JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, सरकार से पहली वार्ता सकारात्मक; छात्रों ने कहा—भरोसा चाहिए, तभी आगे की रणनीति पर होगा फैसला
जयपाल सिंह स्टेडियम में खराब मौसम के बावजूद डटे अभ्यर्थी, आंदोलन को सर्व जन विकास पार्टी, लोजपा और आम लोगों का समर्थन | 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी पर सरकार के जवाब का इंतजार
रांची, 8 अगस्त 2026। झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब लगातार व्यापक रूप लेता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। बारिश और खराब मौसम के बावजूद छात्रों के हौसले में कोई कमी नहीं आई है। छात्र शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस एवं भरोसेमंद पहल की अपेक्षा कर रहे हैं।
आंदोलन के बीच सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब झारखंड सरकार ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का निर्णय लिया। सरकार की ओर से मंत्रियों के एक पैनल ने स्टेट गेस्ट हाउस में आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों को विस्तार से सुना। पहली दौर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सरकार की ओर से स्पष्ट और ठोस भरोसा चाहिए।
सरकार के मंत्रियों के पैनल ने सुनी छात्रों की मांगें
छात्रों के साथ बातचीत के लिए सरकार की ओर से बनाए गए मंत्री समूह में झामुमो के चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय शामिल रहे। मंत्री समूह ने छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतों, मांगों और आंदोलन के कारणों को समझने का प्रयास किया।
वार्ता समाप्त होने के बाद झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि छात्रों के साथ बैठक अच्छे माहौल में हुई। सरकार ने छात्रों की मांगों को समझा है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मंत्री के इस बयान के बाद आंदोलनरत अभ्यर्थियों में बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई दिया, लेकिन छात्र नेता अभी आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से जब तक स्पष्ट आश्वासन और ठोस कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र नेता बोले—पहली बैठक सकारात्मक, अब सरकार के भरोसे का इंतजार
सरकार के साथ बैठक के बाद छात्र नेता रवींद्र पासवान ने मीडिया से बातचीत में इसे आंदोलन के लिहाज से सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बैठक थी और बैठक का माहौल सकारात्मक रहा। सभी पक्षों ने साथ बैठकर छात्रों की समस्याओं और मांगों पर चर्चा की।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार, मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे। हालांकि, छात्रों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि आंदोलन को समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिलने वाले ठोस भरोसे और उसके आगे के कदमों पर निर्भर करेगा।
कोर कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि सरकार से मुलाकात सकारात्मक रही है। सरकार के प्रतिनिधियों ने उनकी बात सुनी है और छात्रों की मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें सरकार से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा भरोसा चाहिए जिस पर वे विश्वास कर सकें।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक और स्पष्ट भरोसा मिलता है तो 10 अगस्त को विधानसभा तक प्रस्तावित मार्च को लेकर आंदोलनकारी छात्र अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकते हैं। फिलहाल आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
सर्व जन विकास पार्टी ने किया छात्रों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। सर्व जन विकास पार्टी ने छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है।
पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला प्रत्येक छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करता है। वह अपना समय, ऊर्जा और संसाधन लगाकर परीक्षा की तैयारी करता है और पूरी उम्मीद के साथ परीक्षा में शामिल होता है। इसके पीछे केवल एक छात्र का सपना नहीं होता, बल्कि उसके परिवार और समाज की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं।
अशोक कुमार झा ने कहा कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा, अनियमितता या किसी भी प्रकार की ऐसी व्यवस्था सामने आती है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं और अयोग्य या फर्जी लोगों को नियुक्ति का अवसर मिलता है, तो यह गंभीर विषय है। इससे उन छात्रों के अधिकार प्रभावित होते हैं जिन्होंने ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा की तैयारी की है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ न्याय होना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष होनी चाहिए। सरकार को आंदोलनरत छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
सर्व जन विकास पार्टी ने कहा कि वह छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ खड़ी है और सरकार से अपील करती है कि छात्रों की बातों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा जहां कहीं भी शिकायतें हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
लोजपा ने भी दिया आंदोलन को समर्थन
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से भी समर्थन दिया गया है। पार्टी ने कहा है कि वह छात्रों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की लड़ाई में उनका समर्थन करती रहेगी।
लोजपा नेताओं की ओर से कहा गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र राज्य की युवा शक्ति हैं। उन्हें लंबे समय तक परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है। छात्रों की शिकायतों का निष्पक्ष समाधान होना चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
