ब्लॉग खोजें

दिनांक 29 दिसम्बर, 2025 को माननीया राष्ट्रपति महोदया की गरिमामयी उपस्थिति में जमशेदपुर में आयोजित “22वें परसी महा एवं ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह” के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:-


जोहार!  नमस्कार!

1. सर्वप्रथम, ‘लौहनगरी’ जमशेदपुर की इस पावन भूमि पर आज माननीया राष्ट्रपति महोदया की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित “22वें परसी महा एवं ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह” के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में भारत की माननीया राष्ट्रपति महोदया का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति, कला और अस्मिता का सजीव उत्सव है।


2. माननीया राष्ट्रपति महोदया के आगमन से सम्पूर्ण राज्य में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। अपनी सादगी, मृदु स्वभाव और जनता के प्रति समर्पण के कारण उन्होंने जनमानस में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। माननीया राष्ट्रपति महोदया सामाजिक न्याय, जनजातीय उत्थान और महिला सशक्तिकरण की जीवंत प्रतीक हैं। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए, अपने गाँव से कॉलेज जाने वाली प्रथम महिला बनने से लेकर आज भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित करने तक की उनकी जीवन-यात्रा देश की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी गरिमामयी उपस्थिति से यह समारोह ऐतिहासिक तथा अधिक प्रेरणादायी बन गया है।



3. जमशेदपुर केवल एक औद्योगिक नगर नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों के सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की जीवंत प्रयोगशाला है। यह वही भूमि है जहाँ युगद्रष्टा जमशेदजी टाटा ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ सामाजिक समरसता, श्रमिक सम्मान और सांस्कृतिक गरिमा की मजबूत नींव रखी। यही कारण है कि जमशेदपुर सांस्कृतिक सौहार्द और समावेशी विकास का आदर्श उदाहरण माना जाता है।


4. यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि आज यहाँ आयोजित ‘परसी महा’ अथवा ‘भाषा महोत्सव’ संथाली भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के उत्सव का प्रतीक है। यह महोत्सव हमारी लोक-संस्कृति, लोक-स्मृति और सामुदायिक एकता का उत्सव है, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान को जीवित रखे हुए हैं।


5. पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार द्वारा वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संथाली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया था। यह निर्णय संथाली भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि था। मेरा सौभाग्य रहा कि उस मंत्रिपरिषद का मैं भी सदस्य था।


6. आज जब ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया जा रहा है, तो यह अवसर महान समाज सुधारक पंडित रघुनाथ मुर्मू के अतुलनीय योगदान का स्मरण कराता है। उन्होंने व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर समाज, भाषा और संस्कृति के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। अल्पायु में ही अपनी मातृभाषा को लिपि प्रदान करने का संकल्प लेकर उन्होंने ओल चिकी लिपि का सृजन किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प और सच्चे उद्देश्य के साथ किया गया प्रयास असंभव को भी संभव बना सकता है।


7. ओल चिकी केवल एक लिपि नहीं, बल्कि संथाली समाज की वैचारिक चेतना, सांस्कृतिक गरिमा और पहचान का प्रतीक है। इस लिपि ने संथाली भाषा को शिक्षा, साहित्य और शोध के क्षेत्र में सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। 


8. आज का भारत अपनी भाषायी और सांस्कृतिक विविधता को अपनी शक्ति के रूप में आत्मसात करते हुए आगे बढ़ रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प के साथ समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर है, जहाँ जनजातीय समाज सहित सभी समुदायों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षण और सम्मान देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। परसी महा एवं ओल चिकी लिपि का यह शताब्दी समारोह इसी समावेशी राष्ट्र-निर्माण की भावना का सशक्त प्रतीक है।



9. मैं इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों, कलाकारों, साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। संताली नृत्य, लोकगीत, नाट्य, कला और साहित्य के माध्यम से आपने हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। आपके ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों में अपनी भाषा, लिपि और परंपरा के प्रति गर्व और आत्मसम्मान की भावना का संचार करेंगे। 


10. झारखण्ड राज्य के राज्यपाल के रूप में मैं यह आश्वस्त करना चाहूँगा कि ‘लोक भवन’ जनजातीय भाषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव सहयोगी रहेगा। ‘लोक भवन’ का द्वार राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए सदैव खुला है और ‘आमजनों के हितों के संरक्षक’ के रूप में यह अपनी भूमिका निभाता रहेगा।


11. अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा—“भाषा और संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति हैं।” आइए, हम सब मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। मैं एक बार पुनः इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई देता हूँ तथा सम्मानित होने वाले सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता हूँ।

जय हिन्द!  जय झारखण्ड!

दिनांक 29 दिसम्बर, 2025 को माननीया राष्ट्रपति महोदया की गरिमामयी उपस्थिति में जमशेदपुर में आयोजित “22वें परसी महा एवं ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह” के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:- दिनांक 29 दिसम्बर, 2025 को माननीया राष्ट्रपति महोदया की गरिमामयी उपस्थिति में जमशेदपुर में आयोजित “22वें परसी महा एवं ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह” के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:- Reviewed by PSA Live News on 5:25:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.