नई दिल्ली/रांची। रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री का सार्वजनिक रूप से उपहास उड़ाना और किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना लोकतांत्रिक एवं संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से देश और दुनिया के सामने संयम, गरिमा और जिम्मेदारीपूर्ण आचरण की अपेक्षा की जाती है।
श्री संजय सेठ ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं और सरकार की नीतियों की आलोचना विपक्ष का अधिकार है। लेकिन आलोचना और व्यक्तिगत उपहास के बीच स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत कटाक्ष, अपमानजनक भाषा और निराधार आरोपों के माध्यम से राजनीति को निम्न स्तर तक ले जाना न तो लोकतंत्र के हित में है और न ही देश की जनता इसे पसंद करती है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद केवल राजनीतिक पद नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण संसदीय जिम्मेदारी भी है। इस पद पर आसीन व्यक्ति के वक्तव्य का देश-विदेश में प्रभाव पड़ता है। इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने शब्दों और आचरण में संविधान, संसद और देश की गरिमा का विशेष ध्यान रखें।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि भारत की पहचान पूरी दुनिया में अपनी प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के लिए होती है। हमारी परंपरा हमें मतभेदों के बावजूद संवाद, सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। ऐसे में किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के प्रति सार्वजनिक मंच से अपमानजनक या असम्मानजनक टिप्पणी करना भारतीय संस्कृति और कूटनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
श्री सेठ ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ मैत्रीपूर्ण और रणनीतिक संबंध विकसित किए हैं। ऐसे समय में विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक बयानों से भी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक गरिमा प्रभावित होती है। इसलिए राजनीतिक दलों और उनके शीर्ष नेताओं को बयान देते समय व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि दूसरों का मजाक उड़ाने और व्यक्तिगत टिप्पणियां करने के बजाय उन्हें कांग्रेस संगठन को मजबूत करने तथा देश के सामने अपनी नीतियों और कार्यक्रमों का स्पष्ट खाका प्रस्तुत करने पर ध्यान देना चाहिए। देश की जनता यह जानना चाहती है कि कांग्रेस की आर्थिक नीति क्या है, रोजगार को लेकर उसका रोडमैप क्या है, राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर उसका दृष्टिकोण क्या है और विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका क्या होगी।
श्री संजय सेठ ने कहा कि देश की जनता आज विकास, रोजगार, सुरक्षा, सुशासन, आधारभूत संरचना और भारत के उज्ज्वल भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा चाहती है। जनता राजनीतिक दलों से ठोस नीतियां, स्पष्ट विजन और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका की अपेक्षा करती है। केवल व्यक्तिगत टिप्पणियों और आरोप-प्रत्यारोप से देश की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी है और सरकार की नीतियों की तथ्यात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत होना चाहिए। लेकिन आलोचना का स्तर ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे संवैधानिक संस्थाओं, लोकतांत्रिक पदों या भारत की अंतरराष्ट्रीय गरिमा को ठेस पहुंचे।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि जनता सब देख और समझ रही है। लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना को सम्मान मिलता है, लेकिन अपमानजनक भाषा, व्यक्तिगत कटाक्ष और अमर्यादित राजनीतिक आचरण को जनता लंबे समय तक स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि वह नकारात्मक और व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक एवं रचनात्मक बहस को आगे बढ़ाए।
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