मांडर (रांची): ऐतिहासिक मुड़मा जतरा मेला में रविवार को भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण अफरातफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि शाम तक मेले में करीब पचास हजार से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद थे, जबकि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो प्रशासन की कोई ठोस व्यवस्था दिखी, न ही जतरा संचालन समिति के स्वयंसेवक प्रभावी भूमिका निभाते नजर आए।
मेले में इस बार लगभग पांच हजार से अधिक दुकानें, झूले, झोपड़ियां और मनोरंजन स्टॉल लगाए गए हैं। लेकिन सुरक्षा और निगरानी के इंतज़ाम बेहद लचर साबित हुए हैं। लोगों का कहना है कि “मेला अपने चरम पर है, लेकिन सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।”
भीड़ इतनी बढ़ गई है कि कई स्थानों पर लोगों के बीच धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मौत के कुएं (Well of Death) में स्टंट दिखाने वाले कलाकारों और कुछ दर्शकों के बीच मारपीट की घटना भी हुई। बताया जाता है कि टिकट बिक्री को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई और लात-घूंसे तक की नौबत आ गई।
स्थिति बिगड़ने पर मौके पर तैनात कुछ ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने बीच-बचाव किया। विवाद थमने के बाद मौत का कुआं अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और मामला मांडर थाना पहुंच गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार जतरा में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। मेला क्षेत्र में न तो पर्याप्त पुलिस बल है, न ही फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस की तैनाती। संकरी गलियों में भीड़ इतनी अधिक है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
एक दुकानदार ने बताया, “रात होते ही भीड़ अनियंत्रित हो जाती है, पर कोई देखने वाला नहीं। बच्चे और महिलाएं तक ठोकर खा रहे हैं। अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता, तो हादसा तय है।”
मांडर थाना प्रभारी ने बताया कि “मेला क्षेत्र में पुलिस गश्त जारी है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया जा रहा है।” हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पुलिस बल की संख्या भीड़ की तुलना में बेहद कम है।
जतरा समिति के एक सदस्य ने स्वीकार किया कि “इस बार उम्मीद से कई गुना अधिक भीड़ उमड़ी है। कोशिश की जा रही है कि अतिरिक्त स्वयंसेवक और रोशनी की व्यवस्था कर स्थिति को सामान्य बनाया जाए।”
फिलहाल, पूरे मेला क्षेत्र में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल है। लोग डर और असुरक्षा के साये में जतरा का आनंद लेने को मजबूर हैं। स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से तुरंत भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि इस पारंपरिक ऐतिहासिक जतरा में किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
Reviewed by PSA Live News
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8:51:00 am
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