दिन - शनिवार
⛅ विक्रम संवत - 2077
⛅ शक संवत - 1942
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - माघ
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ तिथि - अष्टमी दोपहर 01:31 तक तत्पश्चात नवमी
⛅ नक्षत्र - रोहिणी पूर्ण रात्रि तक
⛅ योग - वैधृति 21 फरवरी प्रातः 05:16 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
⛅ राहुकाल - सुबह 09:59 से सुबह 11:26 तक
⛅ सूर्योदय - 06:09
⛅ सूर्यास्त - 17:38
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
💥 विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
💥 अष्टमी तिथि, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
💥 ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण')
💥 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण')
💥 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)
🌷 अस्थिरोग 🌷
💪🏻 जिनकी अस्थियाँ जकड गयी हो, टूट गयी हों, टेडी-मेढ़ी हो गयी हों अथवा जिनकी अस्थियों में पीड़ा होती हो, उनके लिए शीत ऋतू में लहसुन का उचित मात्रा में सेवन बहुत लाभदायी है l लहसुन के छिलके उतारकर रात को खट्टी छाछ में भिघोकर रखें l सुबह धोके पीसकर रस निकालें l १ से ४ ग्राम रस में उतना ही तिल का तेल अथवा घी मिलाकर पियें l आहार सात्विक, सुपाच्य लें l
💥 सावधानी : लहसुन तामसी होने के कारण रुग्णावस्था में भी इसका सेवन औषधवत करना चाहिए l
Reviewed by PSA Live News
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9:55:00 am
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