किसी भी सूरत में बाल श्रम बर्दाश्त नहीं: जिलाधिकारी आनंद शर्मा
विशेष धावा दल अभियान के अंतिम दिन 7 बाल व किशोर श्रमिक सकुशल विमुक्त, नियोजकों पर कसेगा कानूनी शिकंजा
मधुबनी (विशेष संवाददाता/जिला ब्यूरो): जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा (भा.प्र.से.) के कुशल मार्गदर्शन एवं श्रम अधीक्षक श्री रतीश कुमार के प्रत्यक्ष नेतृत्व में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतिम दिन बुधवार को धावा दल ने जिले के विभिन्न हिस्सों में सघन छापेमारी की। इस दौरान पंडौल, राजनगर और मधुबनी सदर के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कुल 07 बाल एवं किशोर श्रमिकों को सकुशल विमुक्त कराया गया। विमुक्त कराए गए सभी बच्चों को आवश्यक चिकित्सीय जांच एवं पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि “मधुबनी जिले में बाल श्रम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों का स्थान कारखानों या दुकानों में नहीं, बल्कि स्कूलों में है। बाल श्रम कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
विभिन्न प्रतिष्ठानों पर एक साथ पड़ा छापा
श्रम अधीक्षक रतीश कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष धावा दल ने योजनाबद्ध तरीके से जिले के चिह्नित होटलों, ढाबों, दुकानों, ऑटो मोबाइल गैराजों और ईंट-भट्टों पर एक साथ दबिश दी।
- प्रमुख कार्यस्थल: पंडौल, राजनगर तथा मधुबनी सदर क्षेत्र।
- विमुक्त श्रमिक: 07 बाल एवं किशोर श्रमिक।
- अगली कार्रवाई: बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुतिकरण एवं नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी।
श्रम अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि भले ही विशेष अभियान का अंतिम दिन था, लेकिन जिले के सभी प्रखंडों में बाल श्रम के खिलाफ जांच और रेस्क्यू ड्राइव आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
🛑 नियोजकों पर कसता कानूनी शिकंजा एवं पुनर्वास की व्यवस्था
| योजना / आदेश | निर्धारित प्रावधान एवं आर्थिक सहायता राशि |
|---|---|
| सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला (एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार) | बाल श्रम कराने वाले नियोजक से ₹20,000 प्रति श्रमिक की दर से वसूली कर जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा कराया जाएगा। |
| तत्काल आर्थिक सहायता | विमुक्त कराए गए प्रत्येक योग्य बाल श्रमिक को ₹3,000 की त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। |
| मुख्यमंत्री राहत कोष अनुदान (14 वर्ष से कम आयु) | बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत ₹25,000 का अनुदान सीधे विमुक्त बच्चे के पुनर्वास हेतु दिया जाता है। |
| किशोर श्रमिकों हेतु विशेष प्रावधान (14 से 18 वर्ष) | चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम (CLTS) में दर्ज 14-18 वर्ष के विमुक्त किशोरों को भी ₹25,000 की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। |
🏛️ पुनर्वास एवं मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम
बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा विमुक्त कराए गए बाल श्रमिकों को केवल रेस्क्यू करने तक ही सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि उनका सर्वांगीण पुनर्वास प्राथमिकता है:
- शिक्षा से जोड़ना: विमुक्त बच्चों का नजदीकी सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराकर नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
- पारिवारिक सामाजिक सुरक्षा: बच्चों के परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं (राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना) से जोड़ा जाएगा ताकि आर्थिक तंगी के कारण बच्चे पुनः बाल श्रम में न जाएं।
- मानसिक सह-परामर्श: बाल कल्याण समिति (CWC) द्वारा बच्चों का काउंसलिंग कर उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद दी जा रही है।
🛡️ धावा दल में शामिल अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों की टीम
अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए जिला स्तर पर गठित विशेष टीम में निम्नलिखित श्रम प्रवर्तन अधिकारी (LEO) एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे:
- श्री रतीश कुमार – श्रम अधीक्षक, मधुबनी (नेतृत्वकर्ता)
- श्री अश्विनी राज – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, जयनगर
- श्री चंदन गुप्ता – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, झंझारपुर
- श्री हितेश भार्गव – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, खजौली
- श्री हामिद गफूर – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, बिस्फी
- श्री अभिषेक कुमार – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, पंडौल
- श्री अमित कुमार – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, अंधराठाढ़ी
- श्री वसंत कुमार – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, खुटौना
- श्री रौशन कुमार – श्रम प्रवर्तन अधिकारी, रहिका
- गैर-सरकारी संगठन (NGO) के प्रतिनिधि एवं पुलिस बल।
📢 श्रम अधीक्षक का संदेश: आम जनता एवं प्रतिष्ठान मालिकों से अपील
"बाल श्रम सामाजिक और कानूनी अपराध है। जिले के सभी होटल, ढाबा, गैराज, ईंट-भट्ठा, बीड़ी कारखाने एवं दुकान मालिक अपने प्रतिष्ठानों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम न कराएं। यदि कोई भी नियोजक बाल श्रम कराता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। आम नागरिक भी यदि कहीं बाल श्रम देखें, तो तुरंत जिला श्रम कार्यालय या चाइल्डहेल्पलाइन पर सूचित करें।" — रतीश कुमार, श्रम अधीक्षक, मधुबनी
Reviewed by PSA Live News
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7:48:00 am
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