किसानों के लिए बड़ी सौगात: अल्पावधि व उच्च उपज वाली ‘आईआईएबी धान 5’ किस्म का लोकार्पण, पूर्वी भारत में धान उत्पादन को मिलेगी नई गति
रांची। किसानों की आय बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित 25 विभिन्न फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों का लोकार्पण किया। इन किस्मों को विशेष रूप से अधिक उत्पादकता, रोग-कीट सहनशीलता और विविध agro-climatic परिस्थितियों के अनुकूल विकसित किया गया है।
इन नई किस्मों में ‘आईआईएबी धान 5’ किसानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आशाजनक धान किस्म के रूप में सामने आई है। इस किस्म को आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी), रांची द्वारा विकसित किया गया है। भारत सरकार के राजपत्र (दिनांक 31 दिसंबर 2025) के अनुसार, इस किस्म को झारखंड, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में खेती के लिए अधिसूचित किया गया है, जिससे पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी भारत के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
आईसीएआर-आईआईएबी, रांची के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. वी. पी. भड़ाना ने जानकारी देते हुए बताया कि आईआईएबी धान 5 एक अल्पावधि एवं उच्च उपज देने वाली किस्म है, जो सिंचित रोपाई परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। यह किस्म लगभग 89 दिनों में फूल लाती है तथा 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी अल्पावधि प्रकृति किसानों को समय पर अगली फसल बोने का अवसर देती है, जिससे फसल चक्र और आय दोनों में वृद्धि संभव होती है।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय समन्वित धान सुधार परियोजना (AICRIP) के अंतर्गत वर्ष 2022 से 2024 तक किए गए तीन वर्षों के बहु-स्थलीय परीक्षणों में इस किस्म ने औसतन 5.8 टन प्रति हेक्टेयर की उपज दी। यह उपज प्रचलित चेक किस्मों, जैसे सीओ 51, की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत अधिक पाई गई, जो इसे किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी बनाती है।
रोग एवं कीट प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी आईआईएबी धान 5 अत्यंत प्रभावशाली है। यह किस्म धान की प्रमुख बीमारियों जैसे ब्लास्ट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट और शीथ रॉट के प्रति सहनशील है। साथ ही, ब्राउन प्लांट हॉपर जैसे नुकसानदायक कीटों के प्रति भी इसमें बेहतर सहनशीलता देखी गई है। इसके अतिरिक्त, यह किस्म लॉजिंग (फसल गिरना) और दाना झड़ने के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे कटाई के समय होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आती है।
धान की गुणवत्ता के मामले में भी आईआईएबी धान 5 किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है। इसके दाने लंबे और पतले, अच्छी मिलिंग रिकवरी वाले तथा पकाने में उत्कृष्ट गुणवत्ता के हैं। यही कारण है कि यह किस्म घरेलू उपभोग के साथ-साथ बाजार बिक्री के लिए भी अत्यंत उपयुक्त मानी जा रही है।
आईसीएआर-आईआईएबी, रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने कहा कि आईआईएबी धान 5 एक विश्वसनीय, किसान-अनुकूल और भविष्य उन्मुख किस्म है। इसकी अल्पावधि प्रकृति, तनाव सहनशीलता और व्यापक अनुकूलन क्षमता इसे पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी भारत के किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बनाती है। उन्होंने बताया कि ऐसी अल्पावधि धान किस्में खेत को जल्दी खाली कर देती हैं, जिससे धान परती क्षेत्रों में अवशिष्ट मृदा नमी का उपयोग कर रबी फसलों की समय पर बुवाई संभव हो पाती है। इससे न केवल फसल सघनता बढ़ती है, बल्कि जलवायु जोखिम में कमी और कुल कृषि लाभप्रदता में वृद्धि भी होती है।
डॉ. रक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि आईआईएबी धान 5 का विमोचन खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और टिकाऊ धान उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आगामी कृषि मौसम में संस्थान द्वारा इस किस्म के गुणवत्तापूर्ण बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे इसके व्यापक प्रसार और बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, आईआईएबी धान 5 न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि पूर्वी भारत में धान उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
Reviewed by PSA Live News
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3:03:00 pm
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