डॉ. एस. आर. रंगनाथन के योगदान को किया गया स्मरण, विद्यार्थियों से पुस्तकालय को अकादमिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान
संवाददाता — सुजीत कुमार मिश्र।
मधुबनी, 13 अगस्त 2026। संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल, मधुबनी में बुधवार को पुस्तकालय दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय परिसर में गरिमापूर्ण एवं ज्ञानपरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र को नई दिशा देने वाले महान शिक्षाविद् एवं पुस्तकालय वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और पुस्तकालय विज्ञान के विकास में उनके अतुलनीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. एस. आर. रंगनाथन के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, पूर्व छात्रों एवं विद्यार्थियों ने उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए पुस्तकालय एवं ज्ञान-संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नौशेरवान रौनक, शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. अजय कुमार, IQAC निदेशक डॉ. अमरेन्द्र कुमार, शोध एवं विकास निदेशक डॉ. मो. दानियाल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. अभिषेक ठाकुर तथा विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ. विवेकानंद कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पुस्तकालय ज्ञान और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र : डॉ. रौनक
अपने संबोधन में कुलसचिव डॉ. नौशेरवान रौनक ने पुस्तकालय को विश्वविद्यालय की ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों को रखने का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, चिंतन, अध्ययन, शोध और बौद्धिक विकास का केंद्र है।
उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ अतिरिक्त पुस्तकों एवं संदर्भ सामग्री के अध्ययन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
पुस्तकों से मित्रता सफलता की आधारशिला : डॉ. अजय कुमार
शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. अजय कुमार ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में पुस्तकों से मित्रता सफलता की मजबूत आधारशिला बन सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन के साथ संदर्भ पुस्तकों, शोध सामग्री एवं नवीन ज्ञान-संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन से विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
अकादमिक गुणवत्ता में पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका
IQAC निदेशक डॉ. अमरेन्द्र कुमार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान में पुस्तकालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की अकादमिक गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण आधार उसका पुस्तकालय होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने और उपलब्ध पुस्तकालय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।
शोध एवं विकास निदेशक डॉ. मो. दानियाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए विश्वसनीय पुस्तकों, शोध-पत्रों और प्रमाणिक सूचना-संसाधनों तक पहुंच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को जिज्ञासा, अध्ययन और अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने का संदेश दिया।
आधुनिक युग में भी प्रासंगिक हैं रंगनाथन के विचार
कार्यक्रम में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विद्यालय के विभागाध्यक्ष श्री शिवेन्द्र शेखर ने पुस्तकालय दिवस के ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ. रंगनाथन के पुस्तकालय विज्ञान में योगदान और उनकी पाठक-केंद्रित पुस्तकालय अवधारणा को वर्तमान डिजिटल युग में भी प्रासंगिक बताया।
विद्यालय की शैक्षणिक समन्वयक सुश्री श्रेया ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के बदलते स्वरूप तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध आधुनिक ज्ञान-संसाधनों की जानकारी साझा की।
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अभिजीत रॉय ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय केवल मुद्रित पुस्तकों तक सीमित नहीं है। आधुनिक पुस्तकालय डिजिटल ज्ञान, ई-संसाधनों, शोध सामग्री और सूचना के विभिन्न माध्यमों का समन्वित केंद्र बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकालय को अपने दैनिक अकादमिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
पुस्तकों से समृद्ध होता है व्यक्तित्व
छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. अभिषेक ठाकुर ने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में पुस्तकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पुस्तकें केवल विषय का ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि व्यक्ति के विचार, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व को भी समृद्ध करती हैं।
वहीं डॉ. विवेकानंद कुमार ने पुस्तकालय को विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच ज्ञान का सशक्त सेतु बताया तथा विद्यार्थियों से पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर यांत्रिक अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ. कुनाल किशोर चंदन, विद्युत अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष श्रीमती पूजा झा तथा सिविल अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल कुमार ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययनशील बनने और पुस्तकालय की उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
पुस्तकालय को बनाया जाए दैनिक अध्ययन का हिस्सा
मीडिया समन्वयक एवं प्राध्यापक सुजीत कुमार मिश्र ने पुस्तकालय दिवस की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि पुस्तकों और ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना किसी भी शिक्षण संस्थान की मूल शैक्षणिक जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सूचना की प्रचुरता के बीच प्रमाणिक एवं विश्वसनीय ज्ञान-संसाधनों की पहचान और उनका सार्थक उपयोग विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ज्ञान-संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विद्यालय के शिक्षक, पूर्व छात्र एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों से नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने, पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा ज्ञान को अपने व्यक्तित्व एवं करियर निर्माण का आधार बनाने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. एस. आर. रंगनाथन की पुस्तकालय संबंधी अवधारणाएं आज के डिजिटल और सूचना-प्रधान युग में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। समय के साथ पुस्तकालयों का स्वरूप भले ही बदल रहा हो, लेकिन ज्ञान के प्रसार, शोध को प्रोत्साहन और पाठकों को प्रमाणिक सूचना उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका आज भी केंद्रीय बनी हुई है।
अंत में सभी अतिथियों, विश्वविद्यालय पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के बीच पठन-पाठन, ज्ञानार्जन, शोध एवं पुस्तकालय के नियमित उपयोग को लेकर सकारात्मक संदेश दिया और विश्वविद्यालय में ज्ञान-संस्कृति को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी छाप छोड़ी।
Reviewed by PSA Live News
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