विधानसभा में भाजपा का विरोध, पोस्टर के जरिए सरकार पर हमला
छात्र आंदोलन का असर झारखंड विधानसभा की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। विपक्षी भाजपा लगातार विधानसभा परिसर में पोस्टर लगाकर JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों पर सरकार का विरोध कर रही है।
भाजपा का आरोप है कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में भी प्रमुखता से उठा रहा है और सरकार से जवाब मांग रहा है।
इस प्रकार एक ओर जहां विधानसभा के भीतर विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजधानी की सड़कों पर अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने छात्रों की नाराजगी दूर करने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब देने की चुनौती भी है।
जयपाल सिंह स्टेडियम बना छात्र आंदोलन का केंद्र
रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इन दिनों JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दिन गुजरने के साथ आंदोलन में छात्रों की सक्रियता कम होने के बजाय बढ़ती दिखाई दे रही है।
बारिश और खराब मौसम भी छात्रों के इरादे को कमजोर नहीं कर पा रहा है। छात्र शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन स्थल पर छात्रों के बीच आपसी सहयोग और एकजुटता भी देखने को मिल रही है। लंबे समय से धरने पर बैठे छात्रों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था में स्थानीय लोग भी सहयोग कर रहे हैं।
मंदिरों से पहुंच रही खिचड़ी, आम लोगों का भी बढ़ रहा सहयोग
आंदोलन की एक मानवीय तस्वीर भी सामने आ रही है। धरने पर बैठे भूखे-प्यासे छात्रों के लिए आसपास के मंदिरों से कभी खिचड़ी का प्रसाद तो कभी अन्य खाद्य सामग्री भेजी जा रही है। स्थानीय स्तर पर आम लोग भी छात्रों की मदद के लिए आगे आते दिखाई दे रहे हैं।
इससे आंदोलन को केवल छात्र संगठनों या राजनीतिक दलों तक सीमित न रहकर आम जनता का भी समर्थन मिलने का संकेत मिल रहा है।
कई स्थानीय लोग धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों का हालचाल पूछ रहे हैं और अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पानी तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जनता का यह सहयोग उन्हें संघर्ष जारी रखने की ताकत देता है।
छात्रों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—सरकार का अगला कदम क्या होगा?
सरकार और छात्रों के बीच हुई पहली बैठक ने बातचीत का रास्ता जरूर खोला है, लेकिन आंदोलन की अगली दिशा अब सरकार की अगली पहल पर निर्भर करती दिखाई दे रही है।
छात्रों ने साफ संकेत दिया है कि वे सरकार से टकराव नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है और सरकार की ओर से ठोस एवं स्पष्ट भरोसा मिलता है, तो आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।
दूसरी ओर, यदि बातचीत केवल आश्वासन तक सीमित रहती है और छात्रों को कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिलता, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
10 अगस्त को विधानसभा तक प्रस्तावित मार्च को लेकर भी छात्रों की रणनीति सरकार के रुख पर निर्भर बताई जा रही है। छात्र प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि सरकार से सकारात्मक भरोसा मिलने की स्थिति में इस कार्यक्रम पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था ही छात्रों के भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी
JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ी हैं। ऐसे में परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास से जुड़ा सवाल है।
एक छात्र कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति, माता-पिता की उम्मीदें और उसके अपने भविष्य का सपना परीक्षा से जुड़ा होता है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठने वाला कोई भी सवाल स्वाभाविक रूप से छात्रों के बीच चिंता और आक्रोश पैदा करता है।
जरूरत इस बात की है कि सरकार छात्रों की शिकायतों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दे के रूप में देखे। जहां शिकायतें हैं, वहां निष्पक्ष जांच हो, तथ्य सामने लाए जाएं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
अब निगाहें सरकार के अगले निर्णय पर
फिलहाल JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र डटे हुए हैं। राजनीतिक दलों का समर्थन बढ़ रहा है, आम लोगों की सहानुभूति और सहयोग भी दिखाई दे रहा है तथा विधानसभा के भीतर विपक्ष इस मुद्दे को उठा रहा है।
सरकार और छात्रों के बीच हुई पहली वार्ता ने एक सकारात्मक संवाद की शुरुआत जरूर की है। लेकिन आंदोलनकारी छात्रों के लिए असली परीक्षा अब सरकार के अगले कदम की है।
छात्रों का संदेश स्पष्ट है—वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें अपने भविष्य को लेकर ठोस भरोसा चाहिए।
अब देखना यह होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर किस स्तर तक आगे बढ़ती है और क्या आने वाले दिनों में ऐसा समाधान निकल पाता है, जिससे आंदोलन समाप्त हो तथा JPSC-JSSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों के बीच भरोसा दोबारा कायम हो सके।
फिलहाल रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से लेकर झारखंड विधानसभा तक JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की आवाज गूंज रही है और पूरे राज्य की निगाहें सरकार तथा आंदोलनरत छात्रों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं।
Reviewed by PSA Live News
on
1:16:00 pm
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