मा, यशोदा देवी, शंभूनाथ पोद्दार, सुशील पोद्दार सहित अनेक श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े सेवाभावियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि तिरुपति बालाजी मंदिर में नियमित रूप से आयोजित होने वाले ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को भी सुदृढ़ बना रहे हैं। 938वें खिचड़ी महाभंडारे की सफलता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आस्था, सेवा और समर्पण की भावना से आयोजित कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देते हैं।
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6:34:00 pm
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