JPSC-JSSC अभ्यर्थी आंदोलन: सरकार से वार्ता के लिए 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची जारी, बातचीत पर टिकीं उम्मीदें
रांची, 7 अगस्त। झारखंड में JPSC एवं JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार से होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता के लिए आंदोलनरत छात्रों ने अपने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेट्स) की अंतिम सूची जारी कर दी है। प्रतिनिधिमंडल अब सरकार के समक्ष छात्रों की मांगों को औपचारिक रूप से रखेगा।
छात्र आंदोलन पिछले कई दिनों से राजधानी रांची में लगातार जारी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी को लेकर छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं तथा सरकार से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता को आंदोलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से छात्रों ने सर्वसम्मति से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन कर उसकी अंतिम सूची सार्वजनिक की है। यह प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ होने वाली बैठक में छात्रों की ओर से सभी प्रमुख मांगों और समस्याओं को विस्तार से रखेगा।
सरकार से वार्ता करने वाले छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्य
- रवीन्द्र पासवान
- पीयूष कुमार
- राजेश प्रसाद
- नीतू कुजूर
- अंकित राज
- कार्तिक सोरेन
- शालू कुमारी
- रवींद्र कुमार रवि
- आनंद कुमार
- अंकित कुमार
छात्र संगठनों का कहना है कि यह प्रतिनिधिमंडल आंदोलनरत अभ्यर्थियों की भावनाओं और मांगों का प्रतिनिधित्व करेगा। प्रतिनिधिमंडल सरकार के समक्ष परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, लंबित नियुक्तियों को शीघ्र पूरा करने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग रखेगा।
इधर, सरकार की ओर से होने वाली वार्ता को लेकर अभ्यर्थियों में उत्सुकता बनी हुई है। आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्र भी वार्ता के परिणाम पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार सकारात्मक पहल करती है और मांगों पर ठोस निर्णय लेती है तो इसका लाभ राज्य के हजारों प्रतियोगी छात्रों को मिलेगा।
राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। कई संगठनों ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की है।
फिलहाल, पूरे झारखंड की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन आगे और तेज होता है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली यह वार्ता राज्य की लंबित भर्ती प्रक्रियाओं और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
Reviewed by PSA Live News
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9:43:00 pm
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