सर्व जन विकास पार्टी
शहीद भरत तिवारी हत्याकांड की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री,
बिहार सरकार, पटना।
विषय: शहीद भरत तिवारी हत्याकांड की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराकर दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने एवं पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित करने हेतु मांग पत्र।
महोदय,
सर्व जन विकास पार्टी यह मानती है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होता है। यदि किसी नागरिक की मृत्यु पुलिस कार्रवाई में संदिग्ध परिस्थितियों में होती है, तो उस घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायिक जांच होना लोकतंत्र, संविधान और विधि के शासन की मूल आवश्यकता है।
भरत तिवारी की मृत्यु को लेकर समाज, गांव, विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों के मन में अनेक गंभीर प्रश्न हैं। यदि इन प्रश्नों का निष्पक्ष उत्तर नहीं मिला तो आम जनता का कानून एवं न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा। इसलिए सर्व जन विकास पार्टी बिहार सरकार से मांग करती है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित कर समयबद्ध जांच कराई जाए।
जांच के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं—
1. जब भरत तिवारी के विरुद्ध कोई विधिवत प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं थी, तब लगातार तीन दिनों तक पुलिस द्वारा उनकी घेराबंदी किस अधिकारी अथवा किसके आदेश पर की गई? इसके पीछे क्या कानूनी आधार था?
2. यदि पुलिस तीन दिनों से लगातार घेराबंदी कर रही थी, तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सका? क्या यह पुलिस की विफलता थी या किसी अन्य योजना के तहत कार्रवाई की जा रही थी?
3. एक सामान्य सामाजिक कार्यकर्ता को पकड़ने के लिए विशेष कार्यबल (STF) को किसके आदेश पर लगाया गया? क्या इस स्तर की कार्रवाई आवश्यक थी?
4. बिना किसी विधिवत दर्ज प्राथमिकी के किसी सामाजिक कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से एसटीएफ की तैनाती क्या विधिसम्मत थी? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
5. दिनांक 16 जून को सार्वजनिक सभा में मुख्यमंत्री द्वारा यह कहा गया कि भरत तिवारी को गिरफ्तार कर मानसिक चिकित्सालय भेज दिया गया है। जबकि अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो जाती है। मुख्यमंत्री को यह जानकारी किस माध्यम से प्राप्त हुई थी? क्या संबंधित अधिकारियों ने गलत जानकारी दी थी?
6. यदि यह मामला पहले से ही राज्य सरकार और शीर्ष प्रशासनिक स्तर की जानकारी में था, तो 17 जून को ऐसी कौन-सी परिस्थिति उत्पन्न हुई कि गोली चलाने की नौबत आ गई? इसका आदेश किसने दिया?
7. प्रत्यक्षदर्शियों एवं उपलब्ध वीडियो के अनुसार भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था। यदि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के बजाय गोली क्यों मारी गई?
8. वायरल वीडियो में तीन गोलियों की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है, जबकि पोस्टमार्टम एवं अन्य तथ्यों में अधिक गोलियां लगने की बात सामने आती है। अतिरिक्त गोलियां कब, कहां और किन परिस्थितियों में चलाई गईं?
9. आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया? क्या आदेश लिखित था अथवा मौखिक? यदि मौखिक था तो उसका रिकॉर्ड क्यों नहीं है?
10. गंभीर रूप से घायल होने के बाद भरत तिवारी को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले थाने क्यों ले जाया गया? इस निर्णय के लिए कौन जिम्मेदार था?
11. शरीर के संवेदनशील एवं कमर के ऊपर के हिस्सों में गोली चलाने का निर्णय किस परिस्थिति में लिया गया? क्या यह पुलिस मैनुअल और बल प्रयोग के निर्धारित नियमों के अनुरूप था?
12. यह आरोप है कि दो गोलियां रास्ते में मारी गईं। यदि ऐसा हुआ तो इसकी पुष्टि कर दोषियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
13. वास्तविक रूप से गोली किस पुलिसकर्मी अथवा अधिकारी ने चलाई? सभी हथियारों की बैलिस्टिक जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
14. घटना स्थल को पहले से खाली किसके आदेश पर कराया गया? क्या मुठभेड़ का पूर्व नियोजित दृश्य तैयार करने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था? यदि हां, तो इस कथित साजिश में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।
15. यदि भरत तिवारी द्वारा विकास कार्यों, भ्रष्टाचार अथवा जनहित के मुद्दे उठाने के कारण उन्हें लगातार प्रताड़ित, अपमानित अथवा मानसिक रूप से परेशान किया गया, तो उन सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
16. केवल स्थानीय पुलिस अधिकारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि यह भी जांच की जाए कि क्या इस पूरे घटनाक्रम में कोई राजनीतिक, प्रशासनिक अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्ति भी शामिल था।
17. पीड़ित परिवार द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? यदि जांच लंबित है तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
18. घटना के समय मौजूद सभी पुलिसकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जाएं।
19. घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, मोबाइल वीडियो, पुलिस वायरलेस रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बॉडी कैमरा फुटेज एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर जांच समिति को उपलब्ध कराया जाए।
20. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट तथा फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि किसी प्रकार की आशंका समाप्त हो सके।
21. पूरे प्रकरण की जांच राज्य पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि जांच की विश्वसनीयता बनी रहे।
22. जांच पूरी होने तक घटना में शामिल सभी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से हटाया जाए, जिससे जांच प्रभावित न हो।
23. पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, परिवार की सुरक्षा तथा बच्चों की शिक्षा की संपूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए।
24. यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सिद्ध होती है, तो उसके विरुद्ध हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने तथा अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोरतम दंड दिलाया जाए।
25. न्यायिक जांच समिति को अधिकतम 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाए तथा रिपोर्ट के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सर्व जन विकास पार्टी की स्पष्ट मांग
हम बिहार सरकार से आग्रह करते हैं कि इस पूरे प्रकरण को केवल एक पुलिस कार्रवाई मानकर बंद न किया जाए, बल्कि संविधान, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। दोषी चाहे किसी भी पद, राजनीतिक दल या प्रशासनिक स्तर से संबंधित हों, उनके विरुद्ध समान रूप से कठोर कार्रवाई हो।
सर्व जन विकास पार्टी यह भी मांग करती है कि भरत तिवारी के परिवार को शीघ्र न्याय मिले, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जय हिंद।
सर्व जन विकास पार्टी
Reviewed by PSA Live News
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8:07:00 am
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