मधुबनी । जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मत्स्य निदेशालय, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में संचालित बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (BAIP), जिसे गेट्स फाउंडेशन का वित्तीय सहयोग प्राप्त है, तथा PRADAN (प्रदान संस्था) के संयुक्त प्रयास से मधुबनी जिले में उन्नत नस्ल की मछलियों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
इस पहल के तहत जिले के छह चयनित मत्स्य किसानों ने अपनी पूंजी निवेश कर वैज्ञानिक रूप से विकसित उच्च गुणवत्ता वाले जयंती रोहू एवं अमृत कतला प्रजाति के स्पॉन (मत्स्य बीज) मंगवाए हैं। यह उन्नत स्पॉन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत ICAR-CIFA के अधिकृत मल्टीप्लायरों के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम में PRADAN संस्था किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक मत्स्य पालन संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार जयंती रोहू और अमृत कतला ऐसी उन्नत मत्स्य प्रजातियां हैं जिन्हें चयनित प्रजनन (Selective Breeding) तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इन प्रजातियों की वृद्धि दर सामान्य रोहू एवं कतला की तुलना में अधिक होती है, जिससे कम समय में अधिक वजन वाली मछलियां तैयार की जा सकती हैं। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। मत्स्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रजातियों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया तो मधुबनी जिले में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने कहा कि बिहार सरकार मत्स्य क्षेत्र को कृषि के समान एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि करना है। उन्होंने मत्स्य पालकों से पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होगी और लाभ में वृद्धि होगी।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, अनुदान तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग किसानों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बिहार मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।
वहीं BAIP टीम के प्रतिनिधि विवेक प्रियदर्शी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जिले में उन्नत मत्स्य प्रजातियों का विस्तार करना तथा किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा उत्पादन वृद्धि से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसान वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे।
कार्यक्रम से जुड़े किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि उन्नत स्पॉन की उपलब्धता उनके लिए एक नई संभावना लेकर आई है। उनका मानना है कि जयंती रोहू और अमृत कतला जैसी उच्च उत्पादन क्षमता वाली प्रजातियों के पालन से उत्पादन में वृद्धि होगी तथा उनकी आय में सकारात्मक बदलाव आएगा। किसानों ने मत्स्य विभाग, BAIP तथा PRADAN संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मधुबनी जिले में इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया गया तो यह न केवल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि, पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा। वैज्ञानिक मत्स्य पालन की यह पहल जिले के मत्स्य क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
Reviewed by PSA Live News
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9:40:00 pm
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