रांची । अगले साल लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है । इसी प्रक्रिया के तहत पांच राज्यों में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की घोषणा कर दी गयी है। जिसमें झारखंड भाजपा की जिम्मेदारी प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को दी गयी है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की है। जारी चिट्ठी के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष के घोषणा संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है ।
सांसद संजय सेठ ने दी बधाई
झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री व भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष बनाए जाने पर रांची के सांसद संजय सेठ ने बधाई दी है।
सांसद सेठ ने कहा झारखंड अलग राज्य बनने के बाद झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बनाए गए, उसके पूर्व वनांचल प्रदेश के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्य किया । बाबूलाल जी के पास काफी लंबा अनुभव रहा है, जिसका लाभ भाजपा संगठन को मिलेगा। हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह गौरव का पल है उनके नेतृत्व में झारखंड भाजपा का संगठन नई ऊंचाइयों को छूयेगा।
बाबूलाल ने तय किया शिक्षक से सीएम बनने का सफर
बाबूलाल मरांडी राजनीति में आने से पहले बतौर शिक्षक काम कर रहे थे। वे गिरिडीह के देवरी स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी कर रहे थे। इसके बाद से वे राजनीति की राह पकड़ ली और संघ के संपर्क में आ गए । साल 1990 में बाबूलाल मरांडी को संथाल परगना के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी थी । साल 1999 में अटल वाजपेयी की सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था । उसके बाद झारखंड राज्य अलग होने पर 2000 में बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बने थे । फिर साल 2003 में पार्टी में विरोध के कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा।
2006 में बनायी अलग पार्टी
साल 2006 में उन्होंने बीजेपी छोड़ झारखंड विकास मोर्चा नाम से अपनी पार्टी बनायी। साल 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा से चुनाव लड़ा । 2009 में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बाबूलाल की पार्टी जेवीएम ने चुनाव लड़ा था । अंत में फरवरी 2020 में उन्होंने अपनी पार्टी जेवीएम का बीजेपी में विलय कर दिया और बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए। अब शीर्ष नेतृत्व के द्वारा उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी है।
बाबूलाल के सामने अभी रांची के मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के साथ साथ 2024 की लोकसभा और विधान सभा चुनाव की कड़ी चुनौतियों से गुजरना है । अब इन चुनौतियों पर यह कितना खड़ा उतर पाएंगे यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा । परंतु इतना तो तय है कि अपनी पार्टी की अतर्कलह से गुजरते हुए खुद को पार्टी के उन्नीदों पर खड़ा उतार पाना बाबूलाल के लिए उतना ज्यादा आसान भी नहीं होगा ।
Reviewed by PSA Live News
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6:31:00 pm
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