झंझारपुर में मखाना उत्पादन एवं उद्यमिता विकास पर कृषक प्रशिक्षण, 50 से अधिक किसानों ने लिया भाग
मधुबनी। मखाना उत्पादन को वैज्ञानिक खेती के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं बेहतर विपणन से जोड़कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसी उद्देश्य से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, झंझारपुर द्वारा लखनौर ग्राम में “मखाना उत्पादन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
यह प्रशिक्षण श्रृंखला का पांचवां चरण था। अब तक क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 250 से अधिक किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक उत्पादन तकनीक और उद्यमिता विकास के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मखाना उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी। डॉ. संजय कुमार, डॉ. सुनील कुमार मंडल, श्री आशीष राय एवं श्री धीरेंद्र कुमार ने खेत एवं जलाशय की तैयारी, पौध स्थापना, पोषक तत्व प्रबंधन, जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोग प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया।
खेती से आगे बढ़कर व्यवसाय पर जोर
प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि केवल मखाना उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को अपनाकर किसान अपने उत्पाद का बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे मखाना आधारित स्थानीय उद्यम विकसित होने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को मखाना के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मखाना उत्पादन से जुड़ी अपनी विभिन्न समस्याएं एवं जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान दिया गया।
कार्यक्रम तकनीकी पदाधिकारी श्री धीरेंद्र कुमार की देखरेख में संपन्न हुआ। संचालन डॉ. संजय कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्री आशीष राय ने किया।
समापन अवसर पर वैज्ञानिकों ने किसानों से आधुनिक तकनीक एवं उद्यमिता को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मखाना को केवल खेती की उपज न मानकर “खेती से व्यवसाय और व्यवसाय से समृद्धि” का माध्यम बनाया जा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में मखाना आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
Reviewed by PSA Live News
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9:56:00 pm
